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आरोपी 8 साल से पुलिस की गिरफ्त से बाहर, अफसरों पर विभागीय कार्रवाई हो: हाईकोर्ट
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-लुधियाना के पुलिस कमिश्नर काे अनुपालन संबंधी रिपोर्ट सौंपने का आदेश
-याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। धोखाधड़ी के 8 साल पुराने मामले में आरोपी को पकड़ने में नाकाम रहने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस को जमकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने का लुधियाना के पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया है। साथ ही समझौते के आधार पर याची को अंतरिम जमानत दे दी है।
याचिका दाखिल करते हुए राजेश महाजन ने हाईकोर्ट से 2017 में दर्ज एफआईआर में अग्रिम जमानत देने की मांग की थी। याची ने बताया कि उ सके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद उसने अग्रिम जमानत की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी जिसे 2018 में खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया। 2024 में समझौते के आधार पर याची ने निचली अदालत से अग्रिम जमानत की मांंग की थी जिसे खारिज कर दिया गया। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि समझौते को आधार बनाकर उसे अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पुलिस इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी पकड़ने में नाकाम रही। इसके लिए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। विभागीय कार्रवाई का आदेश देते हुए 10 हजार रुपये जुर्माना लगाकर हाईकोर्ट ने याची को अंतरिम जमानत दे दी।
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-याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। धोखाधड़ी के 8 साल पुराने मामले में आरोपी को पकड़ने में नाकाम रहने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस को जमकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने का लुधियाना के पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया है। साथ ही समझौते के आधार पर याची को अंतरिम जमानत दे दी है।
याचिका दाखिल करते हुए राजेश महाजन ने हाईकोर्ट से 2017 में दर्ज एफआईआर में अग्रिम जमानत देने की मांग की थी। याची ने बताया कि उ सके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद उसने अग्रिम जमानत की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी जिसे 2018 में खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया। 2024 में समझौते के आधार पर याची ने निचली अदालत से अग्रिम जमानत की मांंग की थी जिसे खारिज कर दिया गया। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि समझौते को आधार बनाकर उसे अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पुलिस इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी पकड़ने में नाकाम रही। इसके लिए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। विभागीय कार्रवाई का आदेश देते हुए 10 हजार रुपये जुर्माना लगाकर हाईकोर्ट ने याची को अंतरिम जमानत दे दी।
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