आतंकी हमले की खास बातें, क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
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पंजाब के पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर आतंकी हमले को लेकर कई बड़ी बातें सामने आई हैं। पंजाब पुलिस को अंदर घुसने नहीं दिया जा रहा। एक आतंकी के एयरफोर्स स्टेशन के अंदर होने के कारण ग्रेनेड फेंके जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अब तक इस हमले में 4 आतंकी मारे गए है, जबकि पांचवें आतंकी की तलाश जारी है। पांचवां आतंकी आत्मघाती हो सकता है, बताया जा रहा है कि 5वां आतंकी फिदायीन है।
वहीं, पठानकोट एयरबेस पर 2 धमाकों की आवाज सुनाई दी गई है, जहां सर्च ऑपरेशन के दौरान फायरिंग जारी है। सूत्रों के मुताबिक यह दोनों धमाके 5वें आतंकवादी की खोज के दौरान हुए।
बताया जा रहा है कि आतंकी सेना के आधिकारिक वाहन में आये थे। उनकी वायु सेना अड्डे के तकनीकी क्षेत्र में घुसने की मंशा थी। खबर है कि जिन आतंकियों ने इस वारदात को अंजाम दिया है, वे पाकिस्तान के बहावलपुर से सीमा पार करते हुए जम्मू-कश्मीर और फिर पंजाब में घुसे थे।
जिस तरह आतंकियों ने एयरफोर्स बेस में प्रवेश किया उस देखकर यह लगता है कि उन्होंने यहां हमला करने से पहले पूरे क्षेत्र की अच्छी तरह छानबीन की थी। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद पर हमले का शक जताया जा रहा है, क्योंकि बरामद गाड़ी से जैश का पर्चा मिला है। पुलिस की कोशिश है कि कम से कम एक आतंकी को जिंदा पकड़ा जाए।
इससे पहले खबर आई थी कि जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मौलाना मसूद अजहर ने इस हमले की साजिश रची है। मसूद अजहर जैश का वो आतंकी है जिसे 17 साल पहले 1999 में कांधार हाईजैक मामले में भारत ने रिहा किया था।
क्या कहते हैं रक्षा विशेषज्ञ?
- रिटायर्ड एयरमार्शल एके सिंह ने टीवी चैनल से कहा, 'आतंकी कभी एयरबेस के अंदर नहीं पहुंच सकते। इस बार भी उन्हें फर्स्ट लेयर में घेर लिया गया। आतंकियों का मकसद केवल चैनल की सुर्खियों में आना है। जहां एयरफोर्स के फाइटर जेट्स और चॉपर होते हैं, वहां तक पहुंचने के लिए पांच लेयर की सिक्योरिटी पार करनी होती है, वहां तक पहुंचना नामुमकिन है। आतंकियों का मकसद केवल यह बताना है कि वे आज भी ताकतवर हैं।'
- डिफैंस एक्सपर्ट सुशांत सरीन ने कहा, 'मोदी जी ने बोल्ड स्टेप लिया और वह पाकिस्तान गए। आतंकी इससे बौखला गए हैं। वे अब अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश करेंगे, इसका शक तो पहले से था और दोनों देशों की सरकारें भी इसे जानती थीं। इसे हालिया जासूसी केस से जोड़ना गलत होगा। बाहर के लोग तो जासूसी कर नहीं कर सकते, यह काम सेना के लोग ही कर सकते हैं। बहुत छोटे लेवल पर ही जासूसी की जा सकती है।'
- रिटायर्ड मेजर जनरल प्रफुल्ल बख्शी ने कहा, 'आतंकी कभी भी टेक्निकल एरिया तक नहीं पहुंच सकते। हमारे सिस्टम में कमियां हैं। सिविल एडमिनिस्ट्रेशन को मिलिट्री इंटेलिजेंस के साथ मीटिंग करनी चाहिए थी। एसपी के किडनैपिंग के बाद प्रधानमंत्री और बाकी लोगों को वेकअप कॉल लेनी चाहिए थी। 1965 में भी इस इलाके में हमला हुआ था।'