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कोरोना कमांडोः पीजीआई चंडीगढ़ के टेक्निकल स्टाफ का जज्बा बना कोरोना मरीजों के लिए वरदान
Wed, 22 Jul 2020 01:48 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jul 2020 01:48 PM IST
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कोरोना कमांडो मनोज
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ पीजीआई का कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल महामारी के बीच मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है। हॉस्पिटल के डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ के दिन-रात की मेहनत और लगन के बल पर यह संभव हो पाया है। अस्पताल में एक तरफ जहां कोरोना संक्रमितों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है, वहीं, दूसरी ओर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पॉजिटिव मरीजों का सफल ऑपरेशन भी हो रहा है। इन मरीजों के ऑपरेशन की सफलता को सुनिश्चित करने में अस्पताल के टेक्निकल स्टाफ का विशेष योगदान होता है।
टेक्निकल स्टाफ में मनोज कुमार और राजविंदर सिंह ओटी से लेकर आईसीयू की टेक्निकल व्यवस्था को लगातार तीन महीने से संभाले हुए हैं। यह जोड़ी कोरोना हॉस्पिटल के अलावा गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कोरोना संक्रमितों को जीवनदान देने में अहम भूमिका अदा कर रही है। इनका कहना है कि पीजीआई प्रशासन के प्यार और सहयोग का नतीजा है, जो वे संक्रमण से सुरक्षित रहकर फर्ज निभा रहे हैं।
स्टोर से आईसीयू तक की व्यवस्था
मनोज कुमार ने बताया कि अप्रैल महीने से उनके साथ राजविंदर की ड्यूटी कोविड हॉस्पिटल में है। मनोज ओटी और आईसीयू की टेक्निकल व्यवस्था को देखते हैं। वहीं, राजविंदर ग्राउंड फ्लोर पर बनाए गए स्टोर से इन दोनों महत्वपूर्ण यूनिटों के जरूरत के सामानों की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं। राजविंदर का कहना है कि आईसीयू और ओटी की टेक्निकल व्यवस्था में छोटी सी छोटी चीजें बहुत मायने रखती हैं।
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ऐसे में अगर बात कोरोना केे मरीजों की हो तो उनके स्तर पर एक सेकंड की भी देरी किसी अनहोनी का कारण बन सकती है, इसलिए 24 घंटे बेहद सजग और सतर्क होकर काम करना पड़ता है। उपकरणों की मॉनीटरिंग से लेकर उसकी देखरेख और क्रियान्वयन से जुड़ी हर चीज की रिपोर्ट बनाई जाती है ताकि किसी स्तर पर कोई गड़बड़ी न हो। मनोज ने बताया कि जिस दिन किसी पॉजिटिव मरीज का ऑपरेशन करना होता है, उस दिन वह कोविड ओटी में ड्यूटी करते हैं, बाकी समय उन्हें आईसीयू की व्यवस्था देखनी होती है।
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टेक्निकल स्टाफ में मनोज कुमार और राजविंदर सिंह ओटी से लेकर आईसीयू की टेक्निकल व्यवस्था को लगातार तीन महीने से संभाले हुए हैं। यह जोड़ी कोरोना हॉस्पिटल के अलावा गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कोरोना संक्रमितों को जीवनदान देने में अहम भूमिका अदा कर रही है। इनका कहना है कि पीजीआई प्रशासन के प्यार और सहयोग का नतीजा है, जो वे संक्रमण से सुरक्षित रहकर फर्ज निभा रहे हैं।
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स्टोर से आईसीयू तक की व्यवस्था
मनोज कुमार ने बताया कि अप्रैल महीने से उनके साथ राजविंदर की ड्यूटी कोविड हॉस्पिटल में है। मनोज ओटी और आईसीयू की टेक्निकल व्यवस्था को देखते हैं। वहीं, राजविंदर ग्राउंड फ्लोर पर बनाए गए स्टोर से इन दोनों महत्वपूर्ण यूनिटों के जरूरत के सामानों की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं। राजविंदर का कहना है कि आईसीयू और ओटी की टेक्निकल व्यवस्था में छोटी सी छोटी चीजें बहुत मायने रखती हैं।
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ऐसे में अगर बात कोरोना केे मरीजों की हो तो उनके स्तर पर एक सेकंड की भी देरी किसी अनहोनी का कारण बन सकती है, इसलिए 24 घंटे बेहद सजग और सतर्क होकर काम करना पड़ता है। उपकरणों की मॉनीटरिंग से लेकर उसकी देखरेख और क्रियान्वयन से जुड़ी हर चीज की रिपोर्ट बनाई जाती है ताकि किसी स्तर पर कोई गड़बड़ी न हो। मनोज ने बताया कि जिस दिन किसी पॉजिटिव मरीज का ऑपरेशन करना होता है, उस दिन वह कोविड ओटी में ड्यूटी करते हैं, बाकी समय उन्हें आईसीयू की व्यवस्था देखनी होती है।
इन उपकरणों की देखरेख की है जिम्मेदारी
वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर, मॉनीटर, एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन, सोनोक्लोट, सक्शन मशीन, हाई फ्रीक्वेंसी नेजल, कैनुला मशीन, एबीजी मशीन, ईसीजी मशीन, सिरिंज पम्पस जैसे उपकरणों का प्रयोग आईसीयू और ओटी में किया जाता है। इन सभी के देखरेख की जिम्मेदारी टेक्निकल स्टाफ के पास होती है।
संकट की घड़ी में जोश हो गया दोगुना
राजविंदर और मनोज का कहना है कि कोरोना के नाम से शुरू में तो डर लगा था, लेकिन उस डर ने मानो हमारा जोश दोगुना कर दिया है। अब ड्यूटी के मानकों को इतनी अच्छी तरह समझ चुके हैं। संक्रमण का कोई खतरा नहीं। जहां तक परिवार और बच्चों की बात है तो इस पेशे से जुड़े होने के कारण उन्हें भी हमारी ड्यूटी और उसके महत्व के बारे में अच्छी तरह से जानकारी है।
ड्यूटी के दौरान परिवार से 2 से 3 हफ्ते के बाद कुछ दिनों के लिए मुलाकात हो पाती है, लेकिन इस दौरान मन में संतोष रहता है कि हम फर्ज निभाने के लिए अपनों से दूर हुए हैं। एक बार यह संकट की घड़ी चली गई तो फिर अपनों के साथ खुशियां बांटने के ढेर सारे मौके मिलेंगे।
संकट की घड़ी में जोश हो गया दोगुना
राजविंदर और मनोज का कहना है कि कोरोना के नाम से शुरू में तो डर लगा था, लेकिन उस डर ने मानो हमारा जोश दोगुना कर दिया है। अब ड्यूटी के मानकों को इतनी अच्छी तरह समझ चुके हैं। संक्रमण का कोई खतरा नहीं। जहां तक परिवार और बच्चों की बात है तो इस पेशे से जुड़े होने के कारण उन्हें भी हमारी ड्यूटी और उसके महत्व के बारे में अच्छी तरह से जानकारी है।
ड्यूटी के दौरान परिवार से 2 से 3 हफ्ते के बाद कुछ दिनों के लिए मुलाकात हो पाती है, लेकिन इस दौरान मन में संतोष रहता है कि हम फर्ज निभाने के लिए अपनों से दूर हुए हैं। एक बार यह संकट की घड़ी चली गई तो फिर अपनों के साथ खुशियां बांटने के ढेर सारे मौके मिलेंगे।