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महिलाओं की ये 5 बीमारियां, अनोखा ट्रीटमेंट वो भी बिना दवा के
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 08 Nov 2013 04:13 PM IST
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महिलाओं की पांच तरह की ऐसी बीमारियों जिन्हें वे छुपाती हैं, पीजीआई के विशेषज्ञ बिना दवा और ऑपरेशन दूर करेंगे। पीजीआई के गायनी और कम्युनिटी मेडिसन डिपार्टमेंट ने मिल कर यह अनोखा ट्रीटमेंट शुरू किया है।
देश में यह अपनी तरह का पहला सेंटर है। यहां मरीजों को खान-पान में बदलाव और कुछ एक्सरसाइज सिखाए जाते हैं, जिनसे वे पूरी तरह से स्वस्थ हो जाती हैं।
भारत सरकार के डिपार्टमेंट आफ बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रोजेक्ट पर पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसिन व गायनी विभाग ने मल्टी बिहेवियर थैरेपी सेंटर शुरू किया है।
पहले यहां सिर्फ प्रेग्नेट महिलाओं का इलाज किया जा रहा था, लेकिन अब पांच और बीमारियों को शामिल कर लिया गया है। यह प्रोजेक्ट कम्युनिटी मेडिसिन के हेड अमरजीत सिंह व गायनी विभाग की हेड डा. एलके धालीवाल की निगरानी में चल रहा है।
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इसमें यूरोलाजी के हेड डा. एके मंडल, डा. संतोष कुमारी, डा. वनीता जैन, डा. अदिति चौधरी, डा. रश्मि कश्यप, डा. पूर्णिमा, अविनाश राणा, डा. पूर्णिमा का अहम योगदान है।
इन बीमारियों का है इलाज
1. बच्चेदानी बाहर आना
2. पेशाब लीक होना
3. माहवारी में दर्द होना
4. बच्चा न होना
5. रजोवृत्ति बंद होना
कमरा नंबर 2060 याद रखे
डा. अमरजीत के मुताबिक इन बीमारियों से पीड़ित महिलाओं व युवतियों को सबसे पहले पीजीआई के गायनी विभाग के विशेषज्ञों को दिखाना होगा। वहां से रेफर करने के बाद यहां पर विशेषज्ञ उनका इलाज करेंगे। यदि डाक्टर रेफर नहीं करते हैं और फिर भी वे यहां पर आना चाहते हैं तो वे डाक्टर से सलाह लेने के बाद सीधे आ सकते हैं। यह थैरेपी सेंटर न्यू ओपीडी में गायनी विभाग के रूम नंबर 2060 में स्थित है। यह सेंटर ओपीडी के तय समयानुसार ही चलता रहता है।
इन महिलाओं को है फायदा
पीजीआई के गायनी विभाग की रोजाना 300-400 ओपीडी है। ऐसे में एक-एक महिला को उसकी बीमारियों को बारे में अच्छी तरह से समझा पाना बहुत मुश्किल होता है। जल्दबाजी के चक्कर में कई महिलाएं अपना इलाज समझ ही नहीं पाती हैं। ऐसे में उन्हें बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। सेंटर में इन्हीं बातों का ध्यान रखा गया है। महिला को ज्यादा समय दिया जाता है। उन्हें सरल भाषा में इलाज सिखाया जाता है। यदि विवाहित महिला है और उनके पति भी साथ आना चाहते हैं तो उन्हें भी इजाजत दी जाती है, जबकि गायनी की ओपीडी में ऐसा नहीं होता है।
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देश में यह अपनी तरह का पहला सेंटर है। यहां मरीजों को खान-पान में बदलाव और कुछ एक्सरसाइज सिखाए जाते हैं, जिनसे वे पूरी तरह से स्वस्थ हो जाती हैं।
भारत सरकार के डिपार्टमेंट आफ बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रोजेक्ट पर पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसिन व गायनी विभाग ने मल्टी बिहेवियर थैरेपी सेंटर शुरू किया है।
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पहले यहां सिर्फ प्रेग्नेट महिलाओं का इलाज किया जा रहा था, लेकिन अब पांच और बीमारियों को शामिल कर लिया गया है। यह प्रोजेक्ट कम्युनिटी मेडिसिन के हेड अमरजीत सिंह व गायनी विभाग की हेड डा. एलके धालीवाल की निगरानी में चल रहा है।
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इसमें यूरोलाजी के हेड डा. एके मंडल, डा. संतोष कुमारी, डा. वनीता जैन, डा. अदिति चौधरी, डा. रश्मि कश्यप, डा. पूर्णिमा, अविनाश राणा, डा. पूर्णिमा का अहम योगदान है।
इन बीमारियों का है इलाज
1. बच्चेदानी बाहर आना
2. पेशाब लीक होना
3. माहवारी में दर्द होना
4. बच्चा न होना
5. रजोवृत्ति बंद होना
कमरा नंबर 2060 याद रखे
डा. अमरजीत के मुताबिक इन बीमारियों से पीड़ित महिलाओं व युवतियों को सबसे पहले पीजीआई के गायनी विभाग के विशेषज्ञों को दिखाना होगा। वहां से रेफर करने के बाद यहां पर विशेषज्ञ उनका इलाज करेंगे। यदि डाक्टर रेफर नहीं करते हैं और फिर भी वे यहां पर आना चाहते हैं तो वे डाक्टर से सलाह लेने के बाद सीधे आ सकते हैं। यह थैरेपी सेंटर न्यू ओपीडी में गायनी विभाग के रूम नंबर 2060 में स्थित है। यह सेंटर ओपीडी के तय समयानुसार ही चलता रहता है।
इन महिलाओं को है फायदा
पीजीआई के गायनी विभाग की रोजाना 300-400 ओपीडी है। ऐसे में एक-एक महिला को उसकी बीमारियों को बारे में अच्छी तरह से समझा पाना बहुत मुश्किल होता है। जल्दबाजी के चक्कर में कई महिलाएं अपना इलाज समझ ही नहीं पाती हैं। ऐसे में उन्हें बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। सेंटर में इन्हीं बातों का ध्यान रखा गया है। महिला को ज्यादा समय दिया जाता है। उन्हें सरल भाषा में इलाज सिखाया जाता है। यदि विवाहित महिला है और उनके पति भी साथ आना चाहते हैं तो उन्हें भी इजाजत दी जाती है, जबकि गायनी की ओपीडी में ऐसा नहीं होता है।