तबादले से नाखुश खेमका ने राज्यपाल से की मुलाकात
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वाड्रा डीएलएफ लैंड डील पर जांच बिठाने की बात करने वाली भाजपा सरकार ने इस मामले में उंगली उठाने वाले अधिकारी को ही साइड लाइन कर दिया है। आईएएस अधिकारी अशोक खेमका का 46वीं बार तबादला हुआ है।
सरकार ने वहीं पर लगा दिया है, जहां से उन्हें हटाकर मुख्यधारा में लाया गया था। खेमका को डीजी ट्रांसपोर्ट के पद से हटाकर वापस पुरातत्व विभाग में भेज दिया गया है। अशोक खेमका को सचिव, पुरातत्व एवं संग्रहालय और महानिदेशक, पुरातत्व एवं संग्रहालय नियुक्त किया गया है।
खेमका को साइड लाइन लगाने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इसमें परिवहन मंत्री रामबिलास शर्मा से अनबन, मीडिया में खेमका द्वारा दिए जा रहे बयान और खेमका और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के बीच ट्वीटर पर चल रहा संवाद माना जा रहा है, लेकिन एक सवाल एक सवाल यक्ष प्रश्न की तरह सबके सामने खड़ा है कि आखिरकार सरकार को खेमका के मामले में बैकफुट पर क्यों आना पड़ा।
इसके अलावा सरकार ने हुड्डा सरकार में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रहे एसएस ढिल्लो को अतिरिक्त मुख्य सचिव, परिवहन और नागरिक उड्डयन लगाया गया है। राम निवास को वर्तमान कार्यभार के अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
विजय वर्धन को एसएस ढिल्लों के स्थान पर अतिरिक्त मुख्य सचिव, पुरातत्व एवं संग्राहालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। जबकि अवतार सिंह को प्रधान सचिव, महिला एवं बाल विकास लगाया गया है।
राज्यपाल से बैठक के बाद चुप्पी साध ली
परिवहन आयुक्त पद से ट्रांसफर किए गए हरियाणा के सीनियर आईएएस अशोक खेमका शुक्रवार शाम राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी से मिले। दोनों के बीच करीब आधा घंटा चली बातचीत के दौरान कोई अन्य अधिकारी मौजूद नहीं था।
हालांकि, चाय के साथ हुई इस बातचीत का ब्योरा नहीं मिल सका है, लेकिन माना जा रहा है कि अपने तबादले से नाखुश खेमका राज्यपाल से अपनी व्यथा कहने पहुंचे थे। इधर, ट्विटर के जरिए अपना दर्द बता रहे खेमका ने राज्यपाल के साथ अपनी बैठक के बाद चुप्पी साध ली है। सरकारी तंत्र इस मुलाकात के बारे में कोई टिप्पणी करने को तैयार नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, खेमका ने राज्यपाल से मिलने का समय ले लिया था और शुक्रवार शाम साढ़े पांच बजे उनकी बैठक तय हुई थी। राज्यपाल के साथ उनकी इस मुलाकात ने प्रदेश में सियासी तूफान खड़ा होने के संकेत दिए हैं। खेमका के तबादले के बाद से ही विपक्षी दल जहां खट्टर सरकार पर लगातार निशाना साध रहे हैं, वहीं प्रदेश सरकार के नेता और खुद मुख्यमंत्री भी सरकार के फैसले का बचाव करते दिखाई दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री तबादले को प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहे हैं, लेकिन उनके मंत्री अलग-अलग बयान जारी कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज जो खुद को खेमका के साथ बताते रहे हैं, ने शुक्रवार तो यहां तक कह दिया कि अगर खेमका को उनके विभाग में ट्रांसफर कर दिया जाए तो उन्हें खुशी होगी।
परिवहन मंत्री रामबिलास शर्मा भी खेमका के तबादले पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर चुके हैं। विपक्षी दलों में कांग्रेस और इनेलो ने खेमका के तबादले को लेकर भाजपा की जमकर आलोचना की है।