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मकान मालिक और किरायेदारों का विवाद खत्म करने को लाया जा रहा टेनेंसी एक्ट, जानिए क्या है
Sat, 23 Nov 2019 01:12 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 23 Nov 2019 01:12 PM IST
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टेनेंसी एक्ट
- फोटो : फाइल फोटो
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लैंडलॉर्ड और टेनेंट (किरायेदार) के बीच होने वाले विवादों को खत्म करने के लिए देश भर में टेनेंसी एक्ट 2019 लाया जा रहा है। चंडीगढ़ प्रशासन ने भी अपनी टेनेंसी एक्ट को ड्राफ्ट कर नोटिफिकेशन के लिए केंद्र को भेजा है। इस बीच चंडीगढ़ व्यापार मंडल ने भी एक्ट को लेकर कुछ सुझाव भेजे हैं।
चंडीगढ़ व्यापार मंडल ने सुझाव दिया है कि चंडीगढ़ को केंद्र के टेनेंसी एक्ट 2019 के लिए इंतजार करना चाहिए। मंडल ने कहा है कि एक्ट रेंट फॉर्मूला को समझाया नहीं गया है। साथ ही एक्ट के लागू होने के एक साल के अंदर किरायेदार को मकान मालिक के साथ एक नया एग्रीमेंट करना होगा, जो कि थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
मंडल ने किरायेदार की तर्ज पर मकान मालिकों के लिए भी स्पेशल कैटेगरी की मांग की है। इसके अलावा कहा है कि एक्ट में से बेवजह के क्लॉज और प्रोविजन को हटा देना चाहिए। इससे मकान मालिकों के साथ किरायेदारों को भी परेशानी हो सकती है। इसके अलावा मालिक और किरायेदार में संतुलन बहुत जरूरी है। सुझाव दिया गया है कि एक्ट के तहत मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवाद को सुलझाने के लिए रेंट अथॉरिटी का गठन किया जाना चाहिए। इसके सदस्य जूडिशियरी से होने चाहिए।
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क्या है यूटी टेनेंसी एक्ट 2019
चंडीगढ़ प्रशासन ने मालिकों और किरायेदारों के हितों में संतुलन और किराये को रेगुलेट करने, किरायेदार व मालिक के बीच विवाद को फास्ट ट्रैक आधार पर निपटाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के मॉडल टेनेंसी एक्ट की तर्ज पर चंडीगढ़ यूनियन टेरिटरी टेनेंसी एक्ट 2019 का प्रारूप तैयार किया है।
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चंडीगढ़ व्यापार मंडल ने सुझाव दिया है कि चंडीगढ़ को केंद्र के टेनेंसी एक्ट 2019 के लिए इंतजार करना चाहिए। मंडल ने कहा है कि एक्ट रेंट फॉर्मूला को समझाया नहीं गया है। साथ ही एक्ट के लागू होने के एक साल के अंदर किरायेदार को मकान मालिक के साथ एक नया एग्रीमेंट करना होगा, जो कि थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
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मंडल ने किरायेदार की तर्ज पर मकान मालिकों के लिए भी स्पेशल कैटेगरी की मांग की है। इसके अलावा कहा है कि एक्ट में से बेवजह के क्लॉज और प्रोविजन को हटा देना चाहिए। इससे मकान मालिकों के साथ किरायेदारों को भी परेशानी हो सकती है। इसके अलावा मालिक और किरायेदार में संतुलन बहुत जरूरी है। सुझाव दिया गया है कि एक्ट के तहत मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवाद को सुलझाने के लिए रेंट अथॉरिटी का गठन किया जाना चाहिए। इसके सदस्य जूडिशियरी से होने चाहिए।
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क्या है यूटी टेनेंसी एक्ट 2019
चंडीगढ़ प्रशासन ने मालिकों और किरायेदारों के हितों में संतुलन और किराये को रेगुलेट करने, किरायेदार व मालिक के बीच विवाद को फास्ट ट्रैक आधार पर निपटाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के मॉडल टेनेंसी एक्ट की तर्ज पर चंडीगढ़ यूनियन टेरिटरी टेनेंसी एक्ट 2019 का प्रारूप तैयार किया है।