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Chandigarh News: दीपेंद्र हुड्डा को रोहतक लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार बनाने पर फंसा पेच
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अगर लोस चुनाव जीते तो राज्यसभा सदस्यता तत्काल हो जाएगी समाप्त
उपचुनाव होने पर भाजपा के खाते में चली जाएगी राज्यसभा की सीट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। लोकसभा चुनाव में राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा को रोहतक से प्रत्याशी बनाने को लेकर पेच फंस गया है। हुड्डा को प्रत्याशी बनने के बाद अगर वह यहां से लोकसभा चुनाव जीत जाते हैं तो उनकी राज्यसभा सदस्यता समाप्त हो जाएगी। खास बात ये है कि विधायकों की संख्या को देखते हुए उनके स्थान पर भाजपा का राज्यसभा सांसद बनना तय है। इसलिए कांग्रेस हाईकमान दीपेंद्र को मैदान में उतारने से पहले पूरा मंथन कर रही है। क्योंकि कांग्रेस राज्यसभा में अपने सदस्यों की संख्या को कम नहीं होने देना चाह रही।
दीपेंद्र हुड्डा का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2020 से अप्रैल 2026 तक है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के अधिवक्ता और चुनाव कानूनों के जानकार हेमंत कुमार ने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपी एक्ट), 1951 की धारा 69(2) के अनुसार यदि कोई राज्यसभा सदस्य लोकसभा का सदस्य निर्वाचित हो जाता है, तो राज्यसभा में उस व्यक्ति की सीट उसके लोकसभा सदस्य चुने जाने की तारीख से ही खाली हो जाएगी।
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विधानसभा में बहुमत का गणित
मौजूदा 14वीं हरियाणा विधानसभा का कार्यकाल 3 नवंबर 2024 तक है और जजपा के दस विधायकों के समर्थन वापस लेने के बावजूद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के पास सदन में बहुमत है। वर्तमान में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल और बिजली मंत्री रणजीत चौटाला के मौजूदा हरियाणा विधानसभा से त्यागपत्र देने के बाद (हालांकि रणजीत का इस्तीफा स्वीकार होना लंबित है) 88 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा सदन में भाजपा सरकार के पास 46 विधायकों का समर्थन है, जिसमें भाजपा के 40 विधायक, पांच निर्दलीय विधायक (रणजीत को मिलाकर पहले 6 थे) और हरियाणा लोकहित पार्टी (हलोपा) के एक विधायक गोपाल कांडा शामिल हैं। अगर सोनीपत जिले की राई विधानसभा सीट से भाजपा विधायक मोहन लाल बड़ोली सोनीपत लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बन जाते है, तो उनके विधायक पद से त्यागपत्र देने के बाद भाजपा के विधायक एक और घटकर 39 हो जाएंगे, परंतु उस परिस्थिति में सदन की कुल संख्या भी 88 से एक घटकर 87 हो जाएगी और तब सदन बहुमत का आंकड़ा भी घटकर 44 हो जाएगा।
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उपचुनाव होने पर भाजपा के खाते में चली जाएगी राज्यसभा की सीट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। लोकसभा चुनाव में राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा को रोहतक से प्रत्याशी बनाने को लेकर पेच फंस गया है। हुड्डा को प्रत्याशी बनने के बाद अगर वह यहां से लोकसभा चुनाव जीत जाते हैं तो उनकी राज्यसभा सदस्यता समाप्त हो जाएगी। खास बात ये है कि विधायकों की संख्या को देखते हुए उनके स्थान पर भाजपा का राज्यसभा सांसद बनना तय है। इसलिए कांग्रेस हाईकमान दीपेंद्र को मैदान में उतारने से पहले पूरा मंथन कर रही है। क्योंकि कांग्रेस राज्यसभा में अपने सदस्यों की संख्या को कम नहीं होने देना चाह रही।
दीपेंद्र हुड्डा का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2020 से अप्रैल 2026 तक है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के अधिवक्ता और चुनाव कानूनों के जानकार हेमंत कुमार ने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपी एक्ट), 1951 की धारा 69(2) के अनुसार यदि कोई राज्यसभा सदस्य लोकसभा का सदस्य निर्वाचित हो जाता है, तो राज्यसभा में उस व्यक्ति की सीट उसके लोकसभा सदस्य चुने जाने की तारीख से ही खाली हो जाएगी।
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विधानसभा में बहुमत का गणित
मौजूदा 14वीं हरियाणा विधानसभा का कार्यकाल 3 नवंबर 2024 तक है और जजपा के दस विधायकों के समर्थन वापस लेने के बावजूद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के पास सदन में बहुमत है। वर्तमान में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल और बिजली मंत्री रणजीत चौटाला के मौजूदा हरियाणा विधानसभा से त्यागपत्र देने के बाद (हालांकि रणजीत का इस्तीफा स्वीकार होना लंबित है) 88 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा सदन में भाजपा सरकार के पास 46 विधायकों का समर्थन है, जिसमें भाजपा के 40 विधायक, पांच निर्दलीय विधायक (रणजीत को मिलाकर पहले 6 थे) और हरियाणा लोकहित पार्टी (हलोपा) के एक विधायक गोपाल कांडा शामिल हैं। अगर सोनीपत जिले की राई विधानसभा सीट से भाजपा विधायक मोहन लाल बड़ोली सोनीपत लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बन जाते है, तो उनके विधायक पद से त्यागपत्र देने के बाद भाजपा के विधायक एक और घटकर 39 हो जाएंगे, परंतु उस परिस्थिति में सदन की कुल संख्या भी 88 से एक घटकर 87 हो जाएगी और तब सदन बहुमत का आंकड़ा भी घटकर 44 हो जाएगा।
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