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कक्षाओं को छोड़ शिक्षक सड़कों पर, अधिकारी बोले- उन्हें इसकी जानकारी नहीं
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के साथ शनिवार को डीएवी कॉलेज-10, खालसा कॉलेज-26, एसडी कॉलेज-32 और एमसीएम डीएवी कॉलेज-36 के शिक्षकों ने परिसर में सातवें पे कमीशन की मांग को लेकर धरना दिया। इस दौरान डीएवी और एमसीएम के शिक्षकों ने भूख हड़ताल जारी रखी और आधे घंटे के लिए मध्य मार्ग पर भी लोगों के बीच सरकार के खिलाफ रोषस्वरूप बैनर लेकर प्रदर्शन किया। शहर के कॉलेजों के शिक्षक शिक्षा बंद कर सड़कों पर है, लेकिन उच्च शिक्षा के अधिकारियों ने इस पर चुप्पी साधी हुई है। अधिकारियों से बात करने पर उन्होंने बताया कि कॉलेजों में शिक्षा बंद प्रदर्शन की उन्हें जानकारी नहीं है।
पंजाब यूनिवर्सिटी के पुटा ने डेंटल इंस्टीट्यूट में सातवें वेतनमान की मांग पर प्रदर्शन किया। इस दौरान पुटा अध्यक्ष डॉ. मृत्युजंय कुमार ने बताया कि पीफैक्टो के बैनर तले सभी शिक्षक एकजुट होकर सातवें पे कमीशन की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं। जब तक मांगे नहीं मानी जातीं, तब तक शिक्षक धरने पर ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब और चंडीगढ़ के कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के शिक्षक एकजुट हो रखे हैं, इसलिए सरकार के पास शिक्षकों की मांगें मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इस दौरान शिक्षकों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ स्लोगन दिखाए और नारेबाजी की।
वहीं डीएवी कॉलेज में जारी भूख हड़ताल के तेरहवें दिन सेवानिवृत्त प्रो. अनिल सरवाल, डॉ. आईपीएस सिद्धू, डॉ. नीरू मलिक, डॉ. संदीप कौर, डॉ. सुतापा सरयाल, डॉ. आशीष कपूर और डॉ. नवनीत कुमार प्रूथी सुबह 9 से शाम 5 बजे तक हड़ताल पर बैठे। शाम 5 बजे से प्रो. कपिल गांधार, प्रो. सूरज नारायण, डॉ. संदीप बिष्ट और प्रो. उदयभान सिंह रविवार सुबह 9 बजे तक भूख हड़ताल पर बैठे। खालसा कॉलेज-26 में डॉ जगतार सिंह, डॉ. मनजिंदर सिंह, प्रो. कुलविंदर सिंह, डॉ. इंदरपाल, डॉ. हरमीत कौर, डॉ. कुलजीत आदि शिक्षकों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
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अधिकारियों ने चुप्पी साधी, बोले- जांच करवाई जाएगी
यूटी उच्च शिक्षा विभाग के सचिव सरप्रीत सिंह गिल ने बताया कि उन्हें जानकारी नहीं है कि कॉलेजों में शिक्षा बंद प्रदर्शन चल रहा है। इस बारे में जांच करवाई जाएगी। शहर के कॉलेजों के शिक्षकों की ओर से पीफैक्टो के आह्वान पर एक दिसंबर से शिक्षा बंद प्रदर्शन में हिस्सा लेकर सातवें पे कमीशन की मांग को लेकर परिसर और सड़कों पर प्रदर्शन किया जा रहा है। वहीं अधिकारियों को उच्च शिक्षा की खामियों से रूबरू करवाने को लेकर शिक्षकों ने कई बार उच्च शिक्षा बचाओ के बैनर के साथ मटका चौक पर अधिकारियों के दफ्तर जाने के समय भी प्रदर्शन किया है, लेकिन सरकार से लेकर अधिकारी सब शिक्षा के मुद्दों पर मौन है। वहीं दूसरी तरफ शहर के कॉलेजों में अगस्त में पूरी तरह ऑफलाइन कक्षाएं शुरू की गईं, पीयू ने अभी तक विभाग नहीं खोले थे, इसलिए ऑनलाइन परीक्षा का फैसला दिया। यही फैसला उन्होंने शहर के कॉलेजों के लिए दिया जबकि विद्यार्थी पांच महीनों से ऑफलाइन पढ़ रहे थे। इसके बावजूद चंडीगढ़ उच्च शिक्षा विभाग ने पीयू के फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
डॉ. सुमित सकलानी बोले- यूटी उच्च शिक्षा विभाग को कई बार लिखा पत्र
