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गुम हुए पावन स्वरूप का मामला: SGPC की दो टूक-श्री अकाल तख्त का आदेश अंतिम, किसी को रिकॉर्ड नहीं देंगे
Tue, 06 Jan 2026 07:53 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 06 Jan 2026 07:53 PM IST
सार
प्रताप सिंह ने बताया कि पावन स्वरूपों को निजी स्वार्थ के लिए उपयोग करने और रिकॉर्ड में हेराफेरी करने पर कर्मचारी कंवलजीत सिंह, बाज सिंह और दलबीर सिंह दोषी पाए गए। उनकी लापरवाही और लालच से संस्था की छवि धूमिल हुई।
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अमृतसर के एसजीपीसी कार्यालय में होती एसजीपीसी की बैठक।
- फोटो : संवाद
विस्तार
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने स्पष्ट किया है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन सरूपों से जुड़े मामले में श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश अंतिम हैं। एसजीपीसी किसी भी स्तर पर पुलिस प्रशासन या सरकार को सहयोग नहीं देगी और न ही कोई रिकॉर्ड उपलब्ध करवाया जाएगा।
एसजीपीसी सचिव प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि जिन कर्मचारियों पर आरोप थे उनके खिलाफ अकाल तख्त साहिब की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई पूरी हो चुकी है। ऐसे में किसी अन्य एजेंसी के सहयोग देना अकाल तख्त साहिब के आदेशों के विरुद्ध होगा।
प्रताप सिंह ने बताया कि पावन स्वरूपों को निजी स्वार्थ के लिए उपयोग करने और रिकॉर्ड में हेराफेरी करने पर कर्मचारी कंवलजीत सिंह, बाज सिंह और दलबीर सिंह दोषी पाए गए। उनकी लापरवाही और लालच से संस्था की छवि धूमिल हुई। एसजीपीसी के नियमों के अनुसार पावन सरूप केवल तय प्रक्रिया के तहत ही दिए जाते हैं, जिसमें प्रचारक की रिपोर्ट, एसजीपीसी सदस्य की सिफारिश और सचिव स्तर की स्वीकृति शामिल होती है।
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उन्होंने कहा कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को प्रशासनिक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा। आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा दिए गए बयानों को निराधार बताते हुए प्रताप सिंह ने कहा कि यह सिख संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश है।
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एसजीपीसी सचिव प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि जिन कर्मचारियों पर आरोप थे उनके खिलाफ अकाल तख्त साहिब की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई पूरी हो चुकी है। ऐसे में किसी अन्य एजेंसी के सहयोग देना अकाल तख्त साहिब के आदेशों के विरुद्ध होगा।
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प्रताप सिंह ने बताया कि पावन स्वरूपों को निजी स्वार्थ के लिए उपयोग करने और रिकॉर्ड में हेराफेरी करने पर कर्मचारी कंवलजीत सिंह, बाज सिंह और दलबीर सिंह दोषी पाए गए। उनकी लापरवाही और लालच से संस्था की छवि धूमिल हुई। एसजीपीसी के नियमों के अनुसार पावन सरूप केवल तय प्रक्रिया के तहत ही दिए जाते हैं, जिसमें प्रचारक की रिपोर्ट, एसजीपीसी सदस्य की सिफारिश और सचिव स्तर की स्वीकृति शामिल होती है।
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उन्होंने कहा कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को प्रशासनिक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा। आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा दिए गए बयानों को निराधार बताते हुए प्रताप सिंह ने कहा कि यह सिख संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश है।