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Chandigarh News: ट्राइसिटी के रमित ने 45वीं, चेरिल ने 76वीं और केशव ने 147वीं रैंक हासिल की

Tue, 03 Jun 2025 02:15 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 03 Jun 2025 02:15 AM IST
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Tricity's Ramit got 45th rank, Cheryl got 76th rank and Keshav got 147th rank
चंडीगढ़। आईआईटी कानपुर की ओर से सोमवार को घोषित जेईई एडवांस 2025 के नतीजों में चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है। चंडीगढ़ में रहकर तैयारी कर रहे मूलरूप रूप से करनाल के रमित गोयल ने देशभर में 45वीं रैंक हासिल की है, जबकि पंचकूला के सेक्टर-8 की चेरिल सिंगला ने 76वां रैंक प्राप्त किया है। वहीं, मोहाली के केशव बांसल भी 147वें रैंक के साथ सफल रहे हैं। इन तीनों छात्रों ने अपनी सफलता का श्रेय योजनाबद्ध तरीके से प्रतिदिन 8-10 घंटे की पढ़ाई को दिया है।
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बहन से प्रेरित होकर हासिल की सफलता
मूलरूप से करनाल के लाडवा के रहने वाले रमित गोयल ने जेईई एडवांस्ड में 360 में से 298 अंक हासिल कर 45वीं रैंक हासिल की है। पिछले तीन साल से चंडीगढ़ में रहकर तैयारी कर रहे रमित के पिता अरविंद कुमार गिफ्ट शॉप चलाते हैं। मां संध्या रानी गृहिणी है। उन्होंने हर पल रमित का उत्साह बढ़ाया। यूएसए में कंप्यूटर इंजीनियर अपनी बहन रिया गोयल से प्रेरित होकर रमित ने यह क्षेत्र चुना। इससे पहले जेईई मेंस में उन्होंने 300 में से 285 अंक हासिल कर 168वां रैंक प्राप्त किया था। 12वीं में उन्होंने 96.8 प्रतिशत अंक हासिल किए थे, जिसमें गणित में 100 अंक शामिल थे। रमित का वैश्विक, अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तरों पर ओलंपियाड में एक असाधारण ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। उन्होंने इस परीक्षा के लिए रोजाना 8-10 घंटे पढ़ाई की।
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आईआईटी बॉम्बे से बीटेक करना चाहती हैं चेरिल
पंचकूला के सेक्टर-8 की रहने वाली चेरिल सिंगला ने जेईई एडवांस्ड में 360 में से 286 अंक हासिल कर देशभर में 76वीं रैंक हासिल की है। इससे पहले जेईई मेंस में उन्होंने 300 में से 285 अंक प्राप्त कर 285वीं रैंक हासिल की थी। चेरिल ने मनीमाजरा के डीसी मोंटेसरी स्मार्ट स्कूल से पढ़ाई कर 12वीं में 97.8 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। आईआईटी दिल्ली से कंप्यूटर और मैथमेटिक्स में बीटेक कर रही बहन विहा सिंगला से प्रेरित होकर चेरिल ने इस फील्ड में जाने का निर्णय लिया। चेरिल आईआईटी बॉम्बे से बीटेक करना चाहती हैं। उन्हें पेंटिंग, चेस खेलना और किताबें पढ़ना पसंद है। इस परीक्षा में सफल होने के लिए उन्होंने रोजाना 8-10 घंटे फोकस होकर पढ़ाई की। उनके पिता कर्नल चेतन सिंगला और मां महक सिंगला ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताई। उनके दादा राम कुमार गुप्ता ने कहा कि यह गर्व का क्षण है। उन्होंने परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को खुद पर विश्वास रखने, स्टडी स्ट्रेटजी बनाने और मॉक टेस्ट के साथ रोजाना अभ्यास करने की सलाह दी।
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आईआईटी मद्रास या कानपुर से पढ़ाई करना चाहते हैं केशव

मोहाली के केशव बांसल ने जेईई एडवांस्ड में 147वीं रैंक हासिल की है। इससे पहले जेईई मेंस 2025 में उन्होंने 749वीं रैंक हासिल की थी। केशव के पिता शिलाप मित्तल एक व्यवसायी हैं। उनकी मां अंजू बाला एक गृहिणी हैं। इन दोनों ने केशव की सफलता की यात्रा में हर संभव सहयोग दिया। केशव ने बताया कि उन्होंने हमेशा सीखने के प्रति गहरी लगन रखी और कठिन विषयों के लिए 8-9 घंटे की पढ़ाई की। इसके अलावा, शिक्षकों के विशेष सत्रों से उन्हें कई कठिन प्रश्नों को समझने में मदद मिली। भविष्य में वह आईआईटी मद्रास या कानपुर से कंप्यूटर साइंस में पढ़ाई करना चाहते हैं।
दीपिंदर सिंह ढिल्लों : 180वां रैंक


नौ घंटे की पढ़ाई से सपना किया साकार
जेईई एडवांस्ड में 180वां रैंक हासिल करने वाले दीपिंदर सिंह ढिल्लों के पिता गुरमिंदर सिंह शिक्षक और मां नरिंदर कौर पंजाबी लेक्चरर हैं। दोनों ने शिक्षकों के रूप में दीपिंदर का मार्गदर्शन किया। 2025 में जेईई मेंस में उन्होंने 234वां रैंक हासिल किया था। उन्होंने कहा कि रोजाना 9 घंटे पढ़ाई की। उन्होंने आईओक्यूएमओ, एनएसईपी, एनएसईसी और एनएसईए परीक्षाएं भी पास की हैं। उन्होंने निरंतरता और जुनून के साथ कड़ी मेहनत की। आखिरकार उनका सपना सफल हो गया। वह आईआईटी और कंप्यूटर साइंस कोडिंग की पढ़ाई करना चाहते हैं।


हितेन मित्तल ने 185वां रैंक
परिवार और शिक्षकों के सहयोग से हासिल की कामयाबी

हितेन मित्तल जेईई एडवांस्ड में 185वां रैंक हासिल कर बेहद खुश हैं। उनके पिता अजय मित्तल व्यवसायी और मां गृहिणी हैं। उन्होंने जेईई मेंस में 116वां रैंक हासिल किया था। उन्होंने कहा कि चुनौतियों को सुलझाना उनके लिए मुमकिन नहीं था, लेकिन परिवार और शिक्षकों के सहयोग ने उन्हें निखारा। यह सहयोग जेईई एडवांस्ड जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
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