डीएवीसीटीयू के अध्यक्ष डॉ. सुमित सकलानी ने बताया कि यूटी उच्च शिक्षा विभाग शैक्षणिक संस्थानों की अनदेखी करने में लगा है। कई बार विभागीय अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है। विभाग की ओर से विद्यार्थियों की ऑफलाइन कक्षाओं के लिए आदेश दिए गए, लेकिन पीयू की ओर से ऑनलाइन परीक्षा के फैसले पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। विभाग न तो विद्यार्थियों और न ही शिक्षकों के हित में कोई फैसला ले रहा है। लंबे समय से शिक्षक सड़कों पर हैं, लेकिन सरकार के साथ अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा, सबने शिक्षा के मुद्दों पर चुप्पी साधी हुई है।
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पंजाब यूनिवर्सिटी के पुटा ने डेंटल इंस्टीट्यूट में सातवें वेतनमान की मांग पर प्रदर्शन किया। इस दौरान पुटा अध्यक्ष डॉ. मृत्युजंय कुमार ने बताया कि पीफैक्टो के बैनर तले सभी शिक्षक एकजुट होकर सातवें पे कमीशन की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं। जब तक मांगे नहीं मानी जातीं, तब तक शिक्षक धरने पर ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब और चंडीगढ़ के कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के शिक्षक एकजुट हो रखे हैं, इसलिए सरकार के पास शिक्षकों की मांगें मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इस दौरान शिक्षकों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ स्लोगन दिखाए और नारेबाजी की।
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वहीं डीएवी कॉलेज में जारी भूख हड़ताल के तेरहवें दिन सेवानिवृत्त प्रो. अनिल सरवाल, डॉ. आईपीएस सिद्धू, डॉ. नीरू मलिक, डॉ. संदीप कौर, डॉ. सुतापा सरयाल, डॉ. आशीष कपूर और डॉ. नवनीत कुमार प्रूथी सुबह 9 से शाम 5 बजे तक हड़ताल पर बैठे। शाम 5 बजे से प्रो. कपिल गांधार, प्रो. सूरज नारायण, डॉ. संदीप बिष्ट और प्रो. उदयभान सिंह रविवार सुबह 9 बजे तक भूख हड़ताल पर बैठे। खालसा कॉलेज-26 में डॉ जगतार सिंह, डॉ. मनजिंदर सिंह, प्रो. कुलविंदर सिंह, डॉ. इंदरपाल, डॉ. हरमीत कौर, डॉ. कुलजीत आदि शिक्षकों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
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अधिकारियों ने चुप्पी साधी, बोले- जांच करवाई जाएगी
यूटी उच्च शिक्षा विभाग के सचिव सरप्रीत सिंह गिल ने बताया कि उन्हें जानकारी नहीं है कि कॉलेजों में शिक्षा बंद प्रदर्शन चल रहा है। इस बारे में जांच करवाई जाएगी। शहर के कॉलेजों के शिक्षकों की ओर से पीफैक्टो के आह्वान पर एक दिसंबर से शिक्षा बंद प्रदर्शन में हिस्सा लेकर सातवें पे कमीशन की मांग को लेकर परिसर और सड़कों पर प्रदर्शन किया जा रहा है। वहीं अधिकारियों को उच्च शिक्षा की खामियों से रूबरू करवाने को लेकर शिक्षकों ने कई बार उच्च शिक्षा बचाओ के बैनर के साथ मटका चौक पर अधिकारियों के दफ्तर जाने के समय भी प्रदर्शन किया है, लेकिन सरकार से लेकर अधिकारी सब शिक्षा के मुद्दों पर मौन है। वहीं दूसरी तरफ शहर के कॉलेजों में अगस्त में पूरी तरह ऑफलाइन कक्षाएं शुरू की गईं, पीयू ने अभी तक विभाग नहीं खोले थे, इसलिए ऑनलाइन परीक्षा का फैसला दिया। यही फैसला उन्होंने शहर के कॉलेजों के लिए दिया जबकि विद्यार्थी पांच महीनों से ऑफलाइन पढ़ रहे थे। इसके बावजूद चंडीगढ़ उच्च शिक्षा विभाग ने पीयू के फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
डॉ. सुमित सकलानी बोले- यूटी उच्च शिक्षा विभाग को कई बार लिखा पत्र
डीएवीसीटीयू के अध्यक्ष डॉ. सुमित सकलानी ने बताया कि यूटी उच्च शिक्षा विभाग शैक्षणिक संस्थानों की अनदेखी करने में लगा है। कई बार विभागीय अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है। विभाग की ओर से विद्यार्थियों की ऑफलाइन कक्षाओं के लिए आदेश दिए गए, लेकिन पीयू की ओर से ऑनलाइन परीक्षा के फैसले पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। विभाग न तो विद्यार्थियों और न ही शिक्षकों के हित में कोई फैसला ले रहा है। लंबे समय से शिक्षक सड़कों पर हैं, लेकिन सरकार के साथ अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा, सबने शिक्षा के मुद्दों पर चुप्पी साधी हुई है।