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ऑस्ट्रेलिया में पंजाब और पंजाबियत को जिंदा रखे हुए हैं उशविंदर कौर, बतौर लैंग्वेज टीचर कार्यरत हैं

Sun, 23 Feb 2020 02:20 PM IST
खुशबू गोयल रिंपी गुप्ता, पटियाला
रिंपी गुप्ता, पटियाला Published by: खुशबू गोयल Updated Sun, 23 Feb 2020 02:20 PM IST
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Tashan, NRI Ushwinder Kaur Language Teacher in Australia
उशविंदर कौर - फोटो : अमर उजाला
सरकारी नौकरियां छोड़कर मेलबोर्न जाकर बसीं जालंधर की उशविंदर कौर आज विदेशी धरती पर पंजाबी भाषा और पंजाबी सभ्याचार के प्रचार-प्रसार में जी-जान से जुटी हैं। अमृतधारी उशविंदर कौर का कहना है कि भले ही एक अच्छी जिंदगी की चाहत में वह विदेश में आकर बस गए थे, लेकिन आज भी उन्हें अपने पंजाब से उतना ही प्यार है।
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अपने पंजाब की मिट्टी का कर्ज उतारने के लिए ही वह ऑस्ट्रेलिया में बसे सभी पंजाबियों में पंजाबी भाषा व सभ्याचार का प्रचार-प्रसार करती हैं। खास तौर से वह उन पंजाबियों के बच्चों को पंजाबी कल्चर व भाषा से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं, जिनका जन्म विदेशी धरती पर हुआ है और उन्हें पंजाब के बारे में कुछ भी पता नहीं है।
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अमर उजाला से बात करते हुए उशविंदर ने बताया कि वह जालंधर में सरकारी स्कूल में अध्यापिका थीं, जबकि पति नॉर्दन रेलवे में सेक्शन ऑफिसर के पद पर अमृतसर में तैनात थे, लेकिन नौ साल पहले अचानक से एक दिन आस्ट्रेलिया जाने का फैसला लिया। औपचारिकताएं पूरी करने के छह महीने बाद ही उन्हें पीआर मिल गई। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में कोई जानने वाला नहीं था।
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पति मनप्रीत सिंह, सात साल की बड़ी बेटी अव्वलनूर कौर, साढ़े चार साल की छोटी बेटी अशनूर कौर के साथ विदेशी धरती की तरफ कदम बढ़ाए।

गुरुद्वारा साहिब के स्कूल में भी पढ़ाया

शुरुआत में छोटी-मोटी नौकरियां करके घर का गुजारा किया। बाद में केग्रीवन सिंह सभा गुरुद्वारा साहिब के स्कूल में पढ़ाना शुरू किया। वहां बच्चों को गुरबाणी का पाठ सिखाना शुरू किया। उन्हें पंजाबी भाषा बोलनी सिखाई और पंजाबी लोक नृत्य गिद्दा और भंगड़ा की ट्रेनिंग दी।

बस यहीं से उशविंदर कौर को लगा कि विदेशी धरती पर बसे पंजाबियों के बच्चों को पंजाबी सभ्याचार और पंजाबी भाषा से जोड़ना जरूरी है, ताकि वह अपनी मिट्टी से जुड़े रह सकें। तीन साल तक इस स्कूल में रहकर बड़ी गिनती में पंजाबी बच्चों को पंजाबी विरसे से जोड़ा।

अब उशविंदर कौर विक्टोरियन स्कूल आफ लैंग्वेज में भी टीचर के तौर पर काम करते हुए पंजाबी बच्चों को पंजाबी विरसे साथ जोड़ने का काम कर रही हैं। वह स्कूल में बच्चों के कल्चरल प्रोग्राम वगैरा भी कराती हैं। उनके इस सराहनीय काम के लिए इंडो टाइम्स मैगजीन में उनकी प्रशंसा में लेख भी छप चुके हैं।

उशविंदर कहती हैं कि उनकी बेटियां भी उनके नक्शे कदम पर चलती हैं, जहां तक हो सके, वह पंजाबी में ही बात करती हैं।
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