{"_id":"5a2b6e964f1c1b68678c0d06","slug":"true-story-of-modern-indian-military-heroes","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Exclusive: उरी हमले के दिन ही हो गया था सर्जिकल स्ट्राइक करने का फैसला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Exclusive: उरी हमले के दिन ही हो गया था सर्जिकल स्ट्राइक करने का फैसला
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 09 Dec 2017 08:12 PM IST
विज्ञापन
Surgical Strike
- फोटो : File Photo
29 सितंबर 2016 को इंडियन आर्मी ने एलओसी पार आतंकियों के लांचिंग पैड तबाह कर पाकिस्तान को करारा जवाब दिया था। इस ऑपरेशन का हिस्सा रहे फोर्स के एक कैप्टन ने ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत की है। उन्होने बताया कि सर्जिकल स्ट्राइक का फैसला सेना ने उरी में आतंकियों द्वारा किए गए हमले के बाद ही कर लिया था।
पाकिस्तान और पाक समर्थित आतंकियों को कड़ा सबक सिखाने के लिए 10 दिन तक इस ऑपरेशन की खास रणनीति तैयार की गई। ऑपरेशन 72 घंटे के लिए तैयार किया गया था, जिसमें इंडियन फोर्स को 2 से 4 किलोमीटर दुश्मन की सरहद के भीतर जाकर हमला करना था। इसके लिए सेना के तेज तर्रार कमांडों की चार रेजिमेंटों को चुना गया।
सभी जांबाजों को आम फोर्स के अपेक्षाकृत अत्याधुनिक हथियार दिए गए, ताकि ऑपरेशन पूरी तरह सफल हो और दुश्मन पूरी तरह नेस्तानाबूद हो। 72 घंटे के इस ऑपरेशन में जवानों का घंटों भूखा रहना भी ऑपरेशन का हिस्सा था, ताकि जवानों की अर्लटनेस बनी रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
पाकिस्तान और पाक समर्थित आतंकियों को कड़ा सबक सिखाने के लिए 10 दिन तक इस ऑपरेशन की खास रणनीति तैयार की गई। ऑपरेशन 72 घंटे के लिए तैयार किया गया था, जिसमें इंडियन फोर्स को 2 से 4 किलोमीटर दुश्मन की सरहद के भीतर जाकर हमला करना था। इसके लिए सेना के तेज तर्रार कमांडों की चार रेजिमेंटों को चुना गया।
विज्ञापन
सभी जांबाजों को आम फोर्स के अपेक्षाकृत अत्याधुनिक हथियार दिए गए, ताकि ऑपरेशन पूरी तरह सफल हो और दुश्मन पूरी तरह नेस्तानाबूद हो। 72 घंटे के इस ऑपरेशन में जवानों का घंटों भूखा रहना भी ऑपरेशन का हिस्सा था, ताकि जवानों की अर्लटनेस बनी रहे।
विज्ञापन
Surgical Strike
- फोटो : File Photo
ऑपरेशन में फोर्स की डाइट और उनके खान-पान का तरीका क्या रहेगा, ये भी पहले से ही बेहद रोमांचक ढंग से तय कर दिया गया था। हर कमांडो के कंधों पर 25 किलो गोलाबारूद और 15 किलो अन्य सामान लदा था।
दुश्मन को कैसे घेरकर मारना है और कैसे और कहां से वापस लौटना है, यह भी तय था। इस दौरान यदि फोर्स दुश्मन के इलाके में घिरी, तो उनके लिए सोलिड कवर फायर भी तैयार था। इसी प्लान के बदौलत फौज के जांबाज भारतीय सेना के इतिहास में सबसे टफ सर्जिकल स्ट्राइक को बिना कैजुएलिटी के वापस लौटे थे।
दुश्मन को कैसे घेरकर मारना है और कैसे और कहां से वापस लौटना है, यह भी तय था। इस दौरान यदि फोर्स दुश्मन के इलाके में घिरी, तो उनके लिए सोलिड कवर फायर भी तैयार था। इसी प्लान के बदौलत फौज के जांबाज भारतीय सेना के इतिहास में सबसे टफ सर्जिकल स्ट्राइक को बिना कैजुएलिटी के वापस लौटे थे।