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चंडीगढ़ में पोस्को एक्ट का पहला केस

Wed, 19 Nov 2014 12:23 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 19 Nov 2014 12:23 PM IST
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Teasing with Little Girl, First Case Under Posco Act in Chandigarh

साथी की आठ साल की बच्ची से छेड़खानी में दोषी सेना के क्लर्क को आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) से कोई राहत नहीं मिली। कोर्ट मार्शल के बाद दोषी को फौज से बर्खास्त कर पांच साल की सजा सुनाई गई थी। सेना की अदालत के फैसले के खिलाफ दोषी ने ट्रिब्यूनल में अपील की थी।

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एएफटी ने दोषी की कोई भी दलील नहीं सुनीं और उसकी याचिका खारिज कर दी। दोषी पंजाब के फिरोजपुर कैंट में क्लर्क के पद पर कार्यरत था। उसके साथ काम करने वाले एक साथी की आठ साल की बच्ची थी। यह घटना 22 अक्तूबर 2013 की है।
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बच्ची के दर्ज बयान के मुताबिक दोषी ने उसे अकेले में बुलाया और उसके साथ छेड़छाड़ की। इससे बच्ची काफी सहम गई। पीड़िता ने यह बात अपने पैरेंट्स को बताई। उन्होंने इस मामले की शिकायत सेना के आला अधिकारियों से की। शिकायत मिलते ही अधिकारियों ने आरोपी के खिलाफ कोर्ट आफ इंक्वायरी मार्क कर दी।

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कोर्ट मार्शल का हुआ था आर्डर

Teasing with Little Girl, First Case Under Posco Act in Chandigarh

इंक्वायरी के दौरान दोनों पक्षों के 12 नवंबर से लेकर 14 जनवरी तक बयान दर्ज किए गए। बच्ची के बयानों से क्लर्क पर लगे आरोप सही साबित हुए। उसके बाद सेना की अदालत न जनरल कोर्ट मार्शल का आर्डर दिया।

13 मार्च से लेकर 11 अप्रैल 2014 तक उसका कोर्ट मार्शल हुआ। उसका डिमोशन कर नाईक से सिपाही बना दिया गया। पांच साल की कारावास सुनाकर उसे फौज की नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। 11 अगस्त को उसे जेल भेज दिया गया।

इसलिए की अपील
दोषी ने चंडीगढ़ आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल में अपील करते हुए कहा कि वह बेकसूर है। उसके बूढ़े मां-बाप हैं और उसके छोटे-छोटे बच्चे हैं। दोषी की ओर से जमानत की अर्जी भी लगाई गई।

सरकार की ओर से पेश हाईकोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट कैप्टन संदीप बंसल ने कहा कि दोषी ने अपने साथी के साथ विश्वासघात किया है। यह अपराध माफ करने लायक नहीं है, इसलिए दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

ट्रिब्यूनल में पोस्को एक्ट का पहला मामला

Teasing with Little Girl, First Case Under Posco Act in Chandigarh

आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल में प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन सेक्सुअल आफेंस एक्ट (पोस्को एक्ट) का यह पहला मामला है। हाईकोर्ट के एडवोकेट कैप्टन संदीप बंसल ने बताया कि आरोपी के खिलाफ एक्ट की धारा 10 और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस एक्ट के तहत पांच साल की न्यूनतम सजा का प्रावधान है।

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