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Chandigarh News: जॉर्जिया का वर्क वीजा दिलाने के नाम पर 30 लाख ठगे, तीन ट्रैवल एजेंटों पर मामला दर्ज
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मोहाली। जॉर्जिया का वर्क वीजा दिलाने के नाम पर 12 युवकों से करीब 30 लाख रुपये ठगने के मामले में पंजाब स्टेट क्राइम थाना में तीन ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (पीबीआई) की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई। एफआईआर में राजबीर कौर, गौरव धवन और दीपक कुमार को नामजद किया गया है। आरोप है कि तीनों ने आपसी साजिश के तहत युवकों को जॉर्जिया में नौकरी दिलाने का झांसा देकर मोटी रकम वसूली और उन्हें टूरिस्ट वीजा पर दुबई भेजकर फंसा दिया। शिकायतकर्ता गुरप्रताप सिंह के अनुसार, मार्च 2024 में प्रति व्यक्ति 3.30 लाख रुपये लेकर जॉर्जिया का वर्क वीजा दिलाने का वादा किया गया। मेडिकल, टिकट और प्रोसेसिंग के नाम पर अतिरिक्त रकम भी ली गई। बाद में युवकों को दुबई भेजा गया, जहां उन्हें जॉर्जिया या रूस भेजने का भरोसा दिया गया, लेकिन कथित तौर पर फर्जी टिकट और संदिग्ध दस्तावेज थमा दिए गए। इमिग्रेशन स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आने पर सभी को लौटना पड़ा।
पीबीआई जांच में सामने आया कि आरोपियों के पास विदेश रोजगार भेजने का अधिकृत लाइसेंस नहीं था। इसके बावजूद इन्होंने 12 युवकों से लाखों रुपये वसूले। जांच में बैंक खातों के जरिए रकम ट्रांसफर, फर्जी वीजा, टूरिस्ट वीजा को वर्क वीजा में बदलवाने के झूठे दावे और दुबई में पासपोर्ट कब्जे में लेने जैसे गंभीर आरोप सही पाए गए।
रिपोर्ट में कहा गया कि पहले भेजे गए युवक गंतव्य तक नहीं पहुंचे, इसके बावजूद बाकी लोगों को भी जानबूझकर भेजा जाता रहा। कुछ पीड़ितों को आंशिक रकम लौटाई गई, जबकि शिकायतकर्ता और अन्य पीड़ितों को पैसा वापस नहीं मिला। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406, 465, 468, 120बी, पंजाब ट्रैवल प्रोफेशनल्स रेगुलेशन एक्ट 2014 और इमिग्रेशन एक्ट 1983 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा कि जांच के दौरान अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर उन्हें भी शामिल किया जाएगा। यह मामला फर्जी इमिग्रेशन रैकेट और विदेश भेजने के नाम पर युवाओं से ठगी के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। पुलिस अब वीजा और टिकट जारी करने वाली एजेंसियों की भूमिका भी खंगाल रही है।
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पीबीआई जांच में सामने आया कि आरोपियों के पास विदेश रोजगार भेजने का अधिकृत लाइसेंस नहीं था। इसके बावजूद इन्होंने 12 युवकों से लाखों रुपये वसूले। जांच में बैंक खातों के जरिए रकम ट्रांसफर, फर्जी वीजा, टूरिस्ट वीजा को वर्क वीजा में बदलवाने के झूठे दावे और दुबई में पासपोर्ट कब्जे में लेने जैसे गंभीर आरोप सही पाए गए।
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रिपोर्ट में कहा गया कि पहले भेजे गए युवक गंतव्य तक नहीं पहुंचे, इसके बावजूद बाकी लोगों को भी जानबूझकर भेजा जाता रहा। कुछ पीड़ितों को आंशिक रकम लौटाई गई, जबकि शिकायतकर्ता और अन्य पीड़ितों को पैसा वापस नहीं मिला। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406, 465, 468, 120बी, पंजाब ट्रैवल प्रोफेशनल्स रेगुलेशन एक्ट 2014 और इमिग्रेशन एक्ट 1983 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा कि जांच के दौरान अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर उन्हें भी शामिल किया जाएगा। यह मामला फर्जी इमिग्रेशन रैकेट और विदेश भेजने के नाम पर युवाओं से ठगी के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। पुलिस अब वीजा और टिकट जारी करने वाली एजेंसियों की भूमिका भी खंगाल रही है।
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