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Chandigarh News: चुनावी माहौल में फिर गरमाया हरियाणा की अलग राजधानी और हाईकोर्ट का मुद्दा

Fri, 19 Apr 2024 04:35 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Apr 2024 04:35 AM IST
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The issue of Haryana's separate capital and High Court heated up again in the election environment
-हाईकोर्ट के पूर्व जज नवाब सिंह सहित कई पूर्व अधिकारियों ने खोला मोर्चा
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-वर्षों से लंबित है यह मामला, लोकसभा चुनाव से पहले पार्टियों पर बनाएंगे दबाव

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। कई वर्षों से लंबित हरियाणा की अलग राजधानी व हाईकोर्ट का मुद्दा लोकसभा चुनावों से पहले फिर गर्माने लगा है। इन मुद्दों को लेकर हाईकोर्ट के पूर्व जज नवाब सिंह सहित बहुत से पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों ने मोर्चा खोल दिया है और सभी राजनीतिक दलों पर इन मुद्दों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। हरियाणा बनाओ अभियान के संयोजक और पंजाब एंड हरियाणा बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष रणधीर सिंह बधरान की अगुवाई में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने अपना पक्ष मीडिया के समक्ष रखा। मुख्यमंत्री के पूर्व ओएसडी महिंदर सिंह चोपड़ा ने बताया कि हरियाणा के लिए अलग राजधानी और अलग उच्च न्यायालय क्यों जरूरी है। रणधीर सिंह बधरान, पूर्व मुख्य सचिव एससी चौधरी, पूर्व वाइस चांसलर राधे श्याम शर्मा, मुख्यमंत्री के पूर्व ओएसडी एमएस चोपड़ा ने कहा कि भले ही वे अलग राजधानी और अलग हाईकोर्ट की मांग कर रहे हैं, लेकिन चंडीगढ़ पर हरियाणा का हक नहीं छोड़ा जाएगा। हरियाणा देश का एकमात्र राज्य है जिसकी अपनी राजधानी नहीं है।जस्टिस नवाब सिंह ने कहा कि रेलवे स्टेशन पंचकूला में बना है, लेकिन दुनिया के नक्शे पर इसे चंडीगढ़ का रेलवे स्टेशन कहा जाता है। इसी तरह एयरपोर्ट में हरियाणा का योगदान भी है, लेकिन इसे मोहाली का एयरपोर्ट कहा जाता है।


हरियाणा को अलग उच्च न्यायालय की आवश्यकता

केंद्र सरकार में उप सचिव रहे महेंद्र सिंह चोपड़ा ने कहा कि वर्ष 1966 में ही हिमाचल प्रदेश का गठन हुआ था, परंतु उसकी अपनी अलग राजधानी और उच्च न्यायालय है जबकि हरियाणा का नहीं। सेवा का अधिकार आयोग के पूर्व आयुक्त सुनील कत्याल ने बताया कि रिकार्ड के अनुसार हरियाणा के 14 लाख से अधिक मामले सेशन कोर्ट और अधीनस्थ न्यायालयों के समक्ष लंबित हैं। इसी तरह करीब 6.2 लाख से अधिक मामले उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित हैं। इसके अलावा लाखों मामले अन्य आयोगों, न्यायाधिकरणों और अन्य प्राधिकरणों के समक्ष लंबित हैं। कोर्ट केसों के त्वरित निर्णय के लिए हरियाणा और पंजाब दोनों राज्यों को अलग-अलग उच्च न्यायालय की आवश्यकता है।
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