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पर्यावरण संरक्षण : हरित अंतिम संस्कार से हरियाणा और पंजाब बचा रहे हजारों पेड़, अब प्रोजेक्ट को देशव्यापी बनाने की तैयारी

Sat, 24 Jul 2021 10:44 AM IST
निवेदिता वर्मा यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 24 Jul 2021 10:44 AM IST
सार

हरित अंतिम संस्कार गोबर के डंडों और उपलों से किया जाता है। इसमें एक शव जलाने में केवल 60 किलोग्राम गोबर के डंडे ही प्रयोग होते हैं। साथ ही अगर दूसरा शव भी जलाना है तो भट्ठी के गरम होने के कारण उसमें गोबर के 30 किलोग्राम डंडों का ही इस्तेमाल होता है।
 

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Thousands of trees are saved in Haryana and Punjab from green funeral
हरियाणा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा और पंजाब में हरित अंतिम संस्कार के जरिए हर साल हजारों पेड़ बचाए जा रहे हैं। विशेष मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. सुनील गुलाटी और आपसी संस्था के डॉ. रामजी जैमल ने इसका बीड़ा उठाया है। संस्था ने दोनों राज्यों में लगभग साढ़े तीन सौ हरित शवदाह गृह बनाए हैं। इसमें एक व्यक्ति के अंतिम संस्कार पर दो पेड़ बचते हैं।

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इस प्रोजेक्ट को अब देशव्यापी बनाने की तैयारी है। संस्था व सेवानिवृत्त आईएएस ने इसी हफ्ते नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण व वन राज्य मंत्री अश्विनी चौबे को अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें 76 हजार करोड़ रुपये के कैंपा फंड के जरिए हरित शवदाह गृह हर पंचायत में बनाने का प्रस्ताव दिया गया है।
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केंद्रीय मंत्री चौबे ने इसका अध्ययन करने के बाद उचित कदम उठाने का भरोसा दिया है। डॉ. रामजी जैमल ने हरित शवदाह गृह प्रोजेक्ट की शुआत कुछ साल पहले सिरसा जिले के दड़बी गांव से की थी। इनमें गोबर के डंडों और उपलों से शव का अंतिम संस्कार किया जाता है। इसमें एक व्यक्ति का शव जलाने में केवल 60 किलोग्राम गोबर के डंडे ही प्रयोग होते हैं। साथ ही अगर दूसरा शव भी जलाना है तो भट्ठी के गरम होने के कारण उसमें गोबर के 30 किलोग्राम डंडों का ही इस्तेमाल होता है।
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डॉ. सुनील गुलाटी ने बताया कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट में हरित शवदाह गृह बनाने में केवल तीन लाख रुपये खर्च आता है, जिसमें तीन साल की गारंटी भी है। गोबर से डंडे व उपले बनाने की डी-वाटरिंग मशीन ढाई लाख रुपये तक स्थापित हो रही है। इससे अगरबत्ती व गमले भी बना सकते हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री को भी इस प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए पत्र लिख रहे हैं। चूंकि, हरियाणा में कैंपा फंड में 950 करोड़ रुपये हैं। इस फंड से पौधरोपण तो बड़े पैमाने पर हो नहीं रहा, हरित शवदाह गृह बनाकर पेड़ों को बचाया जा सकता है।    


पर्यावरण में मीथेन कम होगी, गंगा भी दूषित होने से बचेगी
डॉ. गुलाटी ने बताया कि हरित दाह संस्कार से पर्यावरण संरक्षित होगा। लकड़ी के बजाय गोबर के डंडों से शव जलाने पर अस्थियों में राख कम होगी, साथ ही मीथेन भी वातावरण में घटेगी। वायु प्रदूषण को कम किया जा सकेगा। लकड़ी से जलाए शव की अस्थियां गंगा में प्रवाहित करने से जल प्रदूषण होता है, उससे बचाव होगा। केंद्र सरकार को सौंपी रिपोर्ट में इसका विस्तृत अध्ययन है। उन्होंने बताया कि अगस्त महीने में इस प्रोजेक्ट पर दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस भी करने जा रहे हैं।

प्रोजेक्ट रिपोर्ट में दिए गए तर्क

  •  देश में 70 फीसदी शवों का अंतिम संस्कार लकड़ी से होता है
  • देश में 28 वृक्ष प्रति व्यक्ति हैं, जबकि अमेरिका में 716
  • देश में सालाना 90 लाख मृत्यु औसतन
  • 70 लाख शव जलाए जाते हैं, जिसमें 1.40 करोड़ पेड़ लगते हैं
  • हरित दाह संस्कार प्रोजेक्ट लागू होने पर ये पेड़ बचाए जा सकते हैं
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