पटियाला में अस्पताल की छठी मंजिल से दो नर्सों ने मारी छलांग, हालत गंभीर, जानें क्या है पूरा मामला
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पटियाला के सरकारी राजिंदरा अस्पताल में रेगुलर करने की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से मेडिकल सुपरिंटेंडेंट दफ्तर की बिल्डिंग की छठी मंजिल पर बैठीं नर्सिंग स्टाफ की प्रधान कर्मजीत कौर औलख व उनकी साथी नर्स बलजीत कौर खालसा ने गुरुवार देर शाम छलांग दी।
दरअसल, गुरुवार दोपहर बाद आंदोलनकारी नर्सों को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ पैनल मीटिंग का समय दिया गया था। लेकिन भारत-पाक तनाव के मद्देनजर सीएम के सीमावर्ती इलाकों के दौरे के कारण यह मीटिंग नहीं हो सकी। इससे नर्सें भड़क गईं और यह कदम उठा दिया। दोनों नर्सों को अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी।
रेगुलर करने की मांग को लेकर पांच फरवरी से छेड़ा था आंदोलन
सरकारी राजिंदरा अस्पताल की कांट्रैक्ट नर्सें, चौथा दर्जा मुलाजिमों ने फरवरी माह की शुरुआत से ही रेगुलर करने की मांग को लेकर पंजाब सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था। इसके तहत पहले नर्सों ने काम छोड़कर धरना प्रदर्शन शुरू किया। इसके बाद छह फरवरी को अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के दफ्तर की बिल्डिंग पर चढ़ गई थीं।
जब आंदोलनकारियों को सीएम के साथ 28 फरवरी को दोपहर बाद साढ़े तीन बजे का पैनल मीटिंग का समय मिला तो हड़ताल खत्म कर दी। लेकिन नर्सिंग स्टाफ की प्रधान कर्मजीत कौर औलख व साथी नर्स बलजीत कौर खालसा बिल्डिंग की छठी मंजिल से नीचे नहीं उतरीं। इनका कहना था कि सीएम के साथ मीटिंग का समय तो मिल गया है लेकिन जब तक उनके हाथ में रेगुलर करने का लिखित आर्डर नहीं आएगा, तब तक वह नीचे नहीं उतरेंगी।
समय-समय पर अधिकारियों ने की मनाने की कोशिश
समय-समय पर जिला व पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने दोनों से बात कर इन्हें नीचे उतारने की कोशिश की। लेकिन दोनों नर्सें अपनी बात पर अड़ी रहीं। नर्सों ने साफ कर दिया कि मांगें नहीं मानीं तो छलांग लगा देंगी। हालांकि वह प्रशासन को समय देती रहीं। पहले नर्सों ने 14 फरवरी को छलांग लगाने का एलान किया था। फिर जल्द मीटिंग का भरोसा मिलने पर 18 फरवरी का समय तय किया। इसके बाद 28 फरवरी को पैनल मीटिंग का समय मिलने पर नर्सें रुक गईं थीं।
समय देकर भी सीएम ने नहीं की मीटिंग, इसलिए उठाया कदम
नर्स जसमीत कौर ने बताया कि उन्हें 28 फरवरी यानि गुरुवार को सीएम के साथ पैनल मीटिंग का समय दिया गया था। लेकिन गुरुवार को जब छह लोगों का शिष्टमंडल चंडीगढ़ पहुंचा, तो पता लगा कि मीटिंग स्थगित हो गई है। कहा गया कि मुख्यमंत्री भारत-पाक के बीच चल रहे तनाव के चलते बॉर्डर इलाकों के दौरे पर हैं।
जब नर्सों ने सेहत मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा से लिखित में उनकी मांगें मानने का आश्वास मांगा, तो मंत्री ने इनकार कर दिया। इस पर उन्हें पांच मार्च को मीटिंग का समय दे दिया। इस बात पर नर्सें भड़क गईं। नर्सों ने कहा कि सरकार जानबूझ कर मीटिंग का समय आगे डाल रही है, ताकि चुनाव आचार संहिता लग जाए और फिर उन्हें मांगें न मानने का एक बहाना मिल जाए।
नर्सों ने दिया था अल्टीमेटम, छह बजे तक कुछ न किया, तो लगा देंगी छलांग
नर्सों ने शाम छह बजे का समय दिया था कि अगर तब तक कुछ होता है, तो ठीक है। वरना वह ऊपर से छलांग लगा देंगी। उनकी इस धमकी के कारण मौके पर जिला व पुलिस प्रशासन, अस्पताल प्रशासन के अधिकारी, फायर ब्रिगेड और जंगलात विभाग के मुलाजिम मौजूद थे। लेकिन उनके देखते ही देखते एक-एक करके दोनों नर्सों ने छठी मंजिल से छलांग लगा दी।
दोनों नर्सें पहली मंजिल पर लगे जाल और गद्दों पर गिरीं। तुरंत दोनों को उठाकर अस्पताल की इमरजेंसी में दाखिल कराया गया। जहां दोनों का इलाज खबर लिखे जाने तक चल रहा था। दोनों की हालत गंभीर बताई जा रही है।