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'बेईमानी' में झलका बेईमान बने इंसान का दर्द
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 01 May 2014 01:13 AM IST
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पंजाब कला भवन में आईसी नंदा के लिखित नाटक 'बेईमान' का मंचन किया गया। सिएस सिंदरा को समर्पित लघु नाटक उत्सव के तहत हुए इस नाटक का निर्देशन अभिषेक शर्मा ने किया।
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नाटक की शुरुआत एक गैराज से होती है, जहां एक व्यक्ति गैराज के मालिक पर चिल्ला रहा है। कारण उसकी गाड़ी के स्पेयर पार्ट बहुत महंगे लगाए दिए गए हैं। गाड़ी का मालिक वहां से गाड़ी ठीक न करने को कहता ही है।
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इसी बीच गैराज में ही काम करने वाला एक युवक बसंत सिंह उसे कहता है कि वह उनकी गाड़ी में वैसे ही पार्ट्स लगवा देगा वो भी कम कीमत पर, पर इसकी खबर किसी को न लगे। गाड़ी का मालिक मान जाता है, लेकिन उसे ख्याल आता है कि कहीं वो उससे पैसे तो नहीं ठगना चाहता।
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गाड़ी का मालिक गैराज के मैनेजर से इस बारे में बात करता है। मैनेजर बसंत को बुलाकर उसे बेईमान कहता है। इस पर बसंत कहता है कि हां वह बेईमान है। उसकी बीवी और बच्चे बीमार हैं जिस वजह से उसकी कमाई से उनका खर्चा नहीं चल पा रहा। बसंत अपने मालिक को कहता है कि थोड़े दिनों पहले वह उनके पास एडवांस मांगने आया था तब उन्होंने उसकी मदद नहीं की।
नाटक में मोड़ तब आता है जब पता चलता है कि कंपनी का मैनेजर भी गाड़ियों के इंश्योरेंस में घोटाले करता है और अंत में पुलिस आती है और गाड़ी के मालिक पर इलजाम लगाती है कि उनके पास जो गाड़ी और पैसा है उसका टैक्स उन्होंने नहीं भरा।
अंत में बसंत कहता है कि उसकी मजबूरी में हुई बेईमानी, बेईमानी है। लेकिन, यह लोग जिनके पास सब कुछ है और फिर भी बेईमानी करते हैं, वह बेईमानी नहीं गलती मानी जाती है ऐसा क्यों। नाटक में सन्नी गिल, दलजीत सिंह, आशीष शर्मा, गगनप्रीत कौर, कपिल, बालोचन मलिक और दारापुरी ने अभिनय किया।