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Chandigarh News: मॉल में बिना फिजिकल फिटनेस चल रही थी टॉय ट्रेन, चंडीगढ़-मोहाली के ज्यादातर गेमिंग जोन बंद

Wed, 26 Jun 2024 07:06 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 26 Jun 2024 07:06 AM IST
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Toy train was running in the mall without physical fitness, most of the gaming zones of Chandigarh-Mohali closed
चंडीगढ़/मोहाली। एलांते मॉल में टॉय ट्रेन के पलटने से 11 वर्षीय बच्चे की मौत के मामले में पुलिस-प्रशासन पूरी तरह से हरकत में आ गए हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि टॉय ट्रेन को बिना फिजिकल फिटनेस के ही चलाया जा रहा था। अब पुलिस ने टॉय ट्रेन का संचालन करने वाली कंपनी पिक्सी लैंड के मालिकों को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किया है।
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उधर, सुखना लेक समेत शहर में कई स्थानों पर नियमों को ताक पर रखकर झूले और दूसरे उपकरण चलाए जा रहे हैं, जहां बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। एलांते मॉल में हादसे के बाद से सेक्टर-34 के प्रदर्शनी ग्राउंड में चल रहा मेला बंद कर दिया गया है। एलांते मॉल के अंदर संचालित गेमिंग जोन भी बंद है। एलांते मॉल में हादसे के बाद पुलिस ने टॉय ट्रेन को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दिया है। कंपनी या फिर एलांते मॉल प्रबंधन की ओर से अब तक कोई भी जांच में शामिल होने के लिए नहीं पहुंचा है।
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बता दें कि बीती शनिवार रात एलांते मॉल में टॉय ट्रेन अनियंत्रित होकर पलट गई थी। हादसे में ट्रेन में सवार जिला नवांशहर (पंजाब) के गावं सियाना निवासी 11 वर्षीय शाहबाज का सिर के बल फर्श पर गिरकर लहूलुहान हो गया था। परिजन आनन-फानन उसे जीएमसीएच-32 ले गए जहां रविवार उसने दम तोड़ दिया था। मामले में पुलिस ने औद्योगिक क्षेत्र थाने में टॉय ट्रेन के ऑपरेटर सौरभ, कंपनी पिक्सी लैंड और एलांते मॉल प्रबंधन के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर ऑपरेटर सौरभ को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया था।
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सुखना लेक पर भी बच्चों की जान से खिलवाड़ : मंगलवार को सुखना लेक पर भी बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ होता दिखा। यहां प्रशासन की ओर से बठिंडा एम्यूजमेंट पार्क नामक फर्म बच्चों के लिए कई प्रकार के झूले, ड्रैगन ट्रेन आदि का संचालन कर रही है। रियल्टी चेक में यहां कई गडबड़ियां सामने आईं। यहां टॉय ट्रेन के बजाय रेल ट्रैक वाली ट्रेन चलाई जा रही है। इस ट्रेन में करीब 8 से 10 साल की एक बच्ची बैठी थी लेकिन सुरक्षा के इंतजाम नहीं नजर आए। ट्रेन में बच्चों को पकड़ने के लिए कोई हैंडल नहीं था और न ही कोई सीट बेल्ट लगी थी। चार डिब्बों वाली इस ट्रेन में से केवल एक ही डिब्बे में लोहे की पाइप लगी थी जबकि अन्य डिब्बों में यह पाइप टूटी हुई थी। ऐसे में बच्चों के पास पकड़ने के लिए कोई चीज नहीं दिखी। अगर यहां कोई हादसा होता है तो प्लास्टिक की सीट से बने डिब्बों में से बच्चे कोई सीधे बाहर गिरेंगे। वहीं, यहां संचालित ड्रैगन ट्रेन के रास्ते में पेड़ की टहनियां गुजरतीं दिखीं। अगर कोई टहनी ट्रेन के किसी भी हिस्से में फंस जाए तो हादसा हो सकता है।
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