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पंजाब चुनावः फिर छाएंगे बादल या बढ़ेगा भगवंत का मान, बताएगा मतदान
बीबीसी हिंदी
Updated Fri, 03 Feb 2017 01:25 PM IST
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पंजाब विधानसभा चुनाव 2017
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पंजाब में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला है। ऐसे में इस बार फिर से बादल छाएंगे या भगवंत का मान बढ़ेगा, इसका फैसला कल होने वाले मतदान में होगा। 4 फरवरी को पंजाब में मतदान हो रहे हैं और उसे आजादी दिवस के तौर पर मनाया जाएगा। अब अगले 5 साल तक इस तारीख को सरकारी छुट्टी होगी और पंजाब के लोगों को अकाली दल, कांग्रेस से छुटकारा मिलेगा।
पंजाब के जलालाबाद में अपनी चुनावी रैलियों में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार भगवंत मान लोगों को यही सपना दिखा रहे हैं। पंजाब के चुनाव में अगर कोई हॉट सीट है तो उसका दर्जा जलालाबाद और लंबी सीट को मिलेगा। जलालाबाद सीट से मुकाबला दो मौजूदा सांसदों और एक उपमुख्यमंत्री के बीच है।
पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के सामने आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान हैं। दूसरी ओर कांग्रेस ने युवा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते और सांसद रवनीत सिंह बिट्टू हैं। सुखबीर 2009 के उपचुनाव में जलालाबाद सीट जीतने के बाद से ही वहाँ से विधायक हैं तो बाकी दोनों के लिए मैदान नया है।
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पंजाब के जलालाबाद में अपनी चुनावी रैलियों में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार भगवंत मान लोगों को यही सपना दिखा रहे हैं। पंजाब के चुनाव में अगर कोई हॉट सीट है तो उसका दर्जा जलालाबाद और लंबी सीट को मिलेगा। जलालाबाद सीट से मुकाबला दो मौजूदा सांसदों और एक उपमुख्यमंत्री के बीच है।
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पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के सामने आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान हैं। दूसरी ओर कांग्रेस ने युवा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते और सांसद रवनीत सिंह बिट्टू हैं। सुखबीर 2009 के उपचुनाव में जलालाबाद सीट जीतने के बाद से ही वहाँ से विधायक हैं तो बाकी दोनों के लिए मैदान नया है।
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'जनरल' और 'कैप्टन' की टक्कर
पंजाब विस चुनाव
वरिष्ठ पत्रकार विपिन पब्बी कहते हैं कि जलालाबाद से सुखबीर बादल वर्तमान विधायक हैं। भगवंत मान और रवनीत बिट्टू उन्हें चुनौती दे रहे हैं। दोनों के मैदान में होने की वजह से अकाली दल के खिलाफ़ वाला वोट बंट सकता है। इसके अलावा अकाली दल के स्थानीय सांसद रहे शेर सिंह घुबाया ने भी अकाली दल का साथ छोड़ दिया है और कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं।
एक-एक सीट के लिए है लड़ाई
पंजाब में त्रिकोणीय मुकाबला है और कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के लिए एक-एक सीट कीमती रहेगी, हालांकि सीट हारने की सूरत में भगवंत मान और रविंदर बिट्टू के पास सांसद बने रहने का फायदा रहेगा। वहीं सुखबीर के लिए ये सीट प्रतिष्ठा का सवाल है। पंजाब में छोटे बेटे को लाड़ और दुलार से काका जी कहा जाता है। अपनी सीट और पंजाब चुनाव जीतकर सुखबीर के पास दुलारे ' काका जी' की छवि से आगे बढ़कर ये साबित करने का मौका रहेगा कि अब असली बॉस वही हैं।
एक-एक सीट के लिए है लड़ाई
पंजाब में त्रिकोणीय मुकाबला है और कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के लिए एक-एक सीट कीमती रहेगी, हालांकि सीट हारने की सूरत में भगवंत मान और रविंदर बिट्टू के पास सांसद बने रहने का फायदा रहेगा। वहीं सुखबीर के लिए ये सीट प्रतिष्ठा का सवाल है। पंजाब में छोटे बेटे को लाड़ और दुलार से काका जी कहा जाता है। अपनी सीट और पंजाब चुनाव जीतकर सुखबीर के पास दुलारे ' काका जी' की छवि से आगे बढ़कर ये साबित करने का मौका रहेगा कि अब असली बॉस वही हैं।
प्रकाश सिंह बादल का मुकाबला अमरिंदर सिंह से
पंजाब विधानसभा चुनाव
एक तरह से उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल का मुकाबला तीन सांसदों से है। इस बीच चुनाव अभियान खत्म होने को है और सभी उम्मीदवारों ने रैलियों और सोशल मीडिया के ज़रिए पूरे ज़ोर से अभियान चलाया हुआ है। जहां कांग्रेस के युवा नेता रवनीत सिंह दावा कर रहे हैं कि मुकाबला 'मुनाफा कमाने वाले बिजनेस परिवार और पंजाब के लिए कुर्बानी देने वाले बेअंत सिंह के पोते के बीच है। वहीं रवनीत पर चुटकी लेते हुए सुखबीर पत्रकारों से कहते हैं कि रवनीत तो इलाके में नया है, प्रचार के दौरान यहां की गलियां ढूंढनी पड़े तो मैं उन्हें घुमा सकता हूं।
मुख्यमंत्री नहीं, दुखमंत्री बनना चाहता हूं
ये दोनों पार्टियां अंदर ही अंदर मिली हुई हैं। मैंने अमरिंदर सिंह को जलालाबाद से लड़ने के लिए चुनौती दी थी, लेकिन वो 'भतीजे सुखबीर' के खिलाफ नहीं लड़ेगें। यह भगवंत मान अपने अंदाज़ में कहते हैं। सुखबीर बादल की बात करें तो वरिष्ठ पत्रकार जगतार सिंह कहते हैं कि पंजाब में 2007 के चुनाव में अकाली दल को मिली जीत से उनका कद ऊंचा हुआ। 2012 में अकाली दल को दोबारा मिली जीत ने उन्हें एक तरह से पार्टी सुप्रीमो बना दिया। उन्होंने अपने इलाके में विकास भी कराया, लेकिन बहुत से इलाके अब भी वंचित हैं। सत्ता-विरोधी लहर का नुकसान उन्हें झेलना पड़ सकता है। मुकाबला तगड़ा है।
बेअंत सिंह के वारिस हैं रवनीत
वहीं लुधियाना से मौजूदा सांसद रवनीत सिंह बिट्टू के नाम की घोषणा पंजाब चुनाव से महज 15-17 दिन पहले हुई और प्रचार के लिए उनके पास सीमित मौका रहा है। साथ ही वे इलाके में नए हैं, हालांकि 2014 के लोक सभा चुनाव में भी लुधियाना सीट उनके लिए नई थी पर वे वहाँ से जीते थे। इससे ठीक उलट आम आदमी पार्टी ने पिछले साल नवंबर में ही अपनी मंशा जाहिर कर दी थी कि पंजाब में उनकी पार्टी का लोकप्रिय चेहरा भगवंत मान सुखबीर बादल को चुनौती देगा। 90 के दशक में उनका टीवी पर एक मशहूर कॉमेडी किरदार था जुगनू जिसके डायलॉग अब भी मशहूर हैं। मसलन कोर्ट में वो कहते हैं- मैं जो भी कहूंगा सच कहूंगा। झूठ बोलने के लिए दस हजार रुपए वकील को जो दिए हैं। अपने इन्हीं जुमलों को नए अंदाज़ में चुनावी रैलियों में लेकर जाते हैं।
मुख्यमंत्री नहीं, दुखमंत्री बनना चाहता हूं
ये दोनों पार्टियां अंदर ही अंदर मिली हुई हैं। मैंने अमरिंदर सिंह को जलालाबाद से लड़ने के लिए चुनौती दी थी, लेकिन वो 'भतीजे सुखबीर' के खिलाफ नहीं लड़ेगें। यह भगवंत मान अपने अंदाज़ में कहते हैं। सुखबीर बादल की बात करें तो वरिष्ठ पत्रकार जगतार सिंह कहते हैं कि पंजाब में 2007 के चुनाव में अकाली दल को मिली जीत से उनका कद ऊंचा हुआ। 2012 में अकाली दल को दोबारा मिली जीत ने उन्हें एक तरह से पार्टी सुप्रीमो बना दिया। उन्होंने अपने इलाके में विकास भी कराया, लेकिन बहुत से इलाके अब भी वंचित हैं। सत्ता-विरोधी लहर का नुकसान उन्हें झेलना पड़ सकता है। मुकाबला तगड़ा है।
बेअंत सिंह के वारिस हैं रवनीत
वहीं लुधियाना से मौजूदा सांसद रवनीत सिंह बिट्टू के नाम की घोषणा पंजाब चुनाव से महज 15-17 दिन पहले हुई और प्रचार के लिए उनके पास सीमित मौका रहा है। साथ ही वे इलाके में नए हैं, हालांकि 2014 के लोक सभा चुनाव में भी लुधियाना सीट उनके लिए नई थी पर वे वहाँ से जीते थे। इससे ठीक उलट आम आदमी पार्टी ने पिछले साल नवंबर में ही अपनी मंशा जाहिर कर दी थी कि पंजाब में उनकी पार्टी का लोकप्रिय चेहरा भगवंत मान सुखबीर बादल को चुनौती देगा। 90 के दशक में उनका टीवी पर एक मशहूर कॉमेडी किरदार था जुगनू जिसके डायलॉग अब भी मशहूर हैं। मसलन कोर्ट में वो कहते हैं- मैं जो भी कहूंगा सच कहूंगा। झूठ बोलने के लिए दस हजार रुपए वकील को जो दिए हैं। अपने इन्हीं जुमलों को नए अंदाज़ में चुनावी रैलियों में लेकर जाते हैं।