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टैगोर थिएटर में कोमल गांधार नाटक के जरिए दिखाया अहंकार का परिणाम
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चंडीगढ़। सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर के मिनी ऑडिटोरियम में संवाद थिएटर ग्रुप ने नाटक कोमल गंधार का मंचन किया। दो दिवसीय नाट्य महोत्सव का रविवार को दूसरा दिन था। इस दौरान हॉल में महाभारतकालीन दृश्य तैयार किया गया। गांधारी के विवाह से लेकर उनकी पीड़ा और भीष्म पितामह के परिवार के सदस्यों में उत्पन्न हुए अहंकार के कारण खत्म हुए परिवार की दास्तां को मंच पर उतारा गया।
डॉ. शंकर शेष के लिखे इस नाटक का यशपाल ने निर्देशन किया। संवाद थिएटर ग्रुप के कलाकारों ने नाटक में दिखाया गया कि महाभारत का युद्ध होने का एक कारण पांडव और कौरवों के आपसी मतभेद थे, लेकिन इसका एक कारण गांधारी की शादी भी थी। गांधारी को जब पता चलता है कि उनकी शादी अंधे धृतराष्ट्र से करा दी गई है तो वह काफी दुखी और क्रोधित हो जाती हैं। आखिर में वह अपनी आंखों पर पट्टी बांध लेती हैं।
मां-बाप के अंधे होने के कारण कौरव गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं। वहीं इन कौरवों को बिगाड़ने में मामा शकुनि का भी खास हाथ रहा। वे हमेशा कौरवों को पांडवों की प्रति उकसाते रहते थे। यह नाटक गांधारी के इर्द गिर्द घूमता रहता है।
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इन कलाकारों ने दिया योगदान :
नाटक में गुरु और मार्गदर्शक के रूप में मुकेश शर्मा, गांधारी के रूप में शुभ्रा, धृतराष्ट्र के रूप में संजय कुमार, प्रौढ़ अवस्था गांधारी के रूप में रजनी बजाज, संजय के रूप में अरविंद शर्मा, भीष्म के रूप में ज्योति भारद्वाज, शकुनि के रूप में साजन शर्मा, दुर्योधन के रूप में गौतम ने भूमिका निभाई। वहीं अन्य किरदारों में अनुष्का तिवारी, वेद प्रकाश, दृष्टि आजाद, करीना, विकास नेगी, वंश और उदय पराशर ने अपनी भूमिकाओं को पूर्णता के साथ निभाया।
उदय पराशर ने संगीत, कमल भारद्वाज ने लाइट, हंसराज और विकास नेगी ने सेट सज्जा, साजन शर्मा व संजय कुमार ने मेकअप, आकांक्षा शर्मा ने पोशाक प्रबंधन और अरविंद शर्मा ने प्रोडक्शन हेड के रूप में योगदान दिया।
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डॉ. शंकर शेष के लिखे इस नाटक का यशपाल ने निर्देशन किया। संवाद थिएटर ग्रुप के कलाकारों ने नाटक में दिखाया गया कि महाभारत का युद्ध होने का एक कारण पांडव और कौरवों के आपसी मतभेद थे, लेकिन इसका एक कारण गांधारी की शादी भी थी। गांधारी को जब पता चलता है कि उनकी शादी अंधे धृतराष्ट्र से करा दी गई है तो वह काफी दुखी और क्रोधित हो जाती हैं। आखिर में वह अपनी आंखों पर पट्टी बांध लेती हैं।
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मां-बाप के अंधे होने के कारण कौरव गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं। वहीं इन कौरवों को बिगाड़ने में मामा शकुनि का भी खास हाथ रहा। वे हमेशा कौरवों को पांडवों की प्रति उकसाते रहते थे। यह नाटक गांधारी के इर्द गिर्द घूमता रहता है।
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इन कलाकारों ने दिया योगदान :
नाटक में गुरु और मार्गदर्शक के रूप में मुकेश शर्मा, गांधारी के रूप में शुभ्रा, धृतराष्ट्र के रूप में संजय कुमार, प्रौढ़ अवस्था गांधारी के रूप में रजनी बजाज, संजय के रूप में अरविंद शर्मा, भीष्म के रूप में ज्योति भारद्वाज, शकुनि के रूप में साजन शर्मा, दुर्योधन के रूप में गौतम ने भूमिका निभाई। वहीं अन्य किरदारों में अनुष्का तिवारी, वेद प्रकाश, दृष्टि आजाद, करीना, विकास नेगी, वंश और उदय पराशर ने अपनी भूमिकाओं को पूर्णता के साथ निभाया।
उदय पराशर ने संगीत, कमल भारद्वाज ने लाइट, हंसराज और विकास नेगी ने सेट सज्जा, साजन शर्मा व संजय कुमार ने मेकअप, आकांक्षा शर्मा ने पोशाक प्रबंधन और अरविंद शर्मा ने प्रोडक्शन हेड के रूप में योगदान दिया।