हरियाणा में करोड़पति ट्रांसपोर्टरों को ही किलोमीटर स्कीम का टेंडर, तालमेल कमेटी ने किया खुलासा
हरियाणा परिवहन विभाग की किलोमीटर स्कीम को लेकर रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी ने बड़ा खुलासा किया है। कमेटी के अनुसार सरकार ने सभी 510 परमिट लखपति ऑपरेटरों को ही दिए गए हैं। जिन 49 निजी ऑपरेटरों की बसें हायर की गई हैं, उनमें से एक भी छोटा या नया ऑपरेटर नहीं है, जिसे रोजगार मिलने जा रहा है। सभी बड़े ऑपरेटर हैं, पहले से बसें चला रहे हैं।
विभाग ने कम से कम पांच बसों वाले ऑपरेटर के ही किलोमीटर स्कीम के टेंडर में भाग लेने की शर्त लगाकर एक-दो बस वालों को पहले ही बाहर कर दिया था। एक नई बस कंप्लीट होकर 25 से 30 लाख रुपये पड़ती है, ऐसे में जिसके पास पहले से पांच बसें होंगी, वे कम से कम एक करोड़ रुपये से ऊपर का ट्रांसपोर्टर होगा। गुरुवार 29 नवंबर को हाईकोर्ट में रोडवेज कर्मचारियों से जुड़े मामले की अहम सुनवाई होनी है।
इसमें किलोमीटर स्कीम के घाटे का सौदा होने के दावे को तालमेल कमेटी सहित साबित करने के लिए तथ्य पेश करेगी। आंकड़ों के साथ कमेटी अपना पक्ष शपथ पत्र के माध्यम से 27 नवंबर को ही हाईकोर्ट में जमा करा चुकी है। गुरुवार को कमेटी के अधिवक्ता जेएस तूर इस ओर चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी पर आधारित दो सदस्यीय खंडपीठ का ध्यान आकर्षित करेंगे। किलेामीटर स्कीम की पोल खोलते हुए कमेटी ने हाईकोर्ट में स्कीम के आधार को ही चुनौती दी है। जनहित मामले की याचिका के दौरान पेश तथ्यों के आधार पर अगर हाईकोर्ट स्कीम पर स्टे नहीं लगाता है तो कमेटी की ओर से गुरुवार को ही नई याचिका दायर की जाएगी।
उम्मीद है हाईकोर्ट स्कीम पर लगाएगा रोक : कमेटी
कर्मचारी तालमेल कमेटी के सदस्य वीरेंद्र सिंह धनखड़, इंद्र सिंह बधाना, हरिनारायण शर्मा, सरबत पूनिया, दलबीर किरमारा, बलवान सिंह व सुलतान सिंह ने उम्मीद जताई की हाईकोर्ट गुरुवार को स्कीम पर स्टे लगाएगा। उन्होंने कहा कि हड़ताल के दौरान की गई तमाम कार्रवाई खत्म करने की मांग भी की जाएगी। कमेटी सदस्यों ने कहा कि किलोमीटर स्कीम बड़ा घोटाला है। इसके तथ्य हाईकोर्ट में पेश कर दिए हैं।
कर्मचारी तालमेल कमेटी ने हाईकोर्ट को बताया, यूं घाटे का सौदा है स्कीम
. हरियाणा रोडवेज के कुल व्यय का डीजल पर तीस प्रतिशत से भी कम खर्च हो रहा है, जबकि हायर की जाने वाली बसों को डीजल खर्च 56 फीसदी देंगे। ये मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है।
. रोडवेज बस पर औसत खर्च 47.57 रुपये प्रति किलोमीटर आता है, जबकि हायर बसों पर 52.52 रुपये प्रति किलोमीटर आएगा।
. रोडवेज बसों की औसत कमाई 26.19 रुपये प्रति किलोमीटर बैठती है, जबकि विभाग ने निजी बसों के साथ 36 रुपये प्रतिकिलोमीटर से अधिक का एग्रीमेंट किया है। जिससे घाटा ही घाटा है।
. निजी बसों के लिए रोड टैक्स मात्र 12 हजार रुपये है, जबकि रोडवेज के 72 हजार रुपये है। निजी बस ऑपरेटरों को यह रियायत क्यों दी जा रही है।
. हायर बसों को विभाग ने दस साल तक चलाने का एग्रीमेंट किया है, जबकि मोटर व्हीकल एक्ट अनुसार आठ साल के बाद बसें सड़क पर नहीं दौड़ाई जा सकतीं।
. निजी बसों को 300 किलोमीटर सफर रोजाना तय करना ही होगा, चाहे कमाई जितनी भी हो। इससे भी विभाग को वित्तीय चपत लगेगी। चूंकि, इसका प्रति किलोमीटर प्रदान की जाने वाली राशि पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
किलोमीटर स्कीम जनता की सुविधा के लिए : धनपत सिंह
परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव धनपत सिंह का कहना है कि रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के आरोप बेमानी हैं। हायर की गई बसों से परिवहन विभाग को कम से कम पांच रुपये प्रति किलोमीटर का फायदा होगा। विभाग अपना पक्ष मजबूती से हाईकोर्ट में रखेगा।