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...और इस तरह मालविका पर मोहित हो गए राजा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 07 Feb 2014 01:43 AM IST
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मिनिस्टरी ऑफ कल्चर और गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एंड डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर हरियाणा द्वारा आयोजित सेलिब्रेटिंग नौटंकी के तीसरे दिन मालविकाग्निमत्रिम नौटंकी खेली गई।
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महान कवि कालीदास की प्रथम नाट्य कृति मालविकाग्निमत्रिम बाइस सो साल पुराने युग की कहानी है, जिसे निर्देशक अतुल यदुवंशी ने अपनी नौटंकी में बखूबी दिखाया।
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नौटंकी की शुरुआत गायत्री मंत्र से होती है, जिसमें सभी कलाकार स्टेज पर आकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते है, इसके बाद सूत्रधार बने तीन कलाकार कहानी के बारे में बताते है, जिसमें मालविका नाम की एक स्त्री, राजा अग्निमित्र के राजमहल में अपनी बूआ कौशिकी के साथ रहने आती है, जिसे महारानी धारिणी संगीत नृत्य सिखाने के लिए गुरु गणदास के पास भेज देती है।
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राजा की नजर जब मालविका पर पड़ती है तो वह उसे देख मंत्रमुग्ध हो जाता है और अपने मंत्री गौतम को एक योजना बनाने को कहता है जिसमें मालविका के पास आ जाए।
गौतम राज्य में एक प्रतिस्पर्धा करवाता है, जिसमें मालविका भी नाचती है हालांकि रानी मालविका इस प्रयास को असफल करने के बेहद प्रयास करती है, लेकिन राजा मालविका के प्रति और आकर्षित हो जाता है।
एक दिन बाग में राजा और मालविका को देख मालविका को कैद करवा देती है। लेकिन बाद में पर्दा खुलता है जब मालविका का परिचय होता है।
मालविका विदर्भ के राजा माधवसेन की बहन है, यह सुन रानी धारिणी, मालविका को गले लगा लेती है और राजा की शादी मालविका से करवा देती है। नौटंकी लगभग 1.30 घंटे लंबी थी। शुक्रवार को पंच परमेश्वर नौटंकी खेली जाएगी।