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अस्थमा के मरीजों के लिए रामबाण है ये थैरेपी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 06 May 2014 12:38 PM IST
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विश्व अस्थमा डे के अवसर पर चिकित्सकों ने दावा किया है कि अस्थमा में सबसे प्रभावी दवा इनहेलेशन थैरेपी है, जो भारत में बहुत ही कम दर पर उपलब्ध है। दमा से पीड़ित बच्चे में इनहेलेशन थेरेपी की शुरुआत जल्द से जल्द करनी चाहिए।
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इससे बीमारी को नियंत्रित करने और उसे अटैक से बचाने तथा उसके फेफड़ों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है। इससे उसकी जिंदगी की गुणवत्ता में भी सुधार आता है। बहरहाल, इनहेल्ड दवाओं के प्रति कम स्वीकृति के कारण दमा के मामलों का इलाज ओरल टेबलेट और इंजेक्शन से किया जाता है।
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डाक्टरों ने बताया कि समाज में यह एक मिथक फैला है कि इन्हेलर के प्रयोग से बच्चों में एक आदत पड़ जाती है, जो समाज के लिए खतरनाक है। सिपला की जन सेवा पहल ब्रीदफ्री की ओर से आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि पीजीआई के पूर्व प्रोफेसर डा. एसके जिंदल, पीजीआई की डाक्टर मीनू और फोर्टिस हास्पिटल के डाक्टर एके मंडल ने बताया कि दमा का शुरुआती चरण में पता लगाना बहुत महत्वपूर्ण है।
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इससे फेफड़े की स्थिति को नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है। दमा को सामान्यतया खांसी, सीने में जकड़न एवं सांसों की घरघराहट जैसे लक्षणों से पकड़ा जा सकता है, लेकिन दमा की सही जानकारी के लिए महत्वपूर्ण है कि इन लक्षणों को लेकर यथाशीघ्र चिकित्सक से संपर्क कर इसका पता लगाया जाऐ।
पीकलो मीटर जैसे सरल उपकरण दमा का पता लगाने तथा इस पर निगरानी रखने के लिये उपलब्ध हैं। पीजीआई की डाक्टर मीनू सिंह ने बताया, ‘अधिकांश लोग बार-बार होने वाली कफिंग, सुबह के दौरान कफिंग, सांस लेने में तकलीफ, और छींक आने जैसे लक्षणों का उपचार कफ दवाओं या बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेकर करते हैं। ‘दमा’ और ‘इनहेलर्स’ जैसे शब्दों को लेकर काफी डर भी व्याप्त है। बीमारी को लेकर और सही उपचार के प्रति निरोध बीमारी को और बढ़ावा देता है।