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Chandigarh News: टाइप 1 डायबिटीज के नए इंसुलिन का ट्रायल जारी, जल्द मिलेगी अच्छी खबर
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चंडीगढ़। चार बार दिया जाने वाला इंसुलिन अब बहुत जल्द हफ्ते में एक बार लेने से काम हो जाएगा। पीजीआई के इंडोक्राइनोलॉजी विभाग में इसका ट्रायल चल रहा है। उम्मीद है जल्द ही अच्छी खबर मिलेगी। इससे टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों की राह आसान होगी। यह इसके मरीजों और उसके परिजनों की मुश्किलें दूर कर देगा। ये बातें पीजीआई इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. संजय भडाडा ने शुक्रवार को नर्सिंग इंस्टीट्यूट के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में कहीं।
प्रो. संजय भडाडा ने बताया कि इंसुलिन के माध्यम से दिया जाने वाला हार्माेन एक प्रोटीन होता है, जिसे मुंह से नहीं लिया जा सकता। इसे इंजेक्शन के रूप में 24 घंटे में चार बार दिया जाता है। इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि एक छोटे बच्चे को 4 बार इंजेक्शन लगाने में कितनी परेशानी होती होगी। मरीजों की परेशानी को देखकर लगातार शोध किया जा रहा है। अब इंसुलिन पेन, छोटी निडिल, इंसुलिन पंप का विकास हुआ है। इसी क्रम में 7 दिनों में एक बार लगाई जाने वाली इंसुलिन पर काम चल रहा है। प्रो. संजय ने बताया कि आइलेडसेल ट्रांसप्लांटेशन और साइमेंटेनियस पेंक्रियाज किडनी ट्रांसप्लांटेशन टाइप 1 डायबिटीज के बच्चों और अनियंत्रित टाइप 2 डायबिटीज वाले मरीजों के लिए एक बेहतर उपाय है। पीजीआई में टाइप 1 डायबिटीज प्रबंधन में इन तकनीकों का उपयोग कर बेहतरीन परिणाम दिए जा रहे हैं। ये दोनों तकनीक मरीजों के लिए वरदान है। इससे मरीजों को न तो इंसुलिन लगाने की जरूरत पड़ती है न ही उसका डायबिटीज का स्तर गड़बड़ होता है। डायलिसिस वाले मरीजों को डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ती। प्रो. संजय ने कहा कि पीजीआई में तकनीक का और विस्तार किया जाए तो ऐसे मरीजों का इलाज और आसान होगा।
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प्रो. संजय भडाडा ने बताया कि इंसुलिन के माध्यम से दिया जाने वाला हार्माेन एक प्रोटीन होता है, जिसे मुंह से नहीं लिया जा सकता। इसे इंजेक्शन के रूप में 24 घंटे में चार बार दिया जाता है। इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि एक छोटे बच्चे को 4 बार इंजेक्शन लगाने में कितनी परेशानी होती होगी। मरीजों की परेशानी को देखकर लगातार शोध किया जा रहा है। अब इंसुलिन पेन, छोटी निडिल, इंसुलिन पंप का विकास हुआ है। इसी क्रम में 7 दिनों में एक बार लगाई जाने वाली इंसुलिन पर काम चल रहा है। प्रो. संजय ने बताया कि आइलेडसेल ट्रांसप्लांटेशन और साइमेंटेनियस पेंक्रियाज किडनी ट्रांसप्लांटेशन टाइप 1 डायबिटीज के बच्चों और अनियंत्रित टाइप 2 डायबिटीज वाले मरीजों के लिए एक बेहतर उपाय है। पीजीआई में टाइप 1 डायबिटीज प्रबंधन में इन तकनीकों का उपयोग कर बेहतरीन परिणाम दिए जा रहे हैं। ये दोनों तकनीक मरीजों के लिए वरदान है। इससे मरीजों को न तो इंसुलिन लगाने की जरूरत पड़ती है न ही उसका डायबिटीज का स्तर गड़बड़ होता है। डायलिसिस वाले मरीजों को डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ती। प्रो. संजय ने कहा कि पीजीआई में तकनीक का और विस्तार किया जाए तो ऐसे मरीजों का इलाज और आसान होगा।
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