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चंडीगढ़: पीजीआई और जीएमसीएच में एमआरआई के इंतजार में बिगड़ रही मरीजों की हालत

Wed, 27 Apr 2022 04:37 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 27 Apr 2022 04:37 PM IST
सार

जीएमसीएच 32 के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुधीर गर्ग का कहना है कि इमरजेंसी और वार्ड के मरीजों को एमआरआई के लिए इंतजार नहीं कराया जाता लेकिन ओपीडी में ज्यादा दबाव होने के कारण मरीजों को थोड़ा इंतजार करना पड़ रहा है। 

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The Condition of patients is deteriorating while waiting for MRI in PGI and GMCH
पीजीआई चंडीगढ़

विस्तार

पीजीआई और जीएमसीएच-32 में एमआरआई के इंतजार में मरीजों की हालत बिगड़ने लगी है। यहां एमआरआई की वेंटिंग दो महीने से ज्यादा है। इतना लंबा इंतजार उनकी जान पर भारी पड़ रहा है। अस्पताल में आने वाले सक्षम मरीज सरकारी सुविधा के इंतजार को दरकिनार कर निजी सेंटरों में ज्यादा कीमत देकर भी जांच करा रहे हैं लेकिन परेशानी उन गरीब और जरूरतमंद मरीजों को उठानी पड़ रही है, जो पैसे की कमी के कारण इंतजार करने को मजबूर हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस इंतजार के बीच उनकी हालत बिगड़ने लगी है। 

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अस्पताल प्रशासन मरीजों के लिए सुविधा का विस्तार करने की बात कह रहा है लेकिन पीजीआई और जीएमसीएच 32 के रेफरल सेंटर होने के कारण मरीजों का दबाव अधिक है। जीएमसीएच 32 के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुधीर गर्ग का कहना है कि इमरजेंसी और वार्ड के मरीजों को एमआरआई के लिए इंतजार नहीं कराया जाता लेकिन ओपीडी में ज्यादा दबाव होने के कारण मरीजों को थोड़ा इंतजार करना पड़ रहा है। 
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पहला मामला: विकासनगर निवासी संतोष को पीठ में कई महीनों से दर्द था। जीएमसीएच 32 की ओपीडी में दिखाने पर डॉक्टर ने एमआरआई कराने के लिए कहा लेकिन उन्हें जांच के लिए ढाई महीने बाद की डेट दी गई। दर्द के कारण इतनी लंबी डेट का इंतजार करना मुश्किल था इसलिए संतोष ने निजी सेंटर में एमआरआई कराना उचित समझा।
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दूसरा मामला: पटना निवासी आशा देवी का पीजीआई में इलाज चल रहा है। ओपीडी में फॉलोअप के लिए आई तो डॉक्टर ने एमआरआई कराने को कहा लेकिन ओपीडी की मरीज होने के कारण उन्हें दो महीने बाद की डेट मिली। आखिरकार आशा को निजी सेंटर में 2500 रुपये वाली जांच 8 हजार में करानी पड़ी। 

कमेटी के गठन की योजना ठंडे बस्ते में पड़ी
जरूरतमंद मरीजों को जांच में राहत देने के लिए पूर्व डायरेक्टर प्रिंसिपल के कार्यकाल में एक कमेटी का गठन किया गया था। शहर के निजी डायग्नोसिस सेंटरों से रेट लिस्ट लेकर उसे सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की पहुंच के हिसाब से संशोधित कर लागू कराना था। इसके लिए लगभग सात सेंटरों ने अस्पताल की रेट लिस्ट के अनुसार वहां आने वाले मरीजों को रियायत देने की हामी भी भरी थी। मरीजों की सहूलियत के लिए उस सुविधा को लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई थी लेकिन इसी बीच डायरेक्टर प्रिंसिपल का निधन हो गया और पूरी योजना ठंडे बस्ते में चली गई। 

सरकारी इलाज के नाम पर खानापूर्ति 
मुझे स्पाइन से जुड़ी परेशानी है। इलाज के लिए जीएमसीएच 32 गया था। ओपीडी में देखने के बाद डॉक्टर ने एमआरआई कराने के लिए कहा। अस्पताल में वेटिंग देख डॉक्टर ने बाहर से जांच कराने के लिए कहा। मुझे समझ में आ गया कि सरकारी तंत्र में इलाज संभव नहीं है। इसलिए अगली बार वहां गया ही नहीं।  दलवीर सिंह, हल्लोमाजरा 

सरकारी सुविधा कागजों में ही संचालित होती है। मरीजों तक नहीं पहुंचती। पीजीआई और जीएमसीएच 32 अस्पताल प्रशासन को मरीजों की जरूरत भलीभांति पता है। वे चाहें तो और मशीनें इंस्टॉल कर सकते हैं लेकिन वे इस बारे में सरकार को सूचना ही नहीं देते, ताकि उन पर काम का दबाव न बढ़े। -विक्रम सिंह, रामदरबार 

एमआरआई की सुविधा एक नजर में 

  • पीजीआई में मौजूदा समय में पांच एमआरआई मशीनों का हो रहा संचालन
  • पीजीआई में एमआरआई के लिए 2500 रुपये शुल्क तय है 
  • जिसमें से एक ओपीडी, एक कार्डियक सेंटर, एक ट्रॉमा सेंटर और दो रेडियोडायग्नोसिस विभाग में इंस्टॉल हैं 
  • प्रतिदिन 80 से 90 मरीजों की एमआरआई की जा रही है 
  • ओपीडी के मरीजों को डेढ़ से दो महीने बाद की डेट दी जा रही है 
  • जीएमसीएच 32 में एमआरआई की एक मशीन है 
  • यहां जांच के लिए 1800 रुपये शुल्क तय है 
  • जीएमसीएच 32 में मरीजों को ढाई से तीन महीने बाद की डेट दी जा रही है 

 

दिल्ली एम्स में ओपीडी के मरीजों को दो साल की वेटिंग दी जा रही थी। इस कारण वहां डेट देना ही बंद कर दिया गया है। जहां तक पीजीआई में एमआरआई की लंबी वेटिंग की बात है तो विभाग के अंतर्गत पांच मशीनें काम कर रही हैं। एक पुरानी मशीन की जगह नई मंगाने की प्रक्रिया चल रही है। सीटी स्कैन की तुलना में एमआरआई करने में तीन गुना ज्यादा समय लगता है। संस्थान में मरीजों का दबाव काफी ज्यादा है फिर भी उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है।  डॉ. एमएस संधू, पीजीआई रेडियोडायग्नोसिस विभाग के प्रमुख

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