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चंडीगढ़ : कोरोना काल में टेलीमेडिसिन सेवा बनी वरदान, उच्च रक्तचाप मरीजों को मिल रहा इलाज

Tue, 13 Apr 2021 12:34 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 13 Apr 2021 12:34 PM IST
सार

एक साल पहले पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा एवं स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ विभाग ने यह परियोजना शुरू की थी। इस प्रोजेक्ट के एक साल पूरे होने पर पीजीआई के प्रोजेक्ट संचालकों और पंजाब के विशेषज्ञों ने इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।  

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Telemedicine Service helped hypertension Patients during Covid-19 Pandemic
कार्डियो हेल्थ न्यूज लेटर के नवीनतम अंक का विमोचन किया। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

टेलीमेडिसिन कोविड-19 महामारी के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों के लिए वरदान साबित हुई। स्ट्रेंगथनिंग मैनेजमेंट ऑफ हाइपरटेंशन सर्विसेज प्रोजेक्ट से चंडीगढ़ से सटे क्षेत्रों और ग्रामीण पंजाब में अब तक 32,000 मरीजों को लाभ हुआ है। एक साल पहले पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा एवं स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ विभाग ने यह परियोजना शुरू की थी। इस प्रोजेक्ट के एक साल पूरे होने पर पीजीआई के प्रोजेक्ट संचालकों और पंजाब के विशेषज्ञों ने इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।  

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प्रोजेक्ट के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. सोनू गोयल ने कहा प्रोजेक्ट का उद्देश्य पंजाब सरकार के टेलीमेडिसिन ओपीडी पोर्टल - ई संजीवनी को तकनीकी सहायता प्रदान करना है, ताकि कोविड-19 महामारी के समय स्वास्थ्य देखभाल की बढ़ती चुनौतियों को कम किया जा सके। इस दौरान स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों को बेहतर और सशक्त बनाना, खाद्य चक्र से ट्रांसफैट को समाप्त करना जैसे विषय इस परियोजना का हिस्सा है। 
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इस प्रयास में डीसीएम एंड एसपीएच ने पंजाब में हेल्थ और वेलनेस सेंटर को बेहतर बनाने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की। इंटरनेट सुविधा दुरुस्त रखने के लिए 400 वाईफाई डोंगल वितरित किये गये और नियमित रूप से जरूरी निगरानी की गई। हेल्थ सेंटर में टेलीमेडिसिन सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए हब एंड स्पोक्स मॉडल का पालन किया गया। 
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पंजाब के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. अरीत कौर ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (सीएचडब्ल्यू) और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) की क्षमता वृद्धि की गई। गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की स्क्रीनिंग सीएचओ द्वारा हेल्थ सेंटर में ही की गई। स्क्रीनिंग के बाद, हब में मौजूद डॉक्टरों से जुड़े सीएचओ ने ई-संजीवनी सॉफ्टवेयर के जरिये इलाज शुरू किया और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में उपलब्ध दवाएं दी गई।


अब तक 32,000 मरीजों को सहायता प्रदान की गई। पीजीआई के आंतरिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर, डॉ. आशीष भल्ला ने कहा कि टेलीमेडिसिन और ई-संजीवनी के जरिये उच्च रक्तचाप के 15 लाख मामलों की जांच की गई। इस अवसर पर पीजीआई के प्रो. धीरज खुराना, डॉ. पूनम खन्ना के साथ ही हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. टीपी सिंह ने भी जानकारी दी। कार्यक्रम में कार्डियो हेल्थ न्यूज लेटर के नवीनतम अंक का विमोचन भी किया गया।

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