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ट्राइडेंट-पीपीसीबी विवाद: कंपनी बोली-राजनीतिक प्रतिशोध, PPCB ने बताया नियमित निरीक्षण; HC का फैसला सुरक्षित
Tue, 05 May 2026 08:31 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Tue, 05 May 2026 08:31 AM IST
सार
ट्राइडेंट ने मांग की कि केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम से निरीक्षण कराया जाए और नमूनों की जांच पंजाब से बाहर किसी स्वतंत्र प्रयोगशाला में कराई जाए। साथ ही बिना सुनवाई किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की भी अपील की गई।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्राइडेंट लिमिटेड और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीच विवाद पर दायर याचिका में सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। राज्यसभा सांसद राजिंदर गुप्ता की कंपनी ट्राइडेंट ने बोर्ड की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।
कंपनी की ओर से कहा गया कि 30 अप्रैल की शाम करीब 7:30 बजे 30 सदस्यीय टीम का निरीक्षण सामान्य जांच नहीं बल्कि दबाव बनाने की कार्रवाई थी। ट्राइडेंट ने अदालत में तर्क दिया कि 7 अप्रैल और 13 अप्रैल तक कंपनी को आवश्यक अनुमति मिली थी और हालिया निरीक्षणों में अनुपालन संतोषजनक पाया गया था। ऐसे में अचानक कार्रवाई पर सवाल उठते हैं। कंपनी का कहना है कि संस्थापक की राजनीतिक निष्ठा में बदलाव के बाद ही यह कदम उठाया गया जिससे कार्रवाई प्रतिशोधपूर्ण प्रतीत होती है।
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कंपनी की ओर से कहा गया कि 30 अप्रैल की शाम करीब 7:30 बजे 30 सदस्यीय टीम का निरीक्षण सामान्य जांच नहीं बल्कि दबाव बनाने की कार्रवाई थी। ट्राइडेंट ने अदालत में तर्क दिया कि 7 अप्रैल और 13 अप्रैल तक कंपनी को आवश्यक अनुमति मिली थी और हालिया निरीक्षणों में अनुपालन संतोषजनक पाया गया था। ऐसे में अचानक कार्रवाई पर सवाल उठते हैं। कंपनी का कहना है कि संस्थापक की राजनीतिक निष्ठा में बदलाव के बाद ही यह कदम उठाया गया जिससे कार्रवाई प्रतिशोधपूर्ण प्रतीत होती है।
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ट्राइडेंट की मांग: स्वतंत्र प्रयोगशाला में कराई जाए जांच
ट्राइडेंट ने मांग की कि केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम से निरीक्षण कराया जाए और नमूनों की जांच पंजाब से बाहर किसी स्वतंत्र प्रयोगशाला में कराई जाए। साथ ही बिना सुनवाई किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की भी अपील की गई। अदालत ने कहा कि समय-क्रम से आशंका बन सकती है लेकिन राहत कानून सम्मत प्रक्रिया के तहत ही दी जाएगी।
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