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Hindi News ›   Chandigarh ›   The decision to ban selling part of property outside the family is right: High Court

Highcourt: चंडीगढ़ में संपत्ति का हिस्सा या फ्लोर नहीं बेच सकेंगे, हाईकोर्ट ने प्रशासन के निर्णय पर लगाई मुहर

Sun, 23 Feb 2025 02:16 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Sun, 23 Feb 2025 02:16 AM IST
सार

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिसकी कानून में सीधी अनुमति नहीं है, उसे अप्रत्यक्ष रूप से लागू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि किसी सह-स्वामी द्वारा अपनी हिस्सेदारी स्वतंत्र रूप से बेचना तभी संभव होगा जब पूरी संपत्ति एकल इकाई के रूप में बेची जाए।  

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The decision to ban selling part of property outside the family is right: High Court
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़वासियों को झटका देते हुए चंडीगढ़ प्रशासन के उस निर्णय पर मुहर लगा दी है जिसके तहत संपत्ति का हिस्सा परिवार के अतिरिक्त किसी अन्य को नहीं बेचा जा सकता। इस फैसले के जरिए प्रशासन ने एकल आवासीय इकाइयों को अपार्टमेंट में बदलने पर प्रतिबंध लगाया गया था।
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जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस विकास सूरी की पीठ ने इस संबंध में दायर कई याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि 1952 अधिनियम के तहत बनाए गए वैधानिक नियम स्पष्ट रूप से आवासीय इकाइयों के विभाजन, टुकड़ों में बंटवारे, द्विभाजन या अपार्टमेंटलाइज़ेशन को प्रतिबंधित करते हैं। यह मामला पूजा भरत कपूर, सुशील घई, प्रदीप शर्मा और पूनम प्रतिभा शर्मा सहित कई याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर किया गया था। ये सभी चंडीगढ़ के विभिन्न सेक्टरों में सह-स्वामित्व वाली संपत्तियों के हिस्सेदार हैं। उन्होंने प्रशासन के 9 फरवरी 2023 के सार्वजनिक नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें गैर-परिवार सदस्यों को आवासीय संपत्तियों की हिस्सेदारी बेचने या स्थानांतरित करने पर रोक लगाई गई थी।
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याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इस प्रतिबंध से उनकी संपत्ति बेचने की स्वतंत्रता बाधित हो रही है जिससे शहर में संपत्ति के लेनदेन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। हाईकोर्ट ने कहा कि कुछ बिल्डर्स और संपत्ति मालिक कानून के दायरे से बचने के लिए संपत्तियों की हिस्सेदारी बेच रहे थे और बाद में आंतरिक समझौतों के माध्यम से अलग-अलग फ्लोर को विभिन्न खरीदारों को आवंटित कर रहे थे, जो कि स्पष्ट रूप से ज़ोनिंग कानूनों का उल्लंघन है। 
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिसकी कानून में सीधी अनुमति नहीं है, उसे अप्रत्यक्ष रूप से लागू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि किसी सह-स्वामी द्वारा अपनी हिस्सेदारी स्वतंत्र रूप से बेचना तभी संभव होगा जब पूरी संपत्ति एकल इकाई के रूप में बेची जाए। कोर्ट ने प्रशासन के उस स्पष्टीकरण को भी स्वीकार किया जिसमें कहा गया था कि परिवार के भीतर सह-स्वामियों के बीच संपत्ति का हस्तांतरण प्रतिबंध के दायरे में नहीं आएगा। यदि एक ही परिवार के सह-स्वामी एक संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्ति के भीतर अलग-अलग रहना चाहते हैं तो यह अपार्टमेंटलाइजेशन की श्रेणी में नहीं आएगा। यदि प्रशासन को व्यावहारिक लगे, तो वह विरासत समिति के साथ परामर्श कर सह-स्वामियों के बीच हिस्सेदारी बेचने की अनुमति देने पर विचार कर सकता है, बशर्ते कि इससे जनसंख्या घनत्व में बढ़ोतरी न हो।
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