अमर उजाला पड़ताल: विशेषज्ञ डॉक्टरों ने छोड़ा अस्पताल तो इलाज पर ही लगा ताला, जीएमएसएच-16 में मरीज हो रहे परेशान
चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में पिछले 27 वर्षों से एक भी पद पर नियमित डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है। इसे विभाग ने भी स्वीकार किया है। मौजूदा समय में डॉक्टरों के 91 पद खाली हैं।
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चंडीगढ़ के जीएमएसएच-16 की ओपीडी में आए एक मरीज को डॉक्टर ने इंडोस्कोपी कराने को कहा। वह जांच के लिए संबंधित यूनिट में गया लेकिन वहां जाने पर उसे पता चला कि इंडोस्कोपी करने वाले डॉक्टर दो साल पहले अस्पताल छोड़ गए हैं। तब से अस्पताल में इंडोस्कोपी बंद है। विशेषज्ञ के जाने के बाद विभाग ने नई तैनाती करना जरूरी नहीं समझा। मरीजों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि मरीज सुविधा होने के बावजूद बिना इलाज के लौट रहे हैं। अधिकारियों की अनदेखी के कारण मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
वहीं दूसरी तरफ जीएमसीएच-32 में न्यूरोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में मरीजों का इलाज बाधित है। इसका कारण जीएमसीएच-32 के इन दोनों विभाग में विशेषज्ञों का उपलब्ध न होना है। वहां तैनात न्यूरोलॉजी के एकमात्र डॉक्टर ने तीन साल पहले इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद से वह पद अब तक खाली है। वहीं गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में भी तैनात एकमात्र डॉक्टर ने कोरोना के दौरान इस्तीफा दे दिया। दोनों ही विभाग कोविड के दौरान डॉक्टर विहिन हो गए। इस कारण अब ओपीडी में आने वाले मरीजों को इलाज की जगह इस ओपीडी से उस ओपीडी का चक्कर लगवाया जा रहा है। इन दोनों अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण कई विभागों पर ताला लग चुका है। अस्पतालों में बंद हो चुके विभाग को खोलने की बजाय अब प्रशासन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों को हाइटेक बनाने की घोषणा कर रहा है।
बस नाम का मल्टीस्पेशिएलिटी अस्पताल
सेक्टर-16 स्थित मल्टीस्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में नाम के ठीक विपरीत स्थिति है। मल्टीस्पेशिएलिटी हॉस्पिटल का मतलब यह होता है वहां सभी गंभीर बीमारियों का इलाज उपलब्ध हो। इस अस्पताल के क्लिनिकल सर्जिकल विषयों के तहत सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स (जॉइंट रिप्लेसमेंट) न्यूरो सर्जरी, जनरल सर्जरी, सीटीवीएस सर्जरी, यूरोलॉजी ऑप्थल्मोलॉजी, अंग प्रत्यारोपण, चिकित्सा ऑन्कोलॉजी, कॉर्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण (बीएमटी), एसीएलएस एम्बुलेंस, बीएलएस एंबुलेंस फूड बेवरेज-डायटेटिक्स, किचन सहित कैफेटेरिया, फूड कोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड सेवाएं और पीएसए ऑक्सीजन प्लांट जैसी सभी प्रकार की सहायता सेवाओं से लैस होना चाहिए। मौजूदा समय में अस्पताल हड्डी रोग, बाल रोग, स्त्री रोग, दंत रोग, मेडिसिन, नेत्र रोग, त्वचा रोग के साथ इमरजेंसी, आईसीयू और ब्लड बैंक का संचालन किया जा रहा है।
27 साल से नहीं हुई नई तैनाती
चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में नियुक्तियों की स्थिति बेहद सोचनीय है। विभाग में पिछले 27 वर्षों से एक भी पद पर नियमित डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है। इसे विभाग ने भी स्वीकार किया है। मौजूदा समय में डॉक्टरों के 91 पद खाली हैं। इसमें 80 चिकित्सा अधिकारी, नौ दंत रोग के चिकित्सा अधिकारी और दो वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग में नियुक्तियों में इस कदर अनदेखी की जा रही है कि डॉक्टरों के कुल 232 पदों में से 141 पर ही तैनाती है और बाकी पद खाली पड़े हैं। नियुक्तियों में अनदेखी के कारण ही मरीजों को सरकारी अस्पतालों में उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
जनता लाचार, कैसे मिले इलाज
सरकारी अस्पतालों का हाल बदतर है। कहने को हम सिटी ब्यूटीफुल और स्मार्ट शहर में रहते हैं लेकिन हाल बेहाल है। अस्पताल में डॉक्टर और जांच की सुविधाएं न के बराबर हैं। -नरपत सिंह, बहलाना
पीजीआई पर मरीजों का दबाव कम करने के लिए प्रशासन को सबसे पहले सरकारी अस्पतालों को सुविधाओं से लैस करना होगा। डॉक्टर, दवा और जांच की कमी जैसी स्थिति होनी ही नहीं चाहिए। -संतोष कुमार मिश्रा, सेक्टर-45
विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पदों पर तैनाती की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही शहर के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों को अपग्रेड कर वहां टेली मेडिसिन, ई-संजीवनी और टेली कंसल्टेशन की सुविधा शुरू की जाएगी। इसके जरिए मरीज पीजीआई, जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 के विशेषज्ञ डॉक्टरों से अपने घर के पास स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर ही इलाज प्राप्त कर सकेंगे। -यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव