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Chandigarh News: हलवारा से जुड़ा है मिग-21 का गौरवशाली इतिहास

Wed, 24 Sep 2025 08:21 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 24 Sep 2025 08:21 PM IST
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The glorious history of the MiG-21 is closely linked to Halwara.
-26 सितंबर को चंडीगढ़ से होगा रिटायर, तेजस लेगा जगह
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कंवरपाल
हलवारा। भारतीय वायुसेना का गौरवशाली इतिहास अपने कई अध्यायों में मिग लड़ाकू विमानों से भरा पड़ा है। दशकों तक देश की सरहद का प्रहरी बने इन जेट विमानों ने पाकिस्तान को हर युद्ध में करारा जवाब दिया। अब यह ऐतिहासिक सफर अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच रहा है। आगामी 26 सितंबर को मिग-21 विमान भी वायुसेना के बेड़े से सेवामुक्त कर दिया जाएगा। इससे पहले 6 मार्च 2009 को मिग-23 बीएन लड़ाकू स्ट्राइक विमान को वायुसेना ने सेवामुक्त किया था। उत्तर भारत के अहम एयरबेस हलवारा से इस विमान ने अपनी आखिरी उड़ान भरी थी। तीन दशक तक सामरिक ताकत का लोहा मनवाने वाले मिग-23 की विदाई वायुसेना के लिए भावुक क्षण था। अब वही अध्याय मिग-21 के साथ दोहराया जा रहा है।
भारतीय वायुसेना के लिए मिग-21 केवल एक लड़ाकू विमान नहीं बल्कि साहस, शौर्य और पराक्रम की पहचान रहा है। 1963 में वायुसेना में शामिल होने के बाद इसने 1965, 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध में दुश्मन पर बिजली की तरह टूटकर उसे धूल चटाई। इतना ही नहीं, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में भी मिग-21 ने अपनी ताकत और विश्वसनीयता साबित की।
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अपनी तेज रफ्तार और धारदार तकनीक के बावजूद मिग-21 के हिस्से में हादसों की काली छाया भी रही। ट्रेनी विमानों की कमी के कारण यह जेट कई बार हादसों का शिकार हुआ। आंकड़े बताते हैं कि मिग-21 दुर्घटनाओं में अब तक 170 जांबाज फाइटर पायलट शहीद हो चुके हैं और 40 आम नागरिकों की जान भी जा चुकी है। केवल 2010 से 2013 के बीच ही 14 मिग-21 हादसों का शिकार हुआ था। इन्हीं वजहों से इसे उड़ता ताबूत का नाम मिला।
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राफेल, सुखोई और तेजस संभालेंगे मोर्चा
वायुसेना में अब राफेल और सुखोई जैसे अत्याधुनिक सुपरसोनिक फाइटर जेट शामिल हो चुके हैं। इसके अलावा देश में ही निर्मित लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस को भी बेड़े में शामिल किया गया है। मिग-21 के रिटायरमेंट के बाद इसकी जगह तेजस लेगा। वर्तमान में भारत के पास मौजूद 36 मिग-21 विमानों को 26 सितंबर को रिटायर किया जाएगा। इसके बाद केवल मिग-29 ही सेवामें रहेंगे, जिन्हें भी आने वाले वर्षों में धीरे-धीरे बेड़े से हटाया जाएगा।

आखिरी उड़ान
बनेगी यादगार
मिग-21 की विदाई को ऐतिहासिक बनाने के लिए चंडीगढ़ स्थित वायुसेना केंद्र में भव्य समारोह आयोजित होगा। समारोह के दौरान सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम आसमान में अपने अद्भुत करतब दिखाएगी। इस दौरान मिग-21 अपनी आखिरी उड़ान भरेगा और उसके साथ तेजस विमान एस्कॉर्ट करेंगे। वायुसेना के इतिहास में यह पल हमेशा याद किया जाएगा जब एक दिग्गज योद्धा अपने गौरवशाली अध्याय को पूरा कर नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपेगा। मिग-21 की विदाई केवल एक विमान की रिटायरमेंट नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना की गौरवशाली विरासत का सम्मान है। यह जेट आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा कि आसमान में उड़ान केवल तकनीक की नहीं, बल्कि जज्बे और बलिदान की भी होती है।
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