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मोबाइल टावरों पर डीसी से मांगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो, पंचकूला
Updated Fri, 31 Jan 2014 11:55 PM IST
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शहर में अवैध तरीके से मोबाइल टावर लगाने के आदेश किनके इशारों पर और क्यों दिए गए? इस पर स्थानीय निकाय विभाग की ओर से उपायुक्त डा. एसएस फुलिया से रिपोर्ट मांगी गई है।
अवैध तरीके से मोबाइल टावर लगाने के आदेश मिलने के बाद पिछले करीब 20 दिनों से विरोध के स्वर उठ रहे हैं। नगर निगम और हुडा के बीच के इस खेल के बाद अब राजनीतिक पार्टियां भी पावर गेम में जुट गई हैं।
मोबाइल टावर लगाए जाने के संबंध में नए बायलॉज में कई बदलाव किए गए हैं, लेकिन इन्हें लगाने में नगर निगम और हुडा की तरफ से अनदेखी का खुलासा उस वक्त हुआ जब एक निजी कंपनी के 33 टावर लगाने की बात सामने आई।
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खासकर, पार्कों में टावर लगाए जाने का जोरशोर से विरोध शुरू हुआ, जो अब तक जारी है।
इधर, विधायक ने कहा-जनता का हित सबसे ऊपर
विधायक डीके बंसल ने कहा है कि मोबाइल टावर के मसले पर लोगों के विचार लेकर ही अगला निर्णय लिया जाएगा, क्योंकि जनता का हित सबसे पहले है।
सेक्टर-12 ए स्थित अपने आवास पर शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए बंसल ने कहा कि मोबाइल टावरों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से सर्वे किया गया है।
जहां टावर लगा होता है वहां से ये एक किलोमीटर के क्षेत्र तक लोगों और पशुओं पर कुप्रभाव डालता है। इससे कैंसर तक की बीमारी हो सकती है। साथ ही गर्भवती महिलाओं पर भी इसका बुरा असर पड़ता है।
इस प्रकार के टावर पहाड़ी इलाके और किसी ऐसी जगह लगाया जाना चाहिए, जिसका आम जनता पर सीधा असर न पड़े।
बंसल ने कहा कि उन्होंने स्वयं हुडा के मुख्य प्रशासक ,उपायुक्त व नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी सहित संबंधित पुलिस थानों में कहा है कि टावर का कार्य शुरू होने से रोका जाए।
उधर, सेक्टर-12 के बीआर गोयल, सेक्टर 16 के एसके बोहरा, सेक्टर 21 के राकेश के. छावड़ा, सेक्टर चार के बीएस ऋषि, मनोज अग्रवाल, चैंबर आफ कामर्स की ओर से दीपक शर्मा, सेक्टर-12 के प्रधान रविंद्र, सुलक्षणा व प्रदीप ने भी टावर लगाने का विरोध किया।
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अवैध तरीके से मोबाइल टावर लगाने के आदेश मिलने के बाद पिछले करीब 20 दिनों से विरोध के स्वर उठ रहे हैं। नगर निगम और हुडा के बीच के इस खेल के बाद अब राजनीतिक पार्टियां भी पावर गेम में जुट गई हैं।
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मोबाइल टावर लगाए जाने के संबंध में नए बायलॉज में कई बदलाव किए गए हैं, लेकिन इन्हें लगाने में नगर निगम और हुडा की तरफ से अनदेखी का खुलासा उस वक्त हुआ जब एक निजी कंपनी के 33 टावर लगाने की बात सामने आई।
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खासकर, पार्कों में टावर लगाए जाने का जोरशोर से विरोध शुरू हुआ, जो अब तक जारी है।
इधर, विधायक ने कहा-जनता का हित सबसे ऊपर
विधायक डीके बंसल ने कहा है कि मोबाइल टावर के मसले पर लोगों के विचार लेकर ही अगला निर्णय लिया जाएगा, क्योंकि जनता का हित सबसे पहले है।
सेक्टर-12 ए स्थित अपने आवास पर शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए बंसल ने कहा कि मोबाइल टावरों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से सर्वे किया गया है।
जहां टावर लगा होता है वहां से ये एक किलोमीटर के क्षेत्र तक लोगों और पशुओं पर कुप्रभाव डालता है। इससे कैंसर तक की बीमारी हो सकती है। साथ ही गर्भवती महिलाओं पर भी इसका बुरा असर पड़ता है।
इस प्रकार के टावर पहाड़ी इलाके और किसी ऐसी जगह लगाया जाना चाहिए, जिसका आम जनता पर सीधा असर न पड़े।
बंसल ने कहा कि उन्होंने स्वयं हुडा के मुख्य प्रशासक ,उपायुक्त व नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी सहित संबंधित पुलिस थानों में कहा है कि टावर का कार्य शुरू होने से रोका जाए।
उधर, सेक्टर-12 के बीआर गोयल, सेक्टर 16 के एसके बोहरा, सेक्टर 21 के राकेश के. छावड़ा, सेक्टर चार के बीएस ऋषि, मनोज अग्रवाल, चैंबर आफ कामर्स की ओर से दीपक शर्मा, सेक्टर-12 के प्रधान रविंद्र, सुलक्षणा व प्रदीप ने भी टावर लगाने का विरोध किया।