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जज्बे को सलामः भारत में वकील थे, कनाडा में कभी लगाते थे झाड़ू, आज चार देशों के समोसा किंग

Tue, 17 Mar 2020 02:53 PM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल, जालंधर
सुरिंदर पाल, जालंधर Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 17 Mar 2020 02:53 PM IST
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Tashan, Success Story of Samosa King Harpal Singh Sandhu
हरपाल सिंह संधू - फोटो : अमर उजाला
डॉलरों की चमक दमक की दीवानगी में यूरोपियन देशों में जाने वाले भारतीय मूल के लोगों के लिए टोरंटो के हरपाल सिंह संधू व उनका भाई हरमिंदर संधू एक मिसाल हैं। हरपाल सिंह संधू किसी समय वेयर हाउस में झाड़ू लगाकर पेट पालते थे। उनकी मेहनत वह लगन ने उन्हें कनाडा ही नहीं अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड का समोसा किंग बना दिया है।
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संधू की दो फैक्टरियां कनाडा में चल रही हैं, जहां रोजाना 1.5 लाख समोसे तैयार होते हैं और विभिन्न देशों में सप्लाई होता है। संधू ब्रदर्स आज समोसा किंग के नाम से मशहूर हैं अब एक बड़ा प्लांट लगाने जा रहे हैं, जहां दो लाख समोसे अतिरिक्त तैयार होंगे। होशियारपुर के गढ़शंकर के निकट मोरांवाली गांव के रहने वाले हरपाल संधू का जीवन संघर्षमय रहा है।
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1955 में जन्म लेने वाले हरपाल सिंह संधू ने पंजाब में ही स्नातक कर वकालत की डिग्री हासिल की और एक साल तक नवांशहर की अदालत में प्रैक्टिस की। 1980 में हरपाल संधू ने कनाडा का रुख कर लिया। वहां पर जाकर एक कंपनी जिसके वेयर हाउस थे, वहां पर झाड़ू लगाने की नौकरी से शुरुआत की।
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जब अपने मैनेजर के बॉस बन गए संधू...

वेयर हाउस में झाड़ू, पैकिंग की लेबर करते करते सुपरवाइजर की पोस्ट तक पहुंच गए। करीब ढाई साल बाद एक दिन हरपाल संधू ने कनाडा के नामवर न्यूज पेपर टोरंटो स्टार में एक विज्ञापन देखा, जिसमें उसकी कंपनी में आप्रेशन मैनेजर की पोस्ट निकली थी। हरपाल संधू पेपर लेकर रिसेप्शन पर गए तो वहां पर बैठी लड़की ने तपाक से कहा कि मिस्टर संधू यह नौकरी एक हाईक्वालीफाइड के लिए है। आप्रेशन मैनेजर की पोस्ट संधू के तत्कालीन मैनेजर से ऊपर की थी। संधू ने रिसेप्शनिस्ट से कहा कि वह एलएलबी पढ़ा हुआ है और सब कुछ मैनेज कर सकता है।

रिसेप्शनिस्ट ने संधू को रिज्यूम तैयार करने के लिए कहकर वापस भेज दिया। अचानक उन दिनों कंपनी के मालिक कार्यालय आए तो हरपाल संधू न्यूज पेपर लेकर सीधा पहुंच गए। मालिक के पास जाकर तपाक से अंग्रेजी में बात की। मालिक ने भी संधू को समझाया कि यह नौकरी काफी मुश्किल है लेकिन संधू ने इस बात के लिए मालिक को तैयार कर लिया कि उसको छह माह के लिए इस पोेस्ट पर लगाकर देखा जाए। आप्रेशन मैनेजर की पोस्ट पर वह अधिक पगार नहीं लेगा। उसकी पगार सुपरवाइजर की ही रखी जा सकती है।

संधू बताते हैं कि मालिक ने तत्काल वाइस प्रेसिडेंट को बुलाया और मेरा आत्मविश्वास देखकर मुझे आप्रेशन मैनेजर की पोस्ट पर नियुक्त कर दिया। अब मेरा तत्कालीन मैनेजर मुझे रिपोर्ट करने लगा था। मेरे सामने कई रुकावटें खड़ी की गईं, रंगभेद व नस्लभेद भी किया गया लेकिन मेरा टारगेट तो अपनी सफलता की सीढ़ी चढ़ना था। पांच साल तक आप्रेशन मैनेजर की पोस्ट पर सफलतापूर्वक कार्य करने के बाद 1986 में हरपाल सिंह संधू ने एयर कनाडा ज्वाइन कर ली।

सपना था अपना कारोबार हो...

एयर कनाडा में नौकरी के दौरान हरपाल सिंह संधू ने सपना देखा था कि वह अपना कारोबार जरूर करेगा चाहे कुछ भी हो जाए। 1989 में हरपाल सिंह संधू ने अपना रेस्टोरेंट कनाडा के टोरंटो में शाने दरबार के नाम से शुरू किया। रेस्टोरेंट में काफी घाटा भी पड़ गया लेकिन हरपाल सिंह संधू ने हिम्मत नहीं हारी। 1993 में एक अन्य रेस्टोरेंट मिसीसागा में खोला और चलाने लगे। दो रेस्टोरेंट खुलने से कुछ रिस्पांस ठीक होने लगा लेकिन दोनों रेस्टोरेंट के बीच की दूरी के कारण हरपाल सिंह संधू को अपने भाई हरमिंदर संधू को निवेदन करना पड़ा कि वह उनके साथ कारोबार में आकर संभाल ले।

भाई के साथ आने से बढ़ गयी ताकत...
संधू ब्रदर्स टोरंटो में काफी मशहूर होने लगे थे दोनों ने मिलकर समोसा व मिठाई की फैक्टरी लगाने की सोची। इसके लिए आटोमेटिक मशीनों को तैयार करवाने के लिए जर्मनी की कंपनी के साथ इकरार किया गया। नाम रखा गया समोसा एंड स्वीट फैक्टरी और 1997 में शुरू कर दिया गया। कनाडा में पहली ऐसी समोसा फैक्टरी थी, जिसका समोसा पूर्ण रूप से मशीन में तैयार होना था और मिठाई 50 फीसदी मशीनों से तैयार होनी थी। टोरंटो में 2500 स्क्वेयर फीट में छोटी सी फैक्टरी शुरू की गई लेकिन मेहनत व लगन से संधू ब्रदर्स का समोसा कनाडा में छा गया।

उनको फैक्टरी 20 हजार स्क्वेयर फीट में लगानी पड़ी। समोसे व मिठाई की डिमांड बढ़ने लगी तो मिसीसागा में 45 हजार स्क्वेयर फीट स्थान लेकर एक अन्य फैक्टरी लगाई गई। दोनों फैक्टरियों में रोजाना 1.5 लाख समोसे तैयार होते हैं जो कनाडा, आस्ट्रेलिया, अमेरिका में सप्लाई होते हैं।

परिवार की एकता सफलता की सीढ़ी

1986 में भारतीय मूल की लड़की बलिंदरजीत कौर से शादी करने वाले हरपाल सिंह संधू का एक सीधा मंत्र है, परिवार की एकता। उनका कहना है कि आज भी उनका भाई हरमिंदर व उसके दोनों बेटे उनके साथ रहते हैं। हरपाल संधू के दो बेटे हरमन व परम संधू के अलावा हरमिंदर व उसके दोनों बेटे मिलकर दोनों फैक्टरियां चलाते हैं।

आज भी पूरा परिवार एक ही छत के नीचे रहता है। हरपाल सिंह संधू कनाडा जाने वाले युवाओं को एक ही संदेश देते हैं कि मेहनत लग्न, सच्चाई और साकारात्मक ऊर्जा के साथ चलते चलो, सफलता अपने आप सामने आ जाएगी। कनाडा में जो मेहनती है, वह एक मुकाम पर है। आज भी हरपाल संधू बेशक 65 साल के हो गए हैं लेकिन रोजाना फैक्टरी जाना, खुद कामकाज देखे बिना नहीं रह सकते।
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