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कोरोना के साथ मंडराने लगा मंकी पॉक्स का खतरा, सावधान रहें
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चंडीगढ़। कोरोना के साथ ही मंकीपॉक्स नामक संक्रमण का खतरा भी मंडराने लगा है। कोरोना के बढ़ते मामले के बीच एक नए संक्रमण के खतरे ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे लेकर अस्पतालों में तैयारी रखने का निर्देश दिया है। वहीं लक्षणों के प्रति लोगों को जागरूक करने का भी प्रयास किया जाने लगा है। गौरतलब है कि अफ्रीकी लोगों में फैलने वाली बीमारी मौजूदा समय में विश्व के 11 देशों में 80 से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले चुकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक मंकीपॉक्स के शुरुआती लक्षण भी वायरल की तरह ही होते हैं। इसमें बुखार, पीठ और सिर में दर्द होता है। संक्रमण के 2 से 3 दिन के बाद शरीर पर दाने निकल आते हैं।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट के अंतरराष्ट्रीय फेलो तथा नेशनल स्किन हॉस्पिटल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विकास शर्मा ने बताया कि इस संक्रमण को लेकर विश्व में व्यापक स्तर पर चर्चा होने लगी है, क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि कोरोना संक्रमण जिस तरह चमगादड़ से फैला था उसी तरह मंकीपॉक्स का संक्रमण भी अनदेखी बरतने पर तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले सकता है। ऐसे में बचाव को लेकर सजग रहने की सलाह दी जा रही है।
डॉ. विकास ने बताया कि इसकी शुरुआत बुखार से होती है और फिर कमजोरी आने लगती है। शरीर में दाने निकलने लगते हैं। दाने कुछ समय बाद बड़े हो जाते हैं और धीरे-धीरे सूखने लगते हैं। कुछ दानों में मवाद या कुछ तरल पदार्थ भी निकल सकता है। मंकीपॉक्स होने पर गर्दन के आसपास गांठें भी बन जाती हैं लेकिन यह कोरोना की तुलना में कम संक्रामक होता है और इसमें जान जाने का खतरा भी कोरोना की तुलना में कम है। यह खांसने और छीकने से नहीं फैलता। यह संक्रमित व्यक्ति की त्वचा के संपर्क से फैलता है इसलिए उसके कपड़े और बर्तन के संपर्क में आने से बचना चाहिए।
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इसका रखें खास ध्यान
मंकीपॉक्स के संक्रमण से बचने के लिए जरूरी है कि जानवरों के संपर्क में आने से बचा जाए, क्योंकि संक्रमित जानवर ने किसी व्यक्ति को काट लिया या नाखून से खरोंच दिया तो वह व्यक्ति संक्रमण की चपेट में आ जाएगा। डॉ. विकास का कहना है कि इस समय जानवरों को छूने खासतौर से बंदर से दूरी बनाए। वहीं अगर किसी व्यक्ति को तेज बुखार, पीठ और गर्दन में दर्द हो और शरीर पर दाने आ रहे हो तो बिना समय गवाएं डॉक्टर की सलाह लें।
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अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट के अंतरराष्ट्रीय फेलो तथा नेशनल स्किन हॉस्पिटल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विकास शर्मा ने बताया कि इस संक्रमण को लेकर विश्व में व्यापक स्तर पर चर्चा होने लगी है, क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि कोरोना संक्रमण जिस तरह चमगादड़ से फैला था उसी तरह मंकीपॉक्स का संक्रमण भी अनदेखी बरतने पर तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले सकता है। ऐसे में बचाव को लेकर सजग रहने की सलाह दी जा रही है।
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डॉ. विकास ने बताया कि इसकी शुरुआत बुखार से होती है और फिर कमजोरी आने लगती है। शरीर में दाने निकलने लगते हैं। दाने कुछ समय बाद बड़े हो जाते हैं और धीरे-धीरे सूखने लगते हैं। कुछ दानों में मवाद या कुछ तरल पदार्थ भी निकल सकता है। मंकीपॉक्स होने पर गर्दन के आसपास गांठें भी बन जाती हैं लेकिन यह कोरोना की तुलना में कम संक्रामक होता है और इसमें जान जाने का खतरा भी कोरोना की तुलना में कम है। यह खांसने और छीकने से नहीं फैलता। यह संक्रमित व्यक्ति की त्वचा के संपर्क से फैलता है इसलिए उसके कपड़े और बर्तन के संपर्क में आने से बचना चाहिए।
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इसका रखें खास ध्यान
मंकीपॉक्स के संक्रमण से बचने के लिए जरूरी है कि जानवरों के संपर्क में आने से बचा जाए, क्योंकि संक्रमित जानवर ने किसी व्यक्ति को काट लिया या नाखून से खरोंच दिया तो वह व्यक्ति संक्रमण की चपेट में आ जाएगा। डॉ. विकास का कहना है कि इस समय जानवरों को छूने खासतौर से बंदर से दूरी बनाए। वहीं अगर किसी व्यक्ति को तेज बुखार, पीठ और गर्दन में दर्द हो और शरीर पर दाने आ रहे हो तो बिना समय गवाएं डॉक्टर की सलाह लें।