HSGPC के खिलाफ क्यों हैं बादल, जानिए 6 कारण
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पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने साफ कर दिया है कि हरियाणा में अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाए जाने का खिलाफ धार्मिक मोर्चे का ऐलान अमृतसर में 27 को पंथक कांफ्रेंस के दौरान होगा जबकि विरोध का यह मोर्चा हरियाणा की जमीन पर चलेगा।
वीरवार को ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री बादल ने कहा कि धार्मिक मोर्चे के बाद जो भी हालात पैदा होंगे, उसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा जिम्मेदार होंगे। बादल ने कहा कि वे अलग कमेटी के खिलाफ गिरफ्तारी देने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
बादल इस मसले पर सीएम पद छोड़ने के अपने इरादे पर भी अडिग दिखाई दिए, हालांकि उन्होंने कहा कि इस संबंध में वे जो भी फैसला लेंगे, उसे पंथक कांफ्रेंस में सुना दिया जाएगा। मुख्यमंत्री बादल से बातचीत के प्रमुख अंश-
कांग्रेस का सिख पंथ के खिलाफ एक और गुनाह
. एचएसजीएमसी के खिलाफ मोर्चा शुरू करने के बजाय कानूनी रास्ता भी अख्तियार किया जा सकता था?
- यह कांग्रेस का सिख पंथ के खिलाफ एक और गुनाह है। इससे पहले श्री अकाल तख्त साहिब, फिर सिख प्रतिनिधियों और अब एसजीपीसी पर हमला किया गया है। कांग्रेस की कोशिश श्री अकाल तख्त साहिब और एसजीपीसी के सम्मान को ठेस पहुंचाने की है। हम एसजीपीसी को बांटने की सोनिया व हुड्डा की कोशिश को कामयाब नहीं होेने देंगे। एसजीपीसी बहुत कुर्बानियों के बाद बनी हैं। डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में एसजीपीसी को बांटकर सिखों को दोफाड़ करने की कांग्रेसी चाल को कामयाब नहीं होने दिया।
. क्या मोर्चा 27 जुलाई से शुरू हो जाएगा?
- दरबार साहिब परिसर में 27 जुलाई की विश्व पंथक कांफ्रेंस में मोर्चे के कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी। मोर्चा अमृतसर में नहीं हरियाणा की धरती से शुरू होगा। शिअद के हर कार्यकर्ता एसजीपीसी को बचाने के लिए मोर्चे में कूदने को तैयार हैं। इसके जो भी नतीजे निकलेंगे, उसकी जिम्मेदारी सोनिया व हुड्डा की होगी।
कायदे-कानून को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ूंगा
. चर्चा है कि आप पंथक कांफ्रेंस में सीएम पद छोड़ने की घोषणा कर सकते हैं?
- इस बारे में अभी कुछ नहीं कहना चाहता। मुझे जो भी फैसला लेना था, ले लिया है। ऐलान 27 जुलाई को करूंगा। पंथ के लिए कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हूं और पता नहीं कब गिरफ्तारी दे दूं।
. आपके जेल जाने पर अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार कैसे चलेगी?
- कुछ नहीं रुकता। एक वक्त था, जब कहा जाता था, ‘इंडिया इज इंदिरा, इंदिरा इज इंडिया।’ फिर कहा जाने लगा राजीव गांधी के सिवाय कोई देश नहीं चला सकता। क्या उनके बाद देश नहीं चला? कई काबिल प्रधानमंत्री देश को मिले। आज मोदी हैं और देश दौड़ रहा है। पंजाब भी निरंतर आगे बढ़ता चला जाएगा।
. बतौर मुख्यमंत्री दूसरे राज्य की सरकार के खिलाफ मोर्चा लगाना नीतिगत रूप से सही होगा?
- मैं सभी कायदे-कानून जानता हूं। उन्हें ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ूंगा। श्री अकाली तख्त साहिब, एसजीपीसी का सम्मान मेरे लिए सर्वोपरि है। हमने एक लंबा संघर्ष करके सिखों की यह सिरमौर संस्था हासिल की है। कांग्रेस के हाथों इसका अपमान हो रहा है, जिसे हम सहन नहीं कर सकते।
मोर्चा पूरी तरह से शांतिपूर्ण होगा
. इससे हरियाणा में कानून-व्यवस्था बिगड़ने का डर है?
- हमारा मोर्चा पूरी तरह से शांतिपूर्ण होगा। यहां तक कि एसजीपीसी अध्यक्ष से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि हरियाणा के गुरुद्वारों में कोई हथियारबंद व्यक्ति न हो। जहां तक पंजाब के सिखों के वहां के गुरुद्वारों में पहुंचने की बात है, तो हर भारतवासी को देश में किसी भी स्थान पर जाने का हक है। मैं खुद को पंजाबी होने के साथ देश के हर राज्य का निवासी मानता हूं। अब हुड्डा ही हालात खराब करने की कोशिश करें, तो कोई क्या कर सकता है? हमारी तरफ से कोई हिंसा नहीं होगी।
. इस मसले पर केंद्र की भूमिका, हरियाणा में राष्ट्रपति शासन की अटकलों और वहां नए राज्यपाल से एक्ट को निरस्त करवाने की संभावनाओं के बारे में आपका क्या कहना है?
- एनडीएस सरकार ने सही दिशा में कदम उठाया है। अटॉर्नी जनरल की राय पर ही एचएसजीएसी के खिलाफ हरियाणा के राज्यपाल व मुख्य सचिव को पत्र लिखा गया। पूरी उम्मीद है कि आगे भी केंद्र सरकार साथ देती रहेगी। जहां तक हरियाणा में राष्ट्रपति शासन लगने की अटकलों की बात है, इसमें हम नहीं पड़ना चाहते। यह कानूनी पहलू हैं, वैसे शिअद का स्टैंड किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन के खिलाफ रहा है। हरियाणा के नए बनने वाले राज्यपाल उक्त एक्ट पर क्या निर्णय लेते हैं या नहीं लेते, यह उनके अधिकार क्षेत्र की बात होगी। मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहता।
संशोधन का अधिकार केवल केंद्र को
. हरियाणा सरकार द्वारा एक्ट बनाए जाने पर आपको तकनीकी तौर पर क्या आपत्ति है?
- हुड्डा सरकार ने इसे मनी बिल (स्टेट सब्जेक्ट) बनाकर पेश किया है, जबकि यह विषय केंद्र से संबंधित है। केंद्रीय कानून द्वारा स्थापित गुरुद्वारा आयोग एसजीपीसी के चुनाव करवाता है। अब हरियाणा के जो 11 एसजीपीसी सदस्य पिछले चुनाव में चुने गए हैं, उनकी सदस्यता हुड्डा इस एक्ट के माध्यम से कैसे छीन सकते हैं। एसजीपीसी से संबंधित किसी भी संशोधन का अधिकार केवल केंद्र को है, चाहे वह सहजधारियों का मामला हो या फिर महिलाओं को चुनाव में आरक्षण देने का।
. सोनिया या डॉ. मनमोहन सिंह से इस मसले पर बात हुई?
- सोनिया को मैं कभी मिला नहीं, न ही कभी बात हुई। डॉ. मनमोहन सिंह को कांग्रेस किनारे कर चुकी है। उनके हाथ में अब कुछ नहीं है। इस मसले पर इन दोनों से कोई बात नहीं की जाएगी।
एसजीपीसी सिख पंथ की सिरमौर संस्था
. सरना, झींडा, नलवी को मना क्यों नहीं लेते?
- यह लोग पंथ के खिलाफ काम कर रहे हैं। परमजीत सिंह सरना ने पहले दिल्ली में और फिर पंजाब में कांग्रेस के लिए काम किया। सिखों ने उन्हें दोनों जगह नकार दिया। अब वह हरियाणा में कोशिश कर रहे हैं। झींडा और नलवी को लोग पिछले एसजीपीसी चुनाव में नकार चुके हैं। जिन लोगों ने श्री अकाल तख्त साहिब की बात नहीं मानी, मेरी क्या मानेंगे?
. तो फिर इस मसले का हल क्या है?
- सेवा जैसे चल रही है, चलने दी जाए। एसजीपीसी सिख पंथ की सिरमौर संस्था है। इसकी सर्वोच्चता कायम रहनी चाहिए। इसे बांटने या इसके सम्मान को ठेस पहुंचाने की हर कोशिश का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।