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गरीबी का सच: चंडीगढ़ में बड़ा घर, एसी और गाड़ी भी.. फिर भी उठा रहे थे मुफ्त का राशन, दो हजार परिवारों की सब्सिडी बंद

Thu, 29 Jul 2021 02:36 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 29 Jul 2021 02:36 PM IST
सार

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के तहत इस योजना का लाभ सिर्फ वही परिवार ले सकते हैं, जिनकी महीने की बिजली की खपत 300 यूनिट से कम है, लेकिन कई लोग ऐसे भी मिले, जिनकी बिजली की खपत इससे कई गुना ज्यादा थी।

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Two thousand families were taking free ration despite being capable in Chandigarh
सब्सिडी - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

चंडीगढ़ में करीब दो हजार परिवार सक्षम होने के बावजूद मुफ्त का राशन और हर महीने खाद्य विभाग की तरफ से आने वाली रकम ले रहे थे। इनमें से कई परिवार ऐसे थे, जिनके एसी वाले बड़े घर पाए गए, वहीं कुछ ऐसे थे, जिनके नाम पर आरएलए में कई गाड़ियां पंजीकृत थीं। खाद्य विभाग ने भौतिक सत्यापन के बाद इनकी सब्सिडी काट दी है।

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यूटी प्रशासन के खाद्य विभाग ने ऐसे परिवारों की पहचान के लिए रजिस्टरिंग एवं लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) व बिजली विभाग के डाटा का इस्तेमाल किया। जो लोग डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के तहत पंजीकृत थे और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत राशन उठा रहे थे, उनके नाम, पते और आधार नंबर आदि का मिलान आरएलए और बिजली विभाग के डाटा के साथ किया गया तो इनमें से कई लोग कार के मालिक निकले। 
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के तहत इस योजना का लाभ सिर्फ वही परिवार ले सकते हैं, जिनकी महीने की बिजली की खपत 300 यूनिट से कम है, लेकिन कई लोग ऐसे भी मिले, जिनकी बिजली की खपत इससे कई गुना ज्यादा थी। ऐसे परिवार व कुछ अन्य संदेहजनक परिवारों की सूची बनाई गई और फिर खाद्य विभाग के अधिकारियों को उनके घर भौतिक सत्यापन के लिए भेजा गया। इस दौरान पाया गया कि वह लोग भी हर महीने पैसे व मुफ्त राशन ले रहे हैं, जिनके पास गाड़ियां हैं। यही नहीं, घर में एसी तक लगा था। कुछ ऐसे भी थे, जो सरकारी नौकरी में थे। ऐसे करीब 2000 परिवारों की सब्सिडी काट दी गई है।

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अब भी कई लोग सक्षम, इसलिए होगी ई-केवाईसी

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के तहत शहर में लाभार्थियों को राशन नहीं दिया जाता, बल्कि पीले कार्डधारक परिवार के लिए 125.46 रुपये प्रति सदस्य (हर माह) व अंत्योदय अन्न योजना के तहत 878.22 रुपये प्रति परिवार (हर माह) जारी किए जाते हैं। विभाग को संदेह है कि शहर में अब भी कई ऐसे परिवार हैं, जो सक्षम हैं लेकिन योजना के तहत राशन ले रहे हैं, इसलिए एक हफ्ते बाद पीएमजीकेवाई के चौथे चरण के राशन वितरण के साथ विभाग ई-केवाईसी शुरू करेगा। इसके तहत जो भी व्यक्ति राशन लेने आएगा, उससे कुछ जानकारियां मांगी जाएंगी। इनकी मदद से खाद्य विभाग अपने डाटा को अपडेट करेगा और अगर कोई ऐसा मिलता है, जिसकी आय एनएफएसए-2013 के मानदंडों से ज्यादा है तो उसे लाभार्थियों की सूची से बाहर किया जाएगा। पीएमजीकेवाई के तहत तीन बार राशन बांटा जा चुका है, लेकिन हर बार तीन से चार हजार परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने एक बार भी राशन नहीं उठाया है। विभाग के अनुसार ऐसे परिवारों की सब्सिडी काटी जाएगी।


भौतिक सत्यापन में सामने आई यह सच्चाई
  • राशन कार्ड बनवाया और चंडीगढ़ छोड़कर गांव में जा बसे
  • विभाग को दिए पते पर रहते ही नहीं
  • खाद्य विभाग के अधिकारी घर गए तो लाभार्थी उन्हें हर तरह से सक्षम लगे। उदाहरण के तौर पर बड़ा घर और एसी भी लगा हुआ पाया गया। घर में गाड़ी भी खड़ी मिली।
  • आरएलए के डाटा के अनुसार, कार्ड धारक के नाम गाड़ी पंजीकृत 
  • बिजली की खपत 300 यूनिट से कई गुना ज्यादा
  • घर जाने पर कुछ लोगों ने खुद ही सब्सिडी खत्म करने का किया आग्रह

खाद्य विभाग ने आरएलए व बिजली विभाग का डाटा और फिर भौतिक सत्यापन कर ऐसे लोगों की पहचान की, जो सक्षम थे लेकिन डीबीटी लाभार्थी की सूची में थे। इन्हें अब सूची से बाहर कर दिया गया है। अब राशन बांटने के साथ ई-केवाईसी भी की जाएगी।  - नितिका पवार, निदेशक, खाद्य विभाग

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