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Hindi News ›   Chandigarh ›   Treatment is Must if Baby Milk Teeth are Decaying 

अभिभावक ध्यान दें: बच्चे के दूध के दांत सड़ रहे हैं तो इलाज कराएं, टूटने का इंतजार न करें 

Sat, 06 Nov 2021 04:31 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ 
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़  Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 06 Nov 2021 04:31 PM IST
सार

बच्चों के दांत में सड़न होने के 18 से 24 महीने बाद दर्द शुरू होता है। जबकि इस दौरान उसके अन्य दांतों और मसूड़ों में सड़न फैलती रहती है। दूध के दांत 7 से 8 साल के बीच टूटते हैं। जबकि सड़न की शिकायत तीन से चार साल के बीच शुरू हो जाती है।

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Treatment is Must if Baby Milk Teeth are Decaying 
बच्चों के दांतों की जांच - फोटो : फाइल

विस्तार

अगर आपके बच्चे की उम्र पांच साल से कम है और उसके दांतों में सड़न है तो इसे नजरअंदाज करने की भूल न करें। यह कतई न सोचें कि दूध के दांत समय पर टूट जाएंगे और फिर अच्छे दांत आ जाएंगे। आपकी यह सोच बच्चे को गंभीर मर्ज का शिकार बना सकती है। पीजीआई की दंत रोग विभाग की ओपीडी में कोविड के बाद बच्चों में दांतों के सड़ने वाले केस ज्यादा आ रहे हैं, जिसमें इलाज में अनदेखी और देरी के चलते स्थिति गंभीर हो रही है।

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पीजीआई ओरल हेल्थ साइंसेज के प्रमुख डॉ. कृष्णा गाभा का कहना है कि सड़े हुए दांत में बनने वाला पस भोजन के साथ पेट में जाकर बच्चे को बीमार कर सकता है। सड़े दांतों की वजह से उसके बाद आने वाले दांत की जड़ भी कमजोर व खराब हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि सड़न का समय रहते इलाज कराया जाए। सड़न की स्थिति में बच्चों के दांतों में भी फिलिंग कर उसे बचाने का प्रयास किया जाता है।
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डॉ. कृष्णा ने बताया कि आमतौर पर बच्चों के दांत में सड़न होने के 18 से 24 महीने बाद दर्द शुरू होता है। जबकि इस दौरान उसके अन्य दांतों और मसूड़ों में सड़न फैलती रहती है। दूध के दांत 7 से 8 साल के बीच टूटते हैं। जबकि सड़न की शिकायत तीन से चार साल के बीच शुरू हो जाती है। ध्यान रखने योग्य बात यह है कि बच्चों को बोतल के बजाय चम्मच, कटोरी या गिलास से दूध पिलाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही गर्भावस्था के दौरान खानपान में कैल्शियम, विटामिन, फाइबर वाले आहार को प्रमुखता दें। क्योंकि बच्चों के दांत और हड्डियां गर्भावस्था के दौरान लिए गए आहार से ही बनते हैं। 


दांतों में कीड़ा लगने की वजह
  • नियमित ब्रश न करना
  • जरूरत से ज्यादा मीठी चीजें खाना
  • ज्यादा गर्म चीजें खाना
  • फास्ट फूड या ऑयली चीजें खाना
  • टॉफी, कैंडी, चॉकलेट खाना
  • खाने से पर्याप्त न्यूट्रिशन न मिलना,
  • कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन की कमी होना

ये गलती न करें
बोतल से दूध पीते-पीते सो जाने पर बच्चे के मुंह में मीठा चिपका रह जाता है। कई घंटों तक इसके दांतों पर रहने से बैक्टीरिया पनपता है जिससे दांतों में कीड़ा लग जाता है।

ये सावधानी जरूरी

शिशु के तीन महीने का होने के बाद एक सूती गीले कपड़े से उसके मसूड़ों को हल्के हाथ से पोंछें। जब भी बोतल से दूध पिलाएं तब ऐसा जरूर करें, ताकि मुंह से मीठापन हट जाए। पहला दांत आने पर उसे मुलायम इंफैंट टूथब्रश से साफ करना चाहिए। शिशु के 18 महीने के होने तक टूथब्रश पर सिर्फ पानी डालकर दांत साफ करें।

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