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डायबिटीज का समय पर इलाज बचा सकता है पैर
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 16 Nov 2013 11:32 AM IST
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वर्ल्ड डायबिटीज डे पर फोर्टिस हॉस्पिटल के वैस्कुलर व एंडोवैस्कुलर सर्जरी के डायरेक्टर डॉ. रावुल जिंदल की पुस्तक ‘डायबिटिक फुट’ को प्रिंसिपल सेक्रेटरी हेल्थ शिव रमन गौर, रॉक गार्डन के निर्माता नेकचंद ने रिलीज किया।
किताब में डायबिटिक फुट के लक्षण, दिक्कतें, इलाज और सावधानी आदि का वर्णन किया गया है। डॉ. जिंदल ने बताया कि सही समय पर डायबिटिक फुट के इलाज से कई लोगों के पैर कटने से बचे हैं।
डायबिटीज का असर सिर्फ दिल ही नहीं, बल्कि आंखों, किडनी और नसों पर भी पड़ता है। इससे पैर की धमनियां ब्लॉक हो जाती हैं।
सही जानकारी और समय से इलाज से 90 फीसदी से ज्यादा केसों में पैर काटने से बचाया जा सकता है। एड़ी काली पड़ रही है, तो नजरअंदाज न करें। यह दिल की बीमारी की शुरुआत भी हो सकती है।
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पेरिफेरल आर्ट्रियल डिजीज (पीएडी) ज्यादा उम्र, स्मोकिंग, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाईपरटेंशन की वजह से होती है।
डॉ. जिंदल कहते हैं कि पीएडी से पीड़ित लोगों का दूसरों के मुकाबले दिल के दौरे से मौत की आशंका दो से छह गुना ज्यादा होती है। सही समय पर ट्रीटमेंट न हो तो पैर काटना पड़ता है।
इसमें मरीज की मौत की आशंका ज्यादा रहती है। ये मरीज दिल की बीमारियों का भी शिकार होते हैं। जमर्नी में डायबिटीज पेशेंट के पैर काटने के 7.5 फीसदी मामले और भारत में यह 18.7 फीसदी मामले आते है।
जर्मनी में इसका कारण पीएडी की वजह से खून का बहाव कम होना है तो भारत में डॉक्टर के पास देर से जाना है। इस अवसर पर हरमिंदर सिंह, आरएस अरोड़ा, राजदीप कौर, एलएचएस ढिल्लों, संदीप बशी, मोधा सिंह, केवल कृष्ण और जेबी सिंह भी मौजूद रहे।
ये हैं शुरुआती लक्षण
इसके शुरुआती लक्षण हैं पैर की नब्ज न मिलना। डॉक्टरों को हर तीन से छह महीने में पैर की नब्ज चेक करनी चाहिए।
ब्लड प्रेशर कम कर, ब्लड और ग्लूकोज का स्तर कम रखकर, रोज एक्सरसाइज कर इस बीमारी से बचा जा सकता है। लाइफ स्टाइल ऐसा हो कि शरीर के हर हिस्से में खून का सही बहाव हो सके।
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किताब में डायबिटिक फुट के लक्षण, दिक्कतें, इलाज और सावधानी आदि का वर्णन किया गया है। डॉ. जिंदल ने बताया कि सही समय पर डायबिटिक फुट के इलाज से कई लोगों के पैर कटने से बचे हैं।
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डायबिटीज का असर सिर्फ दिल ही नहीं, बल्कि आंखों, किडनी और नसों पर भी पड़ता है। इससे पैर की धमनियां ब्लॉक हो जाती हैं।
सही जानकारी और समय से इलाज से 90 फीसदी से ज्यादा केसों में पैर काटने से बचाया जा सकता है। एड़ी काली पड़ रही है, तो नजरअंदाज न करें। यह दिल की बीमारी की शुरुआत भी हो सकती है।
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पेरिफेरल आर्ट्रियल डिजीज (पीएडी) ज्यादा उम्र, स्मोकिंग, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाईपरटेंशन की वजह से होती है।
डॉ. जिंदल कहते हैं कि पीएडी से पीड़ित लोगों का दूसरों के मुकाबले दिल के दौरे से मौत की आशंका दो से छह गुना ज्यादा होती है। सही समय पर ट्रीटमेंट न हो तो पैर काटना पड़ता है।
इसमें मरीज की मौत की आशंका ज्यादा रहती है। ये मरीज दिल की बीमारियों का भी शिकार होते हैं। जमर्नी में डायबिटीज पेशेंट के पैर काटने के 7.5 फीसदी मामले और भारत में यह 18.7 फीसदी मामले आते है।
जर्मनी में इसका कारण पीएडी की वजह से खून का बहाव कम होना है तो भारत में डॉक्टर के पास देर से जाना है। इस अवसर पर हरमिंदर सिंह, आरएस अरोड़ा, राजदीप कौर, एलएचएस ढिल्लों, संदीप बशी, मोधा सिंह, केवल कृष्ण और जेबी सिंह भी मौजूद रहे।
ये हैं शुरुआती लक्षण
इसके शुरुआती लक्षण हैं पैर की नब्ज न मिलना। डॉक्टरों को हर तीन से छह महीने में पैर की नब्ज चेक करनी चाहिए।
ब्लड प्रेशर कम कर, ब्लड और ग्लूकोज का स्तर कम रखकर, रोज एक्सरसाइज कर इस बीमारी से बचा जा सकता है। लाइफ स्टाइल ऐसा हो कि शरीर के हर हिस्से में खून का सही बहाव हो सके।