पंजाब चुनाव: सत्ता की चाबी दिलाएंगी ये स्पेशल 26 सीटें, पिछले चुनाव में 5000 से कम था हार-जीत का अंतर
पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 में कांग्रेस को 77 सीटें मिली थीं, जबकि आम आदमी पार्टी को 20 और शिरोमणि अकाली दल को 18 सीटें मिली थीं। वोट शेयर की बात की जाए तो पंजाब में कांग्रेस को 38.64 प्रतिशत वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर शिरोमणि अकाली दल था। उसे 30.74 प्रतिशत वोट मिले थे। आम आदमी पार्टी को 23.80 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे।
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विस्तार
पंजाब में वैसे तो सभी 117 विधानसभा सीटें राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनमें 26 ऐसी सीटें हैं जो नेताओं को पंजाब की सत्ता की चाबी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इसकी बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि इन सीटों पर 2017 के चुनाव में जीत का अंतर सिर्फ 5000 वोट से कम रहा है। सत्ता हासिल करने के लिए सभी राजनीतिक दल इन सीटों पर विशेष नजर रखे हुए हैं।
पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए 20 फरवरी को मतदान होने हैं। चुनाव के नतीजे 10 मार्च को घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव में कुल 1304 प्रत्याशी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस, आप, शिअद सहित भाजपा गठबंधन (पीएलसी, शिअद संयुक्त) सभी पंजाब की सत्ता हासिल करने के लिए जोड़तोड़ कर रहे हैं। सभी दल एक-एक सीट को जीतने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। इन सबके बीच एक बात महत्वपूर्ण है कि राज्य में 26 ऐसी सीटें हैं जो चुनाव की तस्वीर बदल देंगी।
2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में इन 26 सीटों पर हार जीत का अंतर 5000 वोट से भी कम था। अब 2022 में हो रहे चुनाव में सभी राजनीतिक दल इन सीटों पर नजर गड़ाए हुए हैं। इनमें पांच ऐसी सीटें थीं जिनमें जीत-हार का अंतर 5000 से कम था। पांच अन्य सीटें थीं जिनमें जीत का अंतर 3000 से 4000, चार सीटों पर जीत का अंतर 2000 से 3000 के बीच, नौ सीटों पर यह अंतर 1000 से 2000 के बीच में था। तीन ऐसी सीटें थीं जिनमें जीत का अंतर 1000 वोट से भी कम था। कम वोटों के अंतर के कारण सभी राजनीतिक दल इन सीटों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर कार्य कर रहे हैं।
ये हैं स्पेशल 26 सीटें
पंजाब की जो 26 स्पेशल सीटें हैं उनमें फाजिल्का, भुच्चो मंडी, बटाला, डेरा बाबा नानक, लुधियाना पूर्व, मोगा, फतेहगढ़ चूड़ियां, बंगा (एससी), डेराबस्सी, बुढ़लाडा, दिरबा, गढ़शंकर, फगवाड़ा, खरड़, बरनाला, धूरी, अबोहर, फिल्लौर, नवांशहर, शाम चौरासी, अमलोह, साहनेवाल, सनौर, शाहकोट, दाखा, मलौट सीट शामिल हैं।
किस सीट पर कितना रहा अंतर
2017 में फाजिल्का, भुच्चो मंडी और बटाला में 1000 वोटों से जीत हार तय हुई थी। 9 सीटें ऐसी थीं जिनमें 1000 से 2000 का अंतर था। उनमें डेरा बाबा नानक, लुधियाना पूर्व, मोगा और फतेहगढ़ चूड़ियां, बंगा (एससी), डेराबस्सी, बुढलाडा, दिड़बा, गढ़शंकर सीट शामिल हैं। 2000 से 3000 के अंतर वाली सीट में चार शामिल हैं। इन सीटों में फगवाड़ा, खरड़, बरनाला, धूरी शामिल हैं। पांच में यह अंतर 3000 से 4000 के बीच था। इनमें अबोहर, फिल्लौर, नवांशहर ,शाम चौरासी, अमलोह हैं। इसके अलावा अन्य पांच सीटों में 4000 से 5000 के बीच अंतर था। इनमें साहनेवाल, सनौर, शाहकोट, दाखा और मलोट सीट शामिल हैं।
किस दल की क्या रणनीति
कांग्रेस: 2017 में कांग्रेस ने इन 26 सीटों में 11 पर जीत दर्ज की थी। इस बार के चुनाव में पार्टी ने विशेष रणनीति बनाकर प्रत्याशी उतारे हैं। कुछ सीटों पर प्रत्याशियों के चेहरे भी बदले गए हैं। इसमें मोगा सीट शामिल है।
शिअद (गठबंधन): पिछले चुनाव में शिअद ने स्पेशल 26 में 7 सीटों पर विजय हासिल की थी। इस बार शिअद प्रधान सुखबीर बादल स्वयं चुनाव की कमान संभाले हैं। वह ऐसी सीटों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।
आप: 2017 में आप ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी। आप के लिए यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि आप संयोजक अरविंद केजरीवाल स्वयं ही पंजाब की इन सीटों पर नजर बनाए हुए हैं।
भाजपा (गठबंधन): 2 सीटों पर भाजपा को विजय हासिल हुई थी। इस बार चुनाव में भाजपा अपने गठबंधन के साथी पीएलसी और शिअद संयुक्त के साथ चुनाव मैदान में है। इन सीटों पर केंद्रीय मंत्री ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं।