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गर्मी ने फिर दिखाए तेवर, खुले में बिक रहे पेय पदार्थों से बना लें दूरी, हो सकता है टायफाइड

Thu, 02 Jun 2022 02:27 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 02 Jun 2022 02:27 AM IST
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The heat has shown again, keep distance from the drinks sold in the open, may be typhoid
चंडीगढ़। चंद दिनों की राहत के बाद एक बार फिर गर्मी के तेवर तेज हो गए हैं। ऐसे में लोग प्यास बुझाने के लिए गोलगप्पे, लस्सी और अन्य ठंडे पेय पदार्थों का धड़ल्ले से सेवन कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खुले में बिक रहे पेय पदार्थों से दूरी बनाना जरूरी है, इनके सेवन से टायफाइड हो सकता है। जीएमएसएच-16 की ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि खुले में बिक रहे गोलगप्पे, लस्सी, दही, गोलगप्पे और ऐसे ही पानी वाले पदार्थों का सेवन न करें, क्योंकि इसमें प्रयोग किए गए पानी के दूषित होने की आशंका ज्यादा होती है।
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जीएमएसएच-16 की फिजीशियन डॉ. कुलविंदर कौर का कहना है कि घर से बाहर जाने वाले बच्चों में दूषित पानी के सेवन से पेट संबंधी बीमारी तेजी से बढ़ रही है इसलिए बासी भोजन के साथ ही खुले में बिक रहे पेय पदार्थों से भी दूरी बनाना जरूरी है, क्योंकि गोलगप्पे, लस्सी, ठंडे पेय पदार्थों की दुकानों पर दूषित पानी के प्रयोग कर खतरा ज्यादा होता है। उसके सेवन से टायफाइड का खतरा बढ़ जाता है इसलिए घर का बना भोजन कीजिए। ज्यादा से ज्यादा पानी का सेवन कीजिए।
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इनसेट-
टायफाइड में ये लक्षण हैं आम
उल्टियां आना और जी मिचलाना, भूख न लगना, कमजोरी आना, स्किन पर रैशेज होना, नाक से खून निकलना, पेट दर्द होना, सिर दर्द, सर्दी खांसी होना।
इनसेट-
टायफाइड से बचना है तो इसका रखें ध्यान
- बाहर का खाना खाने से बचें, सब्जियों को अच्छी तरह उबले हुए पानी में धोकर बनाएं
- इस मौसम में पीने के पानी पर विशेष ध्यान दें। उबला हुआ पानी ही प्रयोग करें।
-मसालेदार और तला-भुना खाना न खाएं।
-पौष्टिक एवं सुपाच्य आहार लें।
-बासी भोजन बिल्कुल न करें।
-खानपान में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
-रोजाना तीन से चार लीटर पानी पिएं।
-मौसमी फलों और सब्जियों का सेवन करें।
-कटे फल और खुले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
कोट-
प्यास लगने पर बच्चे कोई भी पानी पी लेते हैं। कई जगहों पर पानी पीने योग्य नहीं होता इसलिए घर से बाहर जाने पर बच्चों को पानी का बोतल जरूर दें। उन्हें बाहर की चीजें खाने-पीने से होने वाले नुकसान के बारे में बताएं क्योंकि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता व्यस्कों से कम होती है और वे संक्रमण की चपेट में आसानी से आ जाते हैं।
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-डॉ. सद्भावना, बालरोग विशेषज्ञ जीएमएसएच-16
गर्मी को मात देने के लिए इन उपायों को भी आजमाएं
अगर चिलचिलाती धूप और गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचना है तो जौ के सत्तू का घोल पिएं। ये आपकी भूख मिटाने के साथ ही आपको स्फूर्ति देने और डिहाइड्रेशन से बचाने का काम करेगी। बस दो से तीन घंटे के अंतराल में दो चम्मच जौ का सत्तू एक ग्लास पानी में घोलकर उसमें काली मिर्च पाउडर और काला नमक मिलाकर पी लें। यह कहना है आयुर्वेदाचार्य धन्वंतरि आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पूर्व प्रोफेसर व क्लीनिकल रिसर्च देशभगत आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज अमलोह मंडी के निदेशक डॉ. सत्यदेव पांडे का।
उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव के दौरान सेहत को लेकर सचेत रहने की जरूरत है। इससे शरीर का तापमान प्रभावित होता है जो विभिन्न बीमारियों का कारण बनता है। डॉ. सत्यदेव के अनुसार जौ का सत्तू चने के सत्तू के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद है क्योंकि ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने के कारण इसे मधुमेह पीड़ित भी ले सकते हैं। वहीं यह जल्दी पचता है और जल्दी जल्दी भूख नहीं लगती इसलिए गर्मी में जो समय पर भोजन नहीं कर पाते वे अपने साथ जौ का सत्तू रखें। दिनभर में दो से तीन बार लें।
बॉक्स
मसालों को ज्यादा भुनना होगा नुकसानदेह
मसालों को ज्यादा भुनकर सब्जी बनाने की आदत छोड़ दीजिए। डॉ. सत्यदेव का कहना है कि मसालों को ज्यादा भुनकर बनाए गए भोजन के सेवन से पेट संबंधी बीमारी तेजी से उत्पन्न होती है इसलिए प्रयास होना चाहिए कि गर्मी में तरोई, करैला, लौकी जैसे पानी में पकाने वाली सब्जियों का सेवन करें। हल्के तेल में सब्जियों को डालने के बाद उसमें मसाला डालकर पानी डालें और पकाएं। ऐसा भोजन आसानी से पचता है। कम भूने हुए मसालों की गुणवत्ता बरकरार रहती है। वहीं प्याज और लहसून को सब्जी में काटकर डालने की बजाय साबुत डालकर पकाएं। स्वाद के साथ सेहत भी मिलेगा। डॉ. सत्यदेव का कहना है कि गर्मी के दिनों में दूध में बर्फ डालकर पीना नुकसानदेह साबित हो सकता है इसलिए प्रयास हो कि रात को सोने से पहले गुनगुने या गर्म दूध का सेवन करें।

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नहाते समय इसका रखें ख्याल
गर्मी के दिन में सिर पर अचानक ठंडा पानी डालने की गलती न करें। नहाते समय सिर पर पानी डालने की बजाय पैरों पर पानी डालकर नहाना शुरू करें। डॉ. सत्यदेव ने बताया कि सिर पर ठंडा पानी डालने से खून का संचार प्रभावित होता है क्योंकि अचानक पानी के संपर्क में आने से सिर की कोशिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है इसलिए पहले पैर पर पानी डालें ताकि शरीर में रक्त संचार सामान्य हो जाए फिर सिर पर पानी डालकर नहाएं।
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