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चंडीगढ़: स्मोक फ्री सिटी बनाने को बड़ा फैसला, पान-बीड़ी विक्रेता को लाइसेंस नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 16 Dec 2017 01:00 PM IST
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- फोटो : File Photo
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पान-बीड़ी, सिगरेट बेचने वालों को लाइसेंस नहीं मिलेगा। हालांकि अगर ऐसे वेंडर अपना ट्रेड बदलते हैं तो उनका रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। नगर निगम की टाउन वेंडिंग कमेटी ने यह निर्णय लिया है। शुक्रवार को वार्ड नंबर-16 के सेक्टर-20 की डिस्पेंसरी में वेंडर्स का रजिस्ट्रेशन हुआ। शनिवार और रविवार को रजिस्ट्रेशन नहीं होगा, जबकि सोमवार को सेक्टर-20 की डिस्पेंसरी में रजिस्ट्रेशन होगा।
नगर निगम सोमवार से ऐसे वेंडर्स को भी हटाने का अभियान शुरू कर रहा है जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है या फिर जो बिना सर्वे के वेंडर्स बैठे हुए हैं। पान- बीड़ी वालों को इसलिए लाइसेंस नहीं दिए जा रहे क्योंकि प्रशासन ने चंडीगढ़ को स्मोक फ्री सिटी घोषित किया है। जबकि स्मोक फ्री सिटी नाम का ही है, यहां खुले में जमकर धूम्रपान होता है। हालांकि एक्ट में पान-बीड़ी विक्रेताओं को लाइसेंस देने की कोई अलग से पाबंदी लगाने का जिक्र नहीं है। जबकि स्ट्रीट वेंडर एक्ट के बायलाज भी बन चुके है जिस पर टाउन वेंडिंग कमेटी के सुझाव मांगे गए है। यह बायलाज सदन में पास होने के बाद यह प्रशासन में पास होने के लिए जाएंगे।
मोहाली और पंचकूला के लिए बाद में होगा रजिस्ट्रेशन
इस समय सबसे ज्यादा मुश्किल में वे वेंडर्स हैं जो कई साल से चंडीगढ़ में काम करते हैं लेकिन वे जिला मोहाली और पंचकूला के निवासी हैं। उनके पास चंडीगढ़ का आधार कार्ड नहीं है। टाउन वेंडिंग कमेटी के सदस्य वीएन शर्मा का कहना है कि एक्ट के अनुसार कुल जनसंख्या का ढाई प्रतिशत वेंडर्स को लाइसेंस देना है।
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इस हिसाब से 25 हजार वेंडर्स बनते हैं, लेकिन सर्वे में 21 हजार ही आए है। इनमें से भी आधे ही रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं। ऐसे में अभी चंडीगढ़ के लोगों को ही रजिस्ट्रेशन करवाने में प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में जो काम शहर में करते हैं लेकिन उनके पास रेजिडेंशियल प्रूफ मोहाली और पंचकूला का है उनका रजिस्ट्रेशन बाद में किया जाएगा।
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नगर निगम सोमवार से ऐसे वेंडर्स को भी हटाने का अभियान शुरू कर रहा है जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है या फिर जो बिना सर्वे के वेंडर्स बैठे हुए हैं। पान- बीड़ी वालों को इसलिए लाइसेंस नहीं दिए जा रहे क्योंकि प्रशासन ने चंडीगढ़ को स्मोक फ्री सिटी घोषित किया है। जबकि स्मोक फ्री सिटी नाम का ही है, यहां खुले में जमकर धूम्रपान होता है। हालांकि एक्ट में पान-बीड़ी विक्रेताओं को लाइसेंस देने की कोई अलग से पाबंदी लगाने का जिक्र नहीं है। जबकि स्ट्रीट वेंडर एक्ट के बायलाज भी बन चुके है जिस पर टाउन वेंडिंग कमेटी के सुझाव मांगे गए है। यह बायलाज सदन में पास होने के बाद यह प्रशासन में पास होने के लिए जाएंगे।
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मोहाली और पंचकूला के लिए बाद में होगा रजिस्ट्रेशन
इस समय सबसे ज्यादा मुश्किल में वे वेंडर्स हैं जो कई साल से चंडीगढ़ में काम करते हैं लेकिन वे जिला मोहाली और पंचकूला के निवासी हैं। उनके पास चंडीगढ़ का आधार कार्ड नहीं है। टाउन वेंडिंग कमेटी के सदस्य वीएन शर्मा का कहना है कि एक्ट के अनुसार कुल जनसंख्या का ढाई प्रतिशत वेंडर्स को लाइसेंस देना है।
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इस हिसाब से 25 हजार वेंडर्स बनते हैं, लेकिन सर्वे में 21 हजार ही आए है। इनमें से भी आधे ही रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं। ऐसे में अभी चंडीगढ़ के लोगों को ही रजिस्ट्रेशन करवाने में प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में जो काम शहर में करते हैं लेकिन उनके पास रेजिडेंशियल प्रूफ मोहाली और पंचकूला का है उनका रजिस्ट्रेशन बाद में किया जाएगा।