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Chandigarh News: जिला बार एसोसिएशन की दो दिन की हड़ताल, सेक्टर-43 अदालत में ठप रहा कामकाज
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संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। जिला बार एसोसिएशन (डीबीए) चंडीगढ़ ने अपनी मांगों को लेकर दो दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है। हड़ताल के पहले दिन वीरवार को सेक्टर-43 स्थित जिला अदालत में कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा और शुक्रवार को भी वकील अदालतों से दूर रहेंगे। यह निर्णय डीबीए की कार्यकारिणी समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।
एसोसिएशन ने शहर के सभी अधिवक्ताओं से हड़ताल में शामिल होने और कोर्ट कार्य से विरत रहने की अपील की है। बार पदाधिकारियों का कहना है कि यह कदम वकीलों के अधिकारों, सम्मान और पेशे की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उठाया गया है। सेक्रेटरी अमिश शर्मा और ट्रेजरर उज्जवल भसीन ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
वकील स्वराज अरोड़ा ने कहा कि नई व्यवस्था में सीमित वकीलों को ही काम दिया जा रहा है, जिससे अन्य अधिवक्ताओं के अवसर प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि कानूनी सहायता मामलों में निष्पक्षता और समान अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए। वहीं अधिवक्ता, मनोज कुमार और मोहम्मद उजैर ने बताया कि यह विरोध व्यक्तिगत हितों के लिए नहीं, बल्कि विधि पेशे की गरिमा और बार की स्वायत्तता बचाने के लिए है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नीतियां अधिवक्ताओं की भूमिका को कमजोर कर सकती हैं, इसलिए किसी भी सुधार से पहले बार से व्यापक परामर्श जरूरी है।
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इन मुद्दों के विरोध में हड़ताल:
जिला अदालतों के लिए प्रस्तावित नया एक्शन प्लान
लीगल एड डिफेंस काउंसिल (एलएडीसी) सिस्टम
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चंडीगढ़। जिला बार एसोसिएशन (डीबीए) चंडीगढ़ ने अपनी मांगों को लेकर दो दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है। हड़ताल के पहले दिन वीरवार को सेक्टर-43 स्थित जिला अदालत में कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा और शुक्रवार को भी वकील अदालतों से दूर रहेंगे। यह निर्णय डीबीए की कार्यकारिणी समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।
एसोसिएशन ने शहर के सभी अधिवक्ताओं से हड़ताल में शामिल होने और कोर्ट कार्य से विरत रहने की अपील की है। बार पदाधिकारियों का कहना है कि यह कदम वकीलों के अधिकारों, सम्मान और पेशे की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उठाया गया है। सेक्रेटरी अमिश शर्मा और ट्रेजरर उज्जवल भसीन ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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वकील स्वराज अरोड़ा ने कहा कि नई व्यवस्था में सीमित वकीलों को ही काम दिया जा रहा है, जिससे अन्य अधिवक्ताओं के अवसर प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि कानूनी सहायता मामलों में निष्पक्षता और समान अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए। वहीं अधिवक्ता, मनोज कुमार और मोहम्मद उजैर ने बताया कि यह विरोध व्यक्तिगत हितों के लिए नहीं, बल्कि विधि पेशे की गरिमा और बार की स्वायत्तता बचाने के लिए है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नीतियां अधिवक्ताओं की भूमिका को कमजोर कर सकती हैं, इसलिए किसी भी सुधार से पहले बार से व्यापक परामर्श जरूरी है।
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