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पंजाब में तिरपाल घोटाला: 107 करोड़ में की गई थी खरीद, एक्शन में आए सीएम, टेंडर रद्द कर मांगी रिपोर्ट
Wed, 13 Dec 2023 07:38 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 13 Dec 2023 07:38 AM IST
सार
मुख्यमंत्री तक पहुंची उक्त कथित गड़बड़ी की जांच के आदेश जारी करते हुए विभाग के सचिव से यह जानकारी मांगी गई है कि इस साल तिरपाल के दाम किन परिस्थितियों के कारण बढ़े? बीते वर्षों के दौरान विभाग ने किन दरों पर तिरपालों की खरीद की है और इस बार अधिक दाम पर टेंडर अलॉट करने की क्या मजबूरी रही?
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WHEAT PURCHASE
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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विस्तार
पंजाब में हाल ही में समाप्त हुए खरीफ खरीद सीजन के दौरान अनाज की संभाल के लिए 107 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई तिरपाल का मामला विवाद में आ गया है। कहा जा रहा है कि यह खरीदारी दोगुने दाम पर हुई है, जिसकी जांच के लिए मुख्यमंत्री ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सचिव गुरकीरत कृपाल सिंह से रिपोर्ट तलब कर ली है। साथ ही मुख्यमंत्री ने तिरपाल खरीद संबंधी टेंडर को भी रद्द करने के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशक पुनीत गोयल की ओर से पंजाब राज्य भंडारण निगम (पीएसडब्ल्यूसी), पंजाब राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड (पनसप) और पंजाब राज्य सहकारी आपूर्ति और विपणन फेडरेशन (मार्कफेड) को एक परिपत्र जारी कर दिया है कि उक्त तिरपालों की खरीद के लिए जारी किए गए टेंडरों पर आगे कोई कार्रवाई न की जाए। इस बीच, पता चला है कि अनाज भंडारण करने वाली कुछ एजेंसियों को तिरपाल की खेप प्राप्त हो गई है और इसकी एवज में संबंधित विक्रेता को भुगतान भी कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री तक पहुंची उक्त कथित गड़बड़ी की जांच के आदेश जारी करते हुए विभाग के सचिव से यह जानकारी मांगी गई है कि इस साल तिरपाल के दाम किन परिस्थितियों के कारण बढ़े? बीते वर्षों के दौरान विभाग ने किन दरों पर तिरपालों की खरीद की है और इस बार अधिक दाम पर टेंडर अलॉट करने की क्या मजबूरी रही? विभाग के सचिव गुरकीरत कृपाल सिंह ने केवल इतना ही कहा कि जांच शुरू कर दी गई है और मुख्यमंत्री के आदेश के अनुसार उन्हें जल्द ही रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
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ऐसे हुआ खुलासा
मालवा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी (आप) के एक नेता ने मुख्यमंत्री कार्यालय को शिकायत भेजी थी कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से तिरपाल खरीद के लिए जारी किए गए टेंडर में तिरपाल की जिस कीमत को मंजूरी दी गई है, वह बाजार मूल्य से दोगुना से भी अधिक है।
शिकायत में यह भी बताया गया था कि इस साल तिरपाल खरीद का टेंडर 850 रुपये प्रति तिरपाल की दर से मंजूर हुआ है, जबकि पिछले साल इसी तिरपाल का दाम 700 रुपये दिया गया था। विभाग की तरफ से इस बार 107 करोड़ रुपये में तिरपाल खरीदने का टेंडर अलॉट कर दिया। यह भी आरोप लगाया गया कि जिन लोगों ने तिरपाल की आपूर्ति के लिए टेंडर भरा था, उन्होंने हिमाचल प्रदेश के एक तिरपाल निर्माता के साथ मिलकर एक कार्टेल बनाया और तिरपाल की आपूर्ति का पूरा ठेका हासिल कर लिया।
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मुख्यमंत्री के आदेश के बाद खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशक पुनीत गोयल की ओर से पंजाब राज्य भंडारण निगम (पीएसडब्ल्यूसी), पंजाब राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड (पनसप) और पंजाब राज्य सहकारी आपूर्ति और विपणन फेडरेशन (मार्कफेड) को एक परिपत्र जारी कर दिया है कि उक्त तिरपालों की खरीद के लिए जारी किए गए टेंडरों पर आगे कोई कार्रवाई न की जाए। इस बीच, पता चला है कि अनाज भंडारण करने वाली कुछ एजेंसियों को तिरपाल की खेप प्राप्त हो गई है और इसकी एवज में संबंधित विक्रेता को भुगतान भी कर दिया गया है।
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मुख्यमंत्री तक पहुंची उक्त कथित गड़बड़ी की जांच के आदेश जारी करते हुए विभाग के सचिव से यह जानकारी मांगी गई है कि इस साल तिरपाल के दाम किन परिस्थितियों के कारण बढ़े? बीते वर्षों के दौरान विभाग ने किन दरों पर तिरपालों की खरीद की है और इस बार अधिक दाम पर टेंडर अलॉट करने की क्या मजबूरी रही? विभाग के सचिव गुरकीरत कृपाल सिंह ने केवल इतना ही कहा कि जांच शुरू कर दी गई है और मुख्यमंत्री के आदेश के अनुसार उन्हें जल्द ही रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
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ऐसे हुआ खुलासा
मालवा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी (आप) के एक नेता ने मुख्यमंत्री कार्यालय को शिकायत भेजी थी कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से तिरपाल खरीद के लिए जारी किए गए टेंडर में तिरपाल की जिस कीमत को मंजूरी दी गई है, वह बाजार मूल्य से दोगुना से भी अधिक है।
शिकायत में यह भी बताया गया था कि इस साल तिरपाल खरीद का टेंडर 850 रुपये प्रति तिरपाल की दर से मंजूर हुआ है, जबकि पिछले साल इसी तिरपाल का दाम 700 रुपये दिया गया था। विभाग की तरफ से इस बार 107 करोड़ रुपये में तिरपाल खरीदने का टेंडर अलॉट कर दिया। यह भी आरोप लगाया गया कि जिन लोगों ने तिरपाल की आपूर्ति के लिए टेंडर भरा था, उन्होंने हिमाचल प्रदेश के एक तिरपाल निर्माता के साथ मिलकर एक कार्टेल बनाया और तिरपाल की आपूर्ति का पूरा ठेका हासिल कर लिया।