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पंजाब में एक और घोटाला: एक DFO के स्टिंग ने खोले राज, दो पूर्व मंत्रियों की जल्द हो सकती गिरफ्तारी
Sat, 18 Jun 2022 12:06 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sat, 18 Jun 2022 12:06 AM IST
सार
यह भूमि ढाई-ढाई एकड़ के फार्म हाउस के रूप में अवैध तरीके से मात्र 50 हजार रुपये में 33 साल की लीज पर अलॉट कर दी गई। वहीं जिन नेताओं, अफसरों को यह जमीन अलॉट की गई, उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर अपने फार्म हाउसों में पक्का निर्माण करा लिया, जबकि वन भूमि में ऐसे निर्माण की अनुमति नहीं होती।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब में वन भूमि पर पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में पूर्व मंत्री धर्मसोत की गिरफ्तारी का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि पिछली सरकार के दौरान चंडीगढ़ के आसपास वन और पंचायती जमीनों को औने-पौने दाम में बेचे जाने का घोटाला सामने आ गया। इस मामले में एक डीएफओ के स्टिंग से खुले राज के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने दो पूर्व मंत्रियों समेत जमीन कब्जाने वाले अफसरों व अन्य लोगों को राडार पर ले लिया है, जिनकी जल्द गिरफ्तारी हो सकती है।
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जांच में सामने आया है कि ढाई-ढाई एकड़ की करोड़ों की जमीन फार्म हाउस के रूप में नेताओं और अफसरों ने 50-50 हजार रुपये में लीज पर ले ली। इस बीच यह मामला मुख्यमंत्री के ध्यान में भी लाया गया, जिसे लेकर जल्द अगली कार्रवाई के आदेश जारी होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि संगरूर में गुरुवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि उनके पास भ्रष्ट नेताओं की सूची है और जल्दी ही सब अंदर होंगे, इसे घोटाले को लेकर की जाने वाली कार्रवाई के बारे में मुख्यमंत्री का संकेत माना जा रहा है। इस घोटाले में जिन पूर्व मंत्रियों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें पूर्व पंचायत मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा का नाम भी शामिल है, जिसके बारे में मौजूदा पंचायत मंत्री ने हाल ही में कई खुलासे किए थे।
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दूसरे मंत्री ने हाल ही में हाईकोर्ट से ब्लैंकेट बेल के लिए आवेदन किया है। जानकारी के अनुसार राज्य की पिछली सरकार ने चंडीगढ़ के आसपास मोहाली जिले की वन और पंचायत भूमि, जिसकी बाजार कीमत करोड़ों में है, नेताओं, चहेते अफसरों व लोगों को कुछ हजार रुपये में ही बांट दी। यह सारी भूमि पंचायत और वन विभाग की संपत्ति है।
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यह भूमि ढाई-ढाई एकड़ के फार्म हाउस के रूप में अवैध तरीके से मात्र 50 हजार रुपये में 33 साल की लीज पर अलॉट कर दी गई। वहीं जिन नेताओं, अफसरों को यह जमीन अलॉट की गई, उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर अपने फार्म हाउसों में पक्का निर्माण करा लिया, जबकि वन भूमि में ऐसे निर्माण की अनुमति नहीं होती।
इस बीच, जिस डीएफओ का स्टिंग वायरल हुआ है, उससे यह भी खुलासा हुआ है कि वन और पंचायत की इस भूमि की बंदरबांट हिमाचल प्रदेश की सीमा तक की गई है, जबकि वनों के पर्वतीय क्षेत्रों से किसी भी तरह की छेड़छाड़ कानूनन अपराध है। यह भी पता चला है कि जिन नेताओं और लोगों को फार्म हाउस अलॉट किए गए, उन्होंने संबंधित भूमि पर लगे खैर के पेड़ भी बिना अनुमति काट दिए हैं।
उधर, विजिलेंस ब्यूरो ने मामले में जांच शुरू कर दी है, जिसमें अब तक यह सामने आया है कि चहेतों को बांटी गई जमीन पिछली सरकार के समय संबंधित मंत्रियों की अनुमति से दी गई, जिसके लिए बाकायदा अनुमति की फाइलें भी तैयार की गई थीं। ब्यूरो की तरफ से जमीन के मालिक बने बैठे नेताओं, अफसरों और अन्य लोगों को जमीन किस तरह मिली, इसकी जांच शुरू कर दी है।