फ्रांस में भारतीयों के मसीहा, जो लावारिस शवों की शिनाख्त करके भेजते हैं उनके अपनों तक भारत

khushbu goyal अमर उजाला नेटवर्क, जालंधर Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 18 Feb 2020 03:34 PM IST
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एनआरआई इकबाल भट्टी
एनआरआई इकबाल भट्टी - फोटो : फाइल फोटो

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मूलरूप से कपूरथला के भुल्लथ के निकट गांव निक्की मयानी निवासी इकबाल भट्टी आज फ्रांस में भारतीय मूल के लोगों के लिए मसीहा बन चुके हैं। उन्होंने 16 साल पहले लवारिस भारतीयों के शवों की शिनाख्त कर उनको स्वदेश भेजने का मिशन शुरू किया था और अब तक वह 130 शव भारत भिजवा चुके हैं। अब तो फ्रांस सरकार भी उनका लोहा मानने पर मजबूर हो गई है।
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यही वजह है कि फ्रांस में जब भी किसी भारतीय मूल के व्यक्ति की लवारिस लाश मिलती है तो पहली घंटी इकबाल भट्टी के फोन पर बजती है। पुलिस उनकी मदद लेकर शव की शिनाख्त करती है। 63 साल के इकबाल भट्टी 1991 में फ्रांस में पहुंचे थे। उन्होंने पहले वहां राजमिस्त्री का काम किया और आजकल एक स्टोर पर सेल्समैन के तौर पर कार्यरत हैं।


2003 में फ्रांस में भुल्लथ का युवक सुखविंदर सिंह लापता हो गया। वहां बने हर गुरुद्वारे में अनाउंसमेंट होने लगी। उसके दोस्त भी काफी परेशान थे। भट्टी कहते हैं कि इस घटना ने उनके जीवन का मकसद बदल डाला। सुखविंदर ने राजनीतिक शरण के लिए फ्रांस सरकार को आवेदन कर रखा था।

सुखविंदर को लेकर उनके अंदर दर्द उठा और उन्होंने खोजबीन शुरू की। इसके बाद पेरिस से लगभग 1500 किमी दूर पुर्तगाल बॉर्डर से उन्होंने सुखविंदर का शव ढूंढ निकाला।
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1500 किमी दूर से तलाश लाए सुखविंदर का शव

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