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CBSE 12th Result: टॉपर्स की जुबानी पढ़िए सक्सेस होने की कहानी
amarujala.com- Presented by: रिशु राज सिंह
Updated Mon, 29 May 2017 09:22 AM IST
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CBSE Result
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कॉमर्स में ट्राईसिटी में दूसरे नंबर पर रही मेहर विर्क
मेहर विर्क, जिसने 12वीं में कॉमर्स स्ट्रीम में 99 प्रतिशत अंक हासिल किए, सेक्टर-9 स्थित कार्मल कान्वेंट स्कूल की स्टूडेंट है। मेहर ने ट्राईसिटी में तो दूसरा स्थान हासिल किया ही, लेकिन अपने स्कूल का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया।
अभी तक स्कूल में किसी भी स्ट्रीम का टॉप स्कोर 97.6 प्रतिशत था। रिजल्ट केबाद स्कूल में आए मेहर केपिता जेपीएस विर्क और मां हरलीन विर्क ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर नाज है। मेहर सिर्फ किताबों में सिमटी स्टूडेंट नहीं है। बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रम और डिबेट्स में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा को लगातार निखारती रहती है। मेहर ने बताया कि वह काफी खुश है, क्योंकि उसकी मेहनत रंग लाई। स्कूल और परिजनों का पूरा सहयोग मिले और पूरी लगन से किसी काम किया जाए, तो सफलता जरूर मिलती है।
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मेहर विर्क, जिसने 12वीं में कॉमर्स स्ट्रीम में 99 प्रतिशत अंक हासिल किए, सेक्टर-9 स्थित कार्मल कान्वेंट स्कूल की स्टूडेंट है। मेहर ने ट्राईसिटी में तो दूसरा स्थान हासिल किया ही, लेकिन अपने स्कूल का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया।
अभी तक स्कूल में किसी भी स्ट्रीम का टॉप स्कोर 97.6 प्रतिशत था। रिजल्ट केबाद स्कूल में आए मेहर केपिता जेपीएस विर्क और मां हरलीन विर्क ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर नाज है। मेहर सिर्फ किताबों में सिमटी स्टूडेंट नहीं है। बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रम और डिबेट्स में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा को लगातार निखारती रहती है। मेहर ने बताया कि वह काफी खुश है, क्योंकि उसकी मेहनत रंग लाई। स्कूल और परिजनों का पूरा सहयोग मिले और पूरी लगन से किसी काम किया जाए, तो सफलता जरूर मिलती है।
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ट्राइसिटी में पहला स्थान पाने वाली कास्वी बनना चाहती है टीचर
ट्राइसिटी में पहला स्थान पाने वाली कास्वी बनना चाहती है टीचर
ट्राइसिटी में पहला स्थान पाने वाली कास्वी बनना चाहती है टीचर
ट्राइसिटी में पहले स्थान पर रही कास्वी ने 12वीं में मेडिकल में 98.47 फीसदी अंक हासिल किए हैं। कास्वी की ख्वाहिश टीचिंग की है। रिजल्ट देखने के बाद एम्स में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा में शामिल हुई कास्वी मेडिकल के छात्रों को पढ़ाना चाहती है। ताकि भविष्य में एक अच्छे डॉक्टर के तौर पर सभी की सेवा कर सके।
कास्वी के पिता यशवीर गुप्ता भले ही एक कोचिंग संस्थान में मैथ पढ़ाते हैं। यशवीर ने बताया कि कास्वी इंजीनियरिंग की भी प्रवेश परीक्षा में शामिल हुई है, लेकिन उसकी ख्वाहिश डॉक्टर या इंजीनियर बनने से अधिक फैकल्टी के तौर पर पढ़ाने की है। कास्वी ने कहा कि रिजल्ट को लेकर इतनी उम्मीद थी, लेकिन मम्मी रितु गुप्ता और पिता यशवीर गुप्ता के साथ साथ भाई पुलकित ने भी उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। स्कूल के अलावा रोजाना सात घंटे की पढ़ाई के बाद पापा से भी कोचिंग लेती रही।
ट्राइसिटी में पहले स्थान पर रही कास्वी ने 12वीं में मेडिकल में 98.47 फीसदी अंक हासिल किए हैं। कास्वी की ख्वाहिश टीचिंग की है। रिजल्ट देखने के बाद एम्स में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा में शामिल हुई कास्वी मेडिकल के छात्रों को पढ़ाना चाहती है। ताकि भविष्य में एक अच्छे डॉक्टर के तौर पर सभी की सेवा कर सके।
कास्वी के पिता यशवीर गुप्ता भले ही एक कोचिंग संस्थान में मैथ पढ़ाते हैं। यशवीर ने बताया कि कास्वी इंजीनियरिंग की भी प्रवेश परीक्षा में शामिल हुई है, लेकिन उसकी ख्वाहिश डॉक्टर या इंजीनियर बनने से अधिक फैकल्टी के तौर पर पढ़ाने की है। कास्वी ने कहा कि रिजल्ट को लेकर इतनी उम्मीद थी, लेकिन मम्मी रितु गुप्ता और पिता यशवीर गुप्ता के साथ साथ भाई पुलकित ने भी उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। स्कूल के अलावा रोजाना सात घंटे की पढ़ाई के बाद पापा से भी कोचिंग लेती रही।
नॉन मेडिकल में ट्राईसिटी में दूसरे नंबर पर रहे शौर्य
नॉन मेडिकल में ट्राईसिटी में दूसरे नंबर पर रहे शौर्य
नॉन मेडिकल में ट्राईसिटी में दूसरे नंबर पर रहे शौर्य
नॉन मेडिकल में 98.4 नंबर पाकर ट्राईसिटी में दूसरे नंबर पर रहे शौर्य ने सफलता के लिए एक मंत्र अपनाया। शौर्य के मुताबिक उसने हर छोटी से छोटी दिक्कत को सांझा किया। अपने टीचर्स को बताया, परिजनोें को बताया और सभी से सुझाव मांगे।
जो सुझाव अच्छे लगे, उन्हें अपनाकर समस्या को दूर किया। शौर्य के मुताबिक उसने दो साल खुद को सभी से अलग कर लिया था। उसे पढ़ाई से मतलब था, क्योंकि आईआईटी में जाना लक्ष्य है और इसकेलिए जेईई मेन्स भी दे दिया है। शौर्य ने बताया कि घर पर पढ़ाई करना और रिपीट करना एक अच्छी आदत है और सफलता पाने केलिए इसे सभी को अपनाना चाहिए।
नॉन मेडिकल में 98.4 नंबर पाकर ट्राईसिटी में दूसरे नंबर पर रहे शौर्य ने सफलता के लिए एक मंत्र अपनाया। शौर्य के मुताबिक उसने हर छोटी से छोटी दिक्कत को सांझा किया। अपने टीचर्स को बताया, परिजनोें को बताया और सभी से सुझाव मांगे।
जो सुझाव अच्छे लगे, उन्हें अपनाकर समस्या को दूर किया। शौर्य के मुताबिक उसने दो साल खुद को सभी से अलग कर लिया था। उसे पढ़ाई से मतलब था, क्योंकि आईआईटी में जाना लक्ष्य है और इसकेलिए जेईई मेन्स भी दे दिया है। शौर्य ने बताया कि घर पर पढ़ाई करना और रिपीट करना एक अच्छी आदत है और सफलता पाने केलिए इसे सभी को अपनाना चाहिए।
आर्टस में टॉपर नूर का इंटरव्यू
आर्टस में टॉपर नूर का इंटरव्यू
नूर की सफलता का राज: सवालों को बार-बार हल करना
सेक्टर-9 स्थित कार्मल कॉन्वेंट की छात्रा नूर ने कला संकाय में 98.2 फीसदी अंक हासिल कर ट्राइसिटी में टॉप किया है। नूर का सक्सेस मंत्र रिविजन और सवालों को बार-बार हल करने की प्रैक्टिस करना है। नूर को गणित और अंग्रेजी में शत प्रतिशत अंक मिले हैं। नूर ने बताया कि सवालों को बार-बार हल करना उसकी आदत थी। इससे टाइमिंग में सुधार होता है। हर बार कोशिश रहती है कि पिछली दफा से कम समय में हल निकल सके।
सेक्टर-9 स्थित कार्मल कॉन्वेंट की छात्रा नूर ने कला संकाय में 98.2 फीसदी अंक हासिल कर ट्राइसिटी में टॉप किया है। नूर का सक्सेस मंत्र रिविजन और सवालों को बार-बार हल करने की प्रैक्टिस करना है। नूर को गणित और अंग्रेजी में शत प्रतिशत अंक मिले हैं। नूर ने बताया कि सवालों को बार-बार हल करना उसकी आदत थी। इससे टाइमिंग में सुधार होता है। हर बार कोशिश रहती है कि पिछली दफा से कम समय में हल निकल सके।