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Chandigarh News: नेता प्रतिपक्ष ने स्पीकर को विधानसभा के विशेष सत्र का समय बढ़ाने को लेकर पत्र लिखा

Tue, 08 Jul 2025 10:33 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 08 Jul 2025 10:33 PM IST
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The Leader of the Opposition wrote a letter to the Speaker to extend the time of the special session of the Assembly
अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को पत्र लिखकर विशेष सत्र का समय बढ़ाने की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष ने स्पीकर से राज्य में लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था और लैंड पूलिंग पॉलिसी पर विस्तार से विशेष सत्र में चर्चा के लिए समय बढ़ाने को लेकर पत्र लिखा है।
मान सरकार ने 10 और 11 जुलाई को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। इसमें मान सरकार बेअदबी को लेकर कानून लेकर आएगी। बेअदबी पर सरकार अलग कानून बनाने का विशेष प्रस्ताव पेश करेगी। बाजवा ने कहा कि इन मुद्दों के महत्व और तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए विशेष सत्र को कम से कम दो दिन के लिए बढ़ाने पर विचार करें ताकि उचित विचार-विमर्श सुनिश्चित किया जा सके और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी की भावना को बनाए रखा जा सके।
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बाजवा ने स्पीकर को जो पत्र लिखा है, उसमें प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में दिनदहाड़े लोगों की हत्या, डकैती, गैंगवार और जबरन वसूली के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने पत्र के जरिये स्पीकर से आग्रह किया है कि राज्य में लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कारोबारी, व्यापारी, नेता और नामचीन लोगों को जिस कदर निशाना बनाया जा रहा है, इस पर विशेष सत्र में इस अहम मुद्दे पर चर्चा करने की मांग की है।
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इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष ने लैंड पूलिंग पॉलिसी को लेकर अपने पत्र में जिक्र किया है। बाजवा ने कहा कि राज्य सरकार की लैंड पूलिंग नीति समान विकास के साधन के रूप में कम और एक सुनियोजित धारणा-निर्माण अभ्यास के रूप में अधिक दिखाई देती है। भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के प्रावधानों को दरकिनार करके, यह मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार द्वारा पारित भूमि मालिकों के कानूनी रूप से निहित अधिकारों को कमजोर करता है।

शहरी परिवर्तन की इसकी बयानबाजी के नीचे पंजाब के कृषक समुदायों के बीच एक बढ़ती बेचैनी है, जो इस पहल को अपने खर्च पर बड़े पैमाने पर संसाधन हासिल करने के लिए एक तंत्र के रूप में देखते हैं।
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