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सेक्स वर्करों को जीने की राह दिखा रहीं ये दो छात्राएं
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 30 Nov 2013 08:45 AM IST
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जीएमसीएच-32 के आडिटोरियम में आयोजित एड्सकॉन कांफ्रेंस के बाहर पीयू की दो युवतियां एक स्टाल लगाकर बैठी हैं। इस स्टाल में वे सेक्स वर्कर की ओर से बनाए गए रिसाइकिल सामान को बेच रही हैं।
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साथ ही वे एड्स के प्रति लोगों को जागरूक भी कर रही हैं। पीयू के सेंट्रल फॉर सोशल वर्क की छात्रा आकृति नेगी और शिवी रैना ने बताया कि वे पिछले एक साल से ये सामान बेच रही हैं। इस काम के लिए वे कोई भी मेहताना नहीं लेतीं।
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आनंदपुर साहिब से आता है सामान
आकृति और शिवी ने बताया कि अंबुजा सीमेंट की ओर से आंनदपुर साहिब में एक प्लांट लगाया गया है। यहां पर सिर्फ सेक्स वर्कर ही काम करती हैं।
सेक्स वर्कर यहां पर डायरी, पैड और फाइलें बनाती हैं। फाइलें तैयार होने के बाद वे आकृति और शिवी के पास आती हैं और वे उसे बेचने के लिए स्कूलों और ऑफिस के चक्कर लगाती हैं।
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वे अब तक आठ हजार से ज्यादा फाइलें और डायरी पैड बेच चुकी हैं। इस सामान को बेचने से जो भी रुपया आता है, उसे सेक्स वर्करों को भेज दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि इन सेक्स वर्करों को अब जीने की राह मिल गई है। पहले इस काम में कुछ ही सेक्स वर्कर जुड़ी थीं, लेकिन अब इनकी संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
सामान बेचने में नहीं आती शर्म
आकृति और शिवी का कहना है कि उन्हें ऑफिस-ऑफिस जाकर सामान बेचने में किसी तरह की शर्म नहीं आती। घरवालों का पूरा सपोर्ट मिलता है।
जब उनसे पूछा गया कि वे उनकी मदद को क्यों आगे आईं, उन्होंने बताया कि इसके पीछे एड्स पीड़ितों का दर्द है। समाज उन्हें अपने से अलग समझता है।
यह उनसे देखा नहीं जाता। इसलिए उन्होंने इससे पीड़ित और इस दलदल में फंसे लोगों के लिए कुछ करने की ठानी और यह काम कर रही हैं।