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हरियाणा के तीन नामी विश्वविद्यालयों की रैकिंग गिरी और रिसर्च में भी पिछड़े, वजह एक नहीं कई हैं
Fri, 19 Jul 2019 12:20 PM IST
खुशबू गोयल
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 19 Jul 2019 12:20 PM IST
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फाइल फोटो
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हरियाणा के तीन नामी विश्वविद्यालयों कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक और चौधरी चरण सिंह कृषि विवि हिसार की रैंकिंग इस बार गिर गई है। इसके गिरने का प्रमुख कारण सामने आ गया है। तीनों ही विश्वविद्यालयों में नियमित फैकेल्टी का भारी अभाव है। प्रदेश सरकार भी इसे मानती है। नियमित शिक्षकों की कमी के कारण गेस्ट फैकेल्टी के जरिए काम चलाया जा रहा है। विश्वविद्यालयों में नियमित फैकेल्टी के लगभग तीन हजार पद लंबे समय से खाली चले आ रहे हैं, जिन्हें भरने की ओर से उच्चतर शिक्षा विभाग ने कोई ध्यान ही नहीं दिया।
रैंकिंग गिरी और उसके कारण तलाशे गए तो पाया गया कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय के नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैकिंग फ्रेमवर्क पर खरा न उतरने का मुख्य कारण नियमित फैकेल्टी न होना है। जिससे विश्वविद्यालय रैंकिंग के पांच प्रमुख संकेतकों टीचिंग-लर्निंग-रिसोर्सिस, रिचर्स एंड प्राफेशनल प्रैक्टिसिस, ग्रेजुएशन आउटकम, आउटरीच एंड इंक्लूजिविटी परसेप्शन पूरी तरह खरा नहीं उतर पाए। बीते दिनों जारी रैकिंग में नीचे खिसकने के बाद विश्वविद्यालयों ने प्रदेश सरकार को नियमित फैकेल्टी के खाली पद भरने की डिमांड भेजी थी। जिसमें से आधे पर भरने को मंजूरी दे दी गई है।
सूत्रों के अनुसार सरकार विश्वविद्यालयों में 1500 नई भर्तियां जल्दी करेगी। इस संबंध में पत्र जारी हो चुका है। रैकिंग गिरने के अलावा हरियाणा के विश्वविद्यालय रिसर्च में भी पिछड़े हैं। रिसर्च की अब वो पूछ नहीं रही जो पहले होती थी। लोगों की धारणा भी प्रदेश के विवि के प्रति बदली है।
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रैंकिंग गिरी और उसके कारण तलाशे गए तो पाया गया कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय के नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैकिंग फ्रेमवर्क पर खरा न उतरने का मुख्य कारण नियमित फैकेल्टी न होना है। जिससे विश्वविद्यालय रैंकिंग के पांच प्रमुख संकेतकों टीचिंग-लर्निंग-रिसोर्सिस, रिचर्स एंड प्राफेशनल प्रैक्टिसिस, ग्रेजुएशन आउटकम, आउटरीच एंड इंक्लूजिविटी परसेप्शन पूरी तरह खरा नहीं उतर पाए। बीते दिनों जारी रैकिंग में नीचे खिसकने के बाद विश्वविद्यालयों ने प्रदेश सरकार को नियमित फैकेल्टी के खाली पद भरने की डिमांड भेजी थी। जिसमें से आधे पर भरने को मंजूरी दे दी गई है।
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सूत्रों के अनुसार सरकार विश्वविद्यालयों में 1500 नई भर्तियां जल्दी करेगी। इस संबंध में पत्र जारी हो चुका है। रैकिंग गिरने के अलावा हरियाणा के विश्वविद्यालय रिसर्च में भी पिछड़े हैं। रिसर्च की अब वो पूछ नहीं रही जो पहले होती थी। लोगों की धारणा भी प्रदेश के विवि के प्रति बदली है।
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पिछले वर्ष की तुलना यह रही है रैंकिंग
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की रैंकिंग 2018 में 80 थी, 2019 में यह 98 पहुंच गई। एमडीयू रोहतक की रैकिंग 2018 में 76 थी जो 2019 में 90 जा पहुंची। चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी की रैकिंग 2019 में 50 थी जो नीचे लुढ़क कर 63 पहुंच गई है।
फैकेल्टी बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू, विदेशों में विवि का मान-सम्मान : शर्मा
शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि विवि में नियमित फैकेल्टी बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रैंकिंग का स्तर सुधारने के लिए अनेक कदम उठाए जाएंगे। विदेशों में हरियाणा की यूनिवर्सिटी का बढ़ा मान-सम्मान है। वहीं, एमडीयू रोहतक के वीसी डॉ. राजबीर सिंह ने कहा कि रैंकिंग को लेकर विश्वविद्यालयों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। अब पहले से अधिक यूनिवर्सिटी का मूल्यांकन किया जा रहा है, जिससे रैकिंग ऊपर नीचे होना तय है। एमडीयू रेटिंग में अव्वल है।
फैकेल्टी बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू, विदेशों में विवि का मान-सम्मान : शर्मा
शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि विवि में नियमित फैकेल्टी बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रैंकिंग का स्तर सुधारने के लिए अनेक कदम उठाए जाएंगे। विदेशों में हरियाणा की यूनिवर्सिटी का बढ़ा मान-सम्मान है। वहीं, एमडीयू रोहतक के वीसी डॉ. राजबीर सिंह ने कहा कि रैंकिंग को लेकर विश्वविद्यालयों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। अब पहले से अधिक यूनिवर्सिटी का मूल्यांकन किया जा रहा है, जिससे रैकिंग ऊपर नीचे होना तय है। एमडीयू रेटिंग में अव्वल है।