जींद की धरती पर बादशाहत की जंग, 1 लाख 70 हजार मतदाता तय करेंगे भाग्य
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चुनावी समर में मैदान ए जंग बन चुकी बांगर की धरती को जनता के फैसले के लिए एक सप्ताह का समय शेष रह गया है। जाटलैंड की सियासत को काबू रखने के लिए शुरू हुआ यह युद्ध 31 जनवरी को पूरा होगा। उससे पहले सभी दलों ने जातीय समीकरणों के हिसाब से अपने प्रत्याशियों को मजबूती के साथ मैदान में उतार दिया है। राहुल की पहली पसंद बने रणदीप सुरजेवाला जींद से अपनी नई पारी की शुरुआत कर रहे हैं।
बादशाहत की जंग में हर किसी की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का सिपहसलार पंजा जमाता है या फिर भाजपा के लिए अब तक बंजर रही इस धरती पर पहली बार कमल का फूल खिलता है। इनेलो-बसपा गठबंधन अपने कब्जे वाली इस सीट को बरकरार रखने के लिए ताकत झोंके हुए है तो जननायक जनता पार्टी भविष्य की इबारत लिखना चाह रही है।
एक ओर सरकार है तो दूसरी ओर कद्दावर उम्मीदवार। कांग्रेस की ओर से रणदीप सुरजेवाला ने चुनावी दंगल बेहद रोमांचक बना दिया है। जननायक जनता पार्टी के उम्मीदवार दिग्विजय चौटाला इसे और रोचकता की ओर ले जा रहे हैं। भाजपा उम्मीदवार कृष्ण मिड्ढा को जहां पिता की विरासत पर भरोसा है। इनेलो के कब्जे वाली इस सीट पर भाजपा इस बार अपना खाता अपने बूते खोलने को बेकरार दिख रही है। सीएम मनोहर लाल समेत पूरा मंत्रिमंडल जींद के हर गली-मोहल्ले और गांव-गांव में दस्तक दे चुका है।
इनेलो उम्मीदवार उम्मेद रेढ़ू की इलाके में अपनी पहचान हैं, वह जाना-पहचाना चेहरा हैं। जिसके दम पर पार्टी जीत की हैट्रिक लगाने का दम भर रही है। इनेलो विधायक डॉ. हरिचंद मिड्डा के जाने से खाली हुई इस सीट पर हो रहे उपचुनाव के कारण इन दिनों पूरे प्रदेश का सियासी पारा गरमाया हुआ है।
टेकराम, मांगे राम, बरवाला व सिंगला जीत की अहम कड़ी
जींद की सियासत में टेकराम कंडेला, मांगे राम गुप्ता, सुरेंद्र बरवाला और पूर्व मंत्री सिंगला बड़े नाम हैं। उप चुनाव में इनकी भूमिका बेहद अहम रहेगी। कंडेला और बरवाला भाजपा को समर्थन दे चुके हैं, जबकि मांगे राम गुप्ता मिल सबसे रहे हैं पर समर्थन किसे हैं, इसकी टोह लगाना कठिन है। पूर्व मंत्री सिंगला के बेटे अंशुल सिंगला रणदीप के पक्ष में नामांकन वापस ले चुके हैं। इन नेताओं का जीत में खास रोल रहने वाला है।
सुरजेवाला-दिग्विजय ने रोचक बनाई जींद की सियासी लड़ाई
कैथल से विधायक, एआईसीसी मीडिया प्रभारी और हुड्डा सरकार में मंत्री रह चुके रणदीप सिंह सुरजेवाला, इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ओमप्रकाश चौटाला के पोते व डॉ. अजय सिंह चौटाला के पुत्र दिग्विजय चौटाला ने जींद उपचुनाव में ताल ठोककर राजनीतिक लड़ाई को बेहद रोचक बना दिया है। अब यह सीट हाइप्रोफाइल बन गई है। जीतेगा कौन, यह मतदाताओं की खामोशी तय करेगी। रणदीप खुद को बांगर का चौधरी तो दिग्विजय बेटा बता रहे हैं। दोनों ने जीत के लिए दिन-रात एक किया हुआ है।
एक लाख सत्तर हजार मतदाता करेंगे तय
जींद उपचुनाव में जीत उसी उम्मीदवार की होगी जो सभी वर्गों के मत हासिल करेगा। कुल एक लाख 70 हजार मतदाता उम्मीदवारों का सियासी भविष्य लिखेंगे। इनमें 52 हजार जाट, 17 हजार ब्राह्मण, 15 हजार पंजाबी, 13 हजार वैश्य, 12 हजार सैनी, 10 हजार वाल्मीकि और साढ़े सात हजार पिछड़ा वर्ग के मतदाता शामिल हैं। इन्हें जो उम्मीदवार पसंद आ गया, जींद का सरदार वही होगा।
ब्राह्मण, सैनी व अन्य वर्गों से आशरी को उम्मीद
भाजपा को अपनी ओर से अलविदा कह चुके कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी ने विनोद आशरी पर भरोसा जताया है। जनता उन पर कितना भरोसा करती है, यह 31 जनवरी को मतगणना के दिन तय हो जाएगा। लेकिन, आशरी अपनी जीत का गणित ब्राह्मण, सैनी व अन्य वर्गों के सहारे बिठाने में लगे हुए हैं। राजकुमार सैनी को नई पार्टी राष्ट्रीय सुरक्षा मंच के बैनर तले जींद उपचुनाव में पहली बार अपनी जमीनी हकीकत का भी पता चलेगा। आशरी अन्य दलों के उम्मीदवारों के लिए भी घातक सिद्ध हो सकते हैं